Friday, November 24, 2017
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asarambapu

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार  14 जून 2014 तक आशाराम बापू के उपर शनि की महादशा में शनि की अन्तर्दशा कष्टप्रद है। जन्मकुडली में शनि नीच राशि का है जिसके कारण आशाराम बापू विवादों के घेरे में उलझते जा रहे हैं।

asaram ki kundali

                ज्योतिषीय गणना के अनुसार आशाराम बापू का जन्म 17 अप्रैल 1941 में कर्क लग्न एवं धनु राशि का है।उनकी जन्मकुण्डली में जहां सूर्य एवं मंगल दोनों ग्रह अपनी-अपनी उच्च राशि में हैं, वहीं शनि एवं बुध अपनी-अपनी नीच राशि में सिथत हैं। धनु राशि का स्वामी देवगुरू बृहस्पति है जो अपने मित्र मंगल की राशि में सिथत है। मंगल विशेष बलवान होकर एक शकितशाली राजयोग निर्मित कर रहा है जिसे पंचमहापुरूष योग के नाम से जाना जाता है। जिन व्यकितयों की कुण्डली में पंचमहापुरूष योग बनता है, वे जीवन में विशेष उपलबिधयां हासिल करते हैं। आशाराम की जन्मकुण्डली में मंगल उच्च राशि का होकर केन्द्र में होने के कारण रूचक नामक पंचमहापुरूष योग बना रहा है। ग्रहों का राजा सूर्य भी अपनी उच्च मेष राशि में सिथत होकर दशम कर्म भाव में विशेष बलवान है। गुरू, मंगल एवं सूर्य के शुभ प्रभाव के कारण आशाराम बापू प्रसिद्ध आध्यातिमक संत के रूप में सामने आए हैं, लेकिन उनकी कुण्डली में नीच राशि का शनि कर्म भाव में सूर्य, गुरू, शुक्र के साथ होने के कारण उन्हें पीड़ा पहुंचा रहा है। वर्तमान में उनके उपर शनि की महादशा चल रही है, शनि प्रमुख न्यायकर्ता है, कर्मों के अनुसार व्यकित को दणिडत करता है। शनि बुद्धि भ्रमित कर व्यकित को कष्ट प्रदान करता है। 14 जून 2014 तक आशाराम बापू के उपर शनि की महादशा में शनि की अन्तर्दशा कष्टप्रद है। 6 अक्टूबर 2013 तक मंगल की कर्क राशि में गोचर सिथति भी आशाराम बापू के लिए प्रतिकूल है।

 

 

 

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