Saturday, November 25, 2017
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हाथ की कठोरता, मुलायमता, स्थूलता देखकर भी किसी जातक के व्यक्तित्व और स्वभाव का पता लगाया जा सकता है। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार बनावट के आधार पर सात प्रकार के हाथ होते हैं, जिन्हें व्यक्ति का दर्पण भी कह सकते हैं।

समकोण हाथ : जिसके हाथ की लंबाई-चौड़ाई बराबर हो और चारों अंगुलियों को मिलाकर बीच की अंगुली की लंबाई के बराबर हो तो ऐसा हाथ  समकोण होता है। जिस इंसान का हाथ समकोण आकृति में होता है, वह व्यक्ति स्वाभिमानी, मिलनसार, नम्र, आज्ञापालक और चरित्रवान होते हैं।  

चमसाकार  हाथ : जिस व्यक्ति के हाथ की अंगुलियां कुछ मुड़ी हुई, हथेली चौड़ी, अंगुलियों के पास चौड़ाई अधिक और बीच में कम चौड़ाई हो तो ऐसे हाथ को चमसाकार हाथ कहते हैं। ऐसे व्यक्ति परिश्रमी, आविष्कारक, इंजीनियर और समाज सुधारक होता है।

दार्शनिक हाथ : अंगुलियों की हड्डियां तथा जोड़ उभरे हुए, नाखून लंबे, हाथ गठीला, लंबा और बीच में झुका हुआ हो तो इसे दार्शनिक हाथ ही कहा जाएगा। ऐसा व्यक्ति कल्पनाशील होता है। इनकी इच्छा और विचार शक्ति विशाल होती है।

व्यावसायिक हाथ : साधारण लंबाई-चौड़ाई का हाथ जिसकी अंगुलियां जड़ में मोटी और पोरों पर पतली होती हैं। ऐसे हाथ को व्यावसायिक या कलात्मक हाथ कहते हैं। ऐसे हाथ वाले व्यक्ति भावुक, उतावले, कान के कच्चे होते हैं। ऐसे व्यक्ति काम की शुरूआत तो कर लेते हैं लेकिन उसे अधूरा छोड़कर पलायन भी कर सकते हैं।

निकृष्ट हाथ : यह खुरदरा, छोटा, मोटा, भारी और बेडौल होता है। ऐसे हाथ वालों का अंगूठा बहुत छोटा होता है। हाथ की रेखाएं भी छोटी होती हैं। इनकी सोच, आहार, निद्रा तक ही सीमित रहती है। स्वार्थ साधना ही इनका लक्ष्य होता है।

आदर्शवादी  हाथ : ऐसे हाथ वालों की अंगुलियां जड़ में कुछ हल्की और ऊपर कुछ भारी होती हैं। यह हाथ सुंदर, लंबा, तंग और मुलायम होता है। इनके विचार केवल आदर्शवादी होते हैं।

मिश्रित हाथ  : इस प्रकार के हाथों में एक से अधिक हाथों के गुण पाए जाते हैं। इस हाथ वाले लोगों का फल भी मिश्रित होता है। मिश्रित हाथ वाले लोग आशंकित, अस्थिर चित्त वाले होते हैं।

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