Saturday, November 25, 2017
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hanuman jayanti

                नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को कहा जाता है। नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं। इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसके अतरिक्त इस चतुर्दशी को नरक चौदस, रूप चौदस, आदि नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन छह कार्य विशेष रूप से सम्पन्न किए जाते हैं, पहला उबटन से स्नान, दूसरा यमतर्पण, तीसरा हनुमत पूजन, चौथा यमराज के निमित्त दीपदान, पांचवा मशाल दर्शन एवं छठा दीपमाला प्रज्जवलन।

अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा से मुकित के लिए हनुमान जयंती के दिन राम नाम लिखने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए क्योंकि आज के दिन लिया गया संकल्प केवल राम कृपा अपितु हनुमत कृपा भी दिलाता है। हनुमान जी राम नाम लिखने वालों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। इस वर्ष हनुमान जयंती शनिवार के दिन पड़ने के कारण विशेष महत्वपूर्ण मानी जा रही है, स्वयं शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया है कि जो भी भक्त सच्चे मन से हनुमत उपासना करेगा, उसे वे अपनी कृपा अवश्य प्रदान करेंगे। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। दीपावली से एक दिन पहले मनार्इ जाने वाली नरक चतुर्दशी के दिन संध्या के पश्चात दीपक प्रज्जवलित किए जाते हैं। इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तिथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा उपासना की जाती है। हिंदू मान्यताओं में नरक चतुर्दशी का पौराणिक महत्व भी है। इस दिन भगवान श्रीष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का संहार किया था और उसके चंगुल से सोलह हजार एक सौ कन्याओं को आजाद कराकर अपनी शरण दी थी। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल उबटन से मालिश करके चिचड़ी की पत्तियां जल में डालकर स्नान का विधान है। ऐसा करने से नरक से मुक्ति मिलती है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान की आराधना अत्यन्त पुण्यदायक मानी गर्इ है। इससे पाप कटता है और सौन्दर्य की प्रापित होती है। ऐसा माना जाता है कि नरक चौदस को पूजा के दौरान घर-परिवार से नरक अर्थात दु:-विपदाओं को बाहर किया जाता है। ज्योतिषाचार्य गुंजन वाष्र्णेय के अनुसार विधि-विधान से पूजा करने वाले वयक्ति किे मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और उसका जीवन नरक की यातनाओं से मुक्ति हो जाता है। नरकचतुर्दशी के दिन अभ्यंगस्नान, यमतर्पण, आरती, ब्राह्राणभोज, वस्त्रदान, यमदीपदान, प्रदोषपूजा, शिवपूजा, दीपप्रज्वलन जैसी धार्मिक विधियां करने से कोर्इ भी मनुष्य अपने सभी पाप बंधन से मुक्ति हो कर हरीपद को प्राप्त कर्ता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना चाहिए। इस दिन दक्षिण मुख करके यमराज से प्रार्थना करने पर वयक्ति किे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं। सायंकाल देवताओं का पूजन करके घर, बाहर, सड़क आदि प्रत्येक स्थान पर दीपक जलाकर रखना चाहिए।

हनुमत जन्मोत्सव के दिन मिलती है राम भक्तों को ब्याज

राम नाम बैंक के खाताधारकों को मिलता है

हनुमान जन्मोत्सव के दिन मनोकामना पूरी होने का ब्याज

                इस वर्ष शनिवार को हनुमान जन्मोत्सव होने के कारण अधिक संख्या में लोग हनुमत उपासना में लीन रहेंगे क्योंकि हनुमत उपासना केवल बल-बुद्धि की प्रापित होती है अपितु शनि जैसे अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा का सरलता से शमन हो जाता है। इस अवसर पर राम नाम बैंक के खाताधाराकों को राम नाम लेखन पुसितका के साथ शनि राशिफल नि:शुल्क दिया जाएगा, साथ ही शनि के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। प्रत्येक वर्ष हनुमान जयंती के दिन राम नाम लिखकर राम नाम बैंक में जमा करने वालों को उनके खातों में ब्याज के रूप में हनुमत कृपा मिलती है। ब्याज दो प्रकार से मिलती है, एक पुण्य के रूप में और दूसरा मनोरथ पूर्ण होने के रूप में। पुण्य बल खाते में होने से भक्त को अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा से मुकित मिलती है। हर धर्म, हर जाति के लोग बिना किसी भेद-भाव के हनुमान जयंती के दिन अपने खातों में पूर्व में जमा किए गए राम धन की गणना अवश्य करवाते हैं। जो भक्त भगवान राम की शकित पर पूर्ण विश्वास कर राम नाम लिखता है और हनुमान जयंती के दिन पूजन करता है, उसकी मनोकामना राम भक्त हनुमान अवश्य पूर्ण करते हैं। ऐसा विश्वास है असंख्य लोगों को जो वर्षों से दूर-दराज के इलाकों से छोटी दीपावली के दिन बैंक में राम नाम चढ़वाने के लिए आते हैं। जो भक्त हनुमत जयंती के दिन प्रयाग सिथत राम नाम बैंक में नहीं पहुंच पाते, वे लोग डाक द्वारा अथवा किसी के माध्यम से लिखित राम धन बैंक में जमा करवाते हैं। उपमा अग्रवाल के अनुसार हनुमान जयंती के दिन राम नाम लिखने से हनुमान जी की शकितयों का अनुभव होता है। शहर में अनेक स्थानों पर राम नाम जमा करने की विशेष सुविधा है। जीरो रोड में राम नाम की कमान कागज व्यवसायी अनिल अग्रवाल सम्भाले हुए हैं, जो नि:स्वार्थ नि:शुल्क राम भक्तों को राम नाम पुसितकाएं उपलब्ध करात हैं, साथ ही जमा किए गए राम धन को एकत्र कर सिविल लाइन्स सिथ्त मुख्य शाखा तक पहुंचाते हैं। अनिल अग्रवाल कहते हैं कि भगवान राम की सेवा के लिए वे हर समय उपसिथत रहते हैं क्योंकि शास्त्रों के अनुसार हजार काम छोड़कर र्इश्वर का काम करना चाहिए। सेवानिवृत्त अधिवक्ता जगत नारायण अग्रवाल 77 वर्ष की उम्र में भी दिन-रात केवल एक ही काम करते हैं, वह है भगवान राम की सेवा जिसके निमित्त वे नित्य राम नाम लिखते हैं और दूसरों से लिखवाकर राम नाम बैंक में जमा करते हैं, उनका मानना है कि ऐसा करने से उन्हें आतिमक शांति तो मिलती है, साथ में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्योतिर्विद गुंजन वाष्र्णेय के अनसार शनि की साढ़ेसाती, राहु की महादशा सहित अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा को मात्र राम नाम लिखकर दूर किया जा सकता है। लाल रंग की कलम से जब भक्त राम नाम अंकित करते हैं तो उसका प्रभाव मसितष्क के माध्यम से अवचेतन मन पर पड़ता है जिससे आधि-व्याधियों से व्यकित मुक्त रहता है।

 

 

 

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