Friday, November 24, 2017
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आइए जानें, जैमोलॉजिस्ट  अर्थात रत्नशास्त्री क्या है। यह ज्यूलरी डिजाइनिंग से किस तरह अलग है। दोनों के रोजगार में क्या संभावनाएं हैं और इसके लिए कौन-से कोर्स करने होंगे?

जैमोलॉजी क्या है?

जैमोलॉजी, साइंस की एक स्ट्रीम है जिसमें विभिन्न रत्नों की शुद्धता का पता लगाया जाता है। जैमोलॉजी में मोटे तौर पर रत्नों की कटाई, उसकी सरंचना का अध्ययन, रत्नों से संबंधित लेटैस्ट फैशन और डिजाइनिंग आदि समाहित है। भारतीय रत्न विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के दिनेशक एवं मुख्य रत्नशास्त्री श्री नागेश त्रिपाठी बताते हैं-दरअसल, ज्यूलरी डिजाइनिंग और जैमोलॉजी  को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। जैमोलॉजी ज्यूलरी से संबंधित कार्यक्षेत्र का ही हिस्सा है। यदि राशि के अनुसार भी देखा जाए तो इन रत्नों को गहनों में ही धारण कर पहना जाता है। इसका 95 प्रतिशत प्रयोग आभूषणों में ही किया जाता है। कहा जा सकता है ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

जैमोलॉजी का महत्व

गहनों के प्रति लोगों का उत्साह तो शुरू से ही था लेकिन पिछले दस सालों में ही इनके प्रति लोगों का उत्साह बढ़ा है। पूरी जानकारी देने का काम जैमोलॉजिस्ट करते हैं। यही कारण है कि आज की तारीख में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैमोलॉजिस्टस की मांग बढ़ी है। भले ही जैमोलॉजिस्ट का कार्यक्षेत्र सीमित है। फिर भी इसमें आपको आपकी पसंद का कार्यक्षेत्र चुनने का मौका है। जैसे किसी विशेष कम्पनी में एक्सपोर्ट- इम्पोर्ट का काम कम्पनी में मार्कीटिंग से जुड़े पद, डिजाइनिंग, ब्रांड मैनेजर, पी.आर. कंसलटैंट आदि। जहां तक स्वरोजगार का स्वाल है तो यह क्षेत्र उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जिन्हें सभी सुविधाएं प्राप्त हों। इसके अलावा जैमोलॉजिस्ट द्वारा रत्न परीक्षण प्रयोग शाला भी खोली जा सकती है।

जैमोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स

भारतीय रत्न विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा जैमोलॉजी के डिप्लोमा कोर्स में 5-6 माह की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें हीरे व रंगीन नगों की पहचान, रंग, कैरट, कटाई-छटाई आदि संबंधित विषयों की जानकारी देना शामिल है। संस्थान में रत्न प्रशिक्षण डिप्लोमा को पूरा करने के लिए हीरा संबंधी कोर्स और रंगीन रत्नों की पहचान संबंधी कोर्स में सफल होना जरूरी है। डिप्लोमा कोर्स के अलावा रंगीन रत्नों के लिए 3 माह आदि, हीरे संबंधी प्रशिक्षण के लिए 2 माह का सर्टीफिकेट कोर्स भी उपलब्ध है।

चयन प्रक्रिया

डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लेने के लिए किसी भी प्रमाणित स्कूल या कालेज से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं कक्षा या स्नातक होना जरूरी है। यह कोर्स अंग्रेजी माध्यम से होता है। इसीलिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी जरूरी है। दाखिला मैरिट बेस पर किया जाता है। सूरत स्थित भारतीय हीरक संस्थान में यह कोर्स तीन भाषाओं में उपलब्ध है जो रैगुलर या और डिस्टैंट लर्निंग से भी कराया जाता है।

कार्यक्षेत्र

रत्न और गहना देश से एक्सपोर्ट की जाने वाली दस वस्तुओं में से एक है। 1966 में फाइनैंस मिनिस्ट्री, गवर्नमैंट आफ इंडिया के सौजन्य से जैम बिजनैस और उसके एक्सपोर्ट के क्षेत्र में जैम तथा ज्यूलरी विषयक काऊंसिल का निर्माण किया गया था। भारतीय रत्न विज्ञान संस्थान में काफी महारत हासिल किए हुए अध्यापक यहां ट्रेनिंग देते हैं। उच्च तकनीक पर आधारित प्रयोगशालाओं में विद्यार्थी रत्नों से संबंधित प्रैक्टिकल बातें सीखते हैं। पढ़ाई के दौरान संस्थान द्वारा समय-समय पर स्टडी टूर और सैमीनार का आयोजन भी होता है।

रोजगार की संभावनाएं

आधुनिक फैशन में गहनों में हीरा और नगों के तालमेल से ज्यूलरी शो रूम में जैमोलाजिस्ट और ज्यूलरी डिजाइनर की मांग बढ़ी है। रत्नों की जांच, डिजाइन, उनकी प्रमाणिकता, कटाई और नए-नए तरीकों से गहनों में निखार लाने के कारण उनकी जरूरत तय है। इसके लिए रत्न परीक्षण प्रयोगशालाओं, छोटी-बड़ी एक्सपोर्ट एजैंसियां, ज्यूलरी शोरूम और एक्सपोर्ट होम में जैमोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो सकती है।

वेतनमान

विभिन्न संस्थाओं में काम करने वाले जैमोलाजिस्ट और ज्यूलरी डिजाइनर की तनख्वाह शुरूआती दौर पर दस से पंद्रह हजार रुपए प्रतिमाह तय की जाती है। अनुभव होने के बाद बीस से पचास हजार तनख्वाह प्रतिमाह मिल सकती है। इसके अलावा निजी ज्यूलरी शोरूम व एक्सपोर्ट एजैंसियों के अपने स्तर और प्राफिट पर जैमोलॉजिस्ट व ज्यूलरी डिजाइनर की तनख्वाह निर्भर है।

 

कहां से करें कोर्स

  • भारत में जैमोलॉजी संबंधी कोर्स उपलब्ध करने वाले चार संस्थान हैं जिसमें से मुम्बई में स्थित इंस्टीच्यूट हैड आफिस है। बाकी तीन संस्थान रीजनल सैंटर हैं।
  • रत्न तथा आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद, डायमंड प्लाजा, पांचवीं मंजिल, 391-, दादा साहेब बडकम्कर मार्ग, मुम्बई : 400004
  • भारतीय हीरक संस्थान कतरगाम, जी.आई.डी.सी. सुमुल डेरी रोड, सूरत : 395008
  • भारतीय रत्न विज्ञान संस्थान, एफ. 32-33, फ्लेटेड फैक्टरीज काम्प्लैक्स झंडेवालान, नई दिल्ली: 110055
  • रत्न परीक्षण प्रयोगशाला, राजस्थान चैम्बर्स भवन, एम.आई. रोड जयपुर, 302001

इसके अतिरिक्त

  • जैमोलॉजिकल इंस्टीच्यूट आफ इंडिया, 29, गुरुकुल चैम्बर्स, मुंबादेवी रोड मुम्बई-400002
  • ज्यूलरी एक्सपोर्ट प्रोमोशन काऊंसिल, डी-15 कामर्स सैंटर, टारडीयो, मुम्बई-400034
  • सेंट जेवियर्स कालेज, जैमोलॉजी डिपार्टमैंट, मुम्बई-400001
  • इंडियन जैमोलॉजिकल इंस्टीच्यूट, निर्मल टावर, 10 फ्लोर, 26, बारखंबा रोड, नई दिल्ली -110001
  • निफ्ट कैम्पस, अपोजिट गुलमोहर पार्क, हौज खास नई दिल्ली-110016

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