Friday, November 24, 2017
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vastu

हर इंसान का सपना होता है अपना घर। जहां पर वह परिवार के साथ खुशी खुशी जिंदगी गुजार सके। नया घर बनवाने के बाद ही परिवार का हर सदस्य सोचने लगता है कि पुराने घर की तुलना में नया घर जीवन में समृद्धि और सुख - शांति लाएगा। पुराने घर की समस्याओं से सदा के लिए पीछा छूट जाएगा। परिवार का हर सदस्य नये घर में जाने के लिए दिन गिनने लगता है। आखिर गृह प्रवेश भी हो जाता है। लेकिन जिस सुख,समृद्धि और शांति की तलाश आपको नये घर में थी वह नहीं मिल रही है। अक्सर लोगों के साथ ऐसा होता है। भगवान करे आपके साथ ऐसा कभी न हो। घर बनवाने से पहले वास्तु का ध्यान रखें और वास्तु के अनुसार नया घर बनवाएं। देखिए खुशियां किस तरह आपके नये घर में दस्तक देगी।

घर बनवाने के लिए सबसे पहले आपको जमीन की आवश्यकता होगी। यहीं से वास्तु को ध्यान में रखना प्रारंभ करें। पेश है आपके लिए कुछ वास्तु टिप्स -

 

1.वास्तु के अनुसार जमीन का टुकड़ा चौकोर या आयताकार होना चाहिए।चौकोर जमीन सबसे अच्छी मानी जाती है।

2. जमीन की सतह उत्तर एवं पूर्वी दिशा की तुलना में दक्षिण एवं पशिचम दिशा में उंची होनी चाहिए।

3. जिन जमीनों का मुंह उत्तर या पूर्वी दिशा में हो उन्हें दक्षिण या पशिचम की तुलना में बेहतर माना जाता है।

4. तालाब, नदी, नाला,कूआं उत्तर या पूर्वी दिशा में होने चाहिए।

5. बड़े बड़े निर्माण या पहाड़ जमीन के पशिचम या दक्षिण दिशा में होने चाहिए।

6. जमीन के उत्तर या पूर्वी दिशा में कोई बड़ा पेड़ नहीं होना चाहिए।

7. दक्षिण या पशिचम दिशा में कोई गडढ़ा नहीं होना चाहिए।

8. बरसात का पानी दक्षिण से उत्तर और पशिचम से पूरब की ओर बहना चाहिए।
जमीन के आकार

1.चौकोर - चौकोर जमीन मकान बनवाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार इस तरह के जमीन पर मकान बनवाने से विकास, खुशी और समृद्धि बढ़ती है।

2. आयताकार - ऐसे जमीन भी मकान बनवाने के लिए अच्छे माने जाते हैं। यदि लंबाई उत्तर की ओर हो और चौड़ाई पशिचम की ओर तो इसे और भी बेहतर माना जाता है। इन घरों में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और धन धान्य की कमी नहीं होती।

3.ति्रकोण - ति्रकोण जमीन पर कभी भी घर नहीं बनवाने चाहिए। यहां हमेशा आग का खतरा रहता है।

4.गोलाई - वास्तु के अनुसार ऐसे जमीन खरीदने वाले की किस्मत खराब हो जाती है।
जिन जमीनों के चार से अधिक कोने होते हैं उन पर रहने के लिए मकान नहीं बनवाना चाहिए। यहां रहने वाले लोग हमेशा डर के साये में जीते हैं।

गौ मुखी जमीन - गौ मुखी जमीन उसे कहते हैं जो सामने की ओर संकीर्ण और पीछे की और चौड़ा हो। ऐसे जमीन शुभ माने जाते हैं।हो सके तो रहने के लिए घर इसी तरह के जमीन पर बनवाने चाहिए। ऐसे जमीन घर के मालिक के लिए समृद्धि लाती है।
सिम्हा मुखी जमीन - इस तरह के जमीन सामने की ओर चौड़ा और पीछे की ओर संकीर्ण होते हैं। इस तरह के जमीन रहने का घर बनाने के लिए अशुभ है परंतु व्यवसासिक दृषिट से ठीक है।

जमीन की वास्तु के बारे में तो आपको पता चल गया। अब घर के वास्तु की ओर रूख करते हैं-

1.घर का मुख्य द्वार उत्तरी या पूर्वी दीवार पर होना चाहिए।

2. घर की बालकनी पूर्व में होनी चाहिए।

3. घर का मास्टर बेड रूम दक्षिण पशिचम कोने पर होना चाहिए।

4. घर के मंदिर उत्तर पूर्वी कोने पर होना चाहिए।

5. किचेन दक्षिण पूर्वी कोने पर होना चाहिए। खाना बनाते समय आपका चेहरा पूर्व की ओर रहना चाहिए।

6. टायलेट उत्तर पशिचम कोने पर होना चाहिए।

7.स्टडी उत्तर या पूर्व में होना चाहिए। पढ़ते हुए आपका चेहरा भी उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।आफिस टेबिल भी इसी तरह लगाएं ताकि बैठने वाले का चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो।

8. भारी सामान दक्षिण पशिचम में रखे जाने चाहिए।

 

9. अपना बेड इस तरह रखें ताकि सोते समय आपका सर दक्षिण या पूर्वी दिशा में हो। यदि आपका सर दक्षिण दिशा में होता है तो आपको लंबी आयु मिलेगी ,सोते समय पूर्व दिशा में सर हो तो ज्ञान समपन्न होंगे, सोते समय पशिचम दिशा में सर हो तो दुख और गम मिलेंगे, उत्तर की ओर सर रखकर सोने का मतलब है मृत्यु। मृत देह को ऐसे लिटाया जाता है जिससे इसका सर उत्तर दिशा की ओर हो।

10. घर में आईना और तस्वीरें उत्तरी तथा पूर्वी दीवार पर लगानी चाहिए।

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