Friday, November 24, 2017
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12-12-12

सदी का बारहवां वर्ष, बारहवां महीना और बारहवीं तारीख, यानि 12.12.12, अंकों की जुगलबंदी है। इस तिगड़ी में पंचग्रही योग पड़ने से अंक ज्योतिष की यह गणना ब्रहमाण्डीय ग्रह-नक्षत्रों के साथ एक दुर्लभ संयोग का सृजन कर रही है। वृशिचक राशि में पांच ग्रहों का एक साथ होना, पंचग्रही योग का निर्माण कर रहा है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र व राहु, पांचों एक साथ वृशिचक राशि में होने से अपना मिश्रित प्रभाव जन जीवन पर डालेंगे।

वृशिचक राशि में चन्द्रमा अपनी नीच अवस्था में होने के कारण बलहीन होता है, अगर साथ में सूर्य हो तो वह सूर्य से अस्त हो जाता है और चन्द्रमा के साथ राहु होने से चन्द्रमा पीडि़त हो जाता है। चन्द्रमा की यह सिथति ग्रहण योग का सृजन करती है। 12.12.12 को बुधवार का दिन है, अनुराधा नक्षत्र है, जो कि रात के 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। तिथि की गणना के अनुसार इस दिन चतुर्दशी सायं 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी, उसके बाद अमावस्या का संचरण होगा। इन सब ग्रह सिथति के चलते इस बार 12.12.12 को जन्मी संतान का चंद्र बल क्षीण रहेगा। चन्द्रमा बलहीन होने पर जीवन में मानसिक अशांति, चिड़चिड़ापन तथा मातृ कष्ट आदि के निवारण हेतु इस दिन जन्मी संतान को चांदी से निर्मित मोती युक्त अद्र्धचन्द्रमा धारण कराना विशेष फायदेमंद रहेगा। चन्द्रमा पीडि़त होने वालों को रूद्राभिषेक गाय के दूध अथवा गंगाजल से कराना विशेष लाभकारी होता है। साथ ही सफेद चीजों का दान करने से ग्रहण योग के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। अंक ज्योतिष के अनुसार 12 का योग करने पर तीन मूलांक आता है, जिसके अधिष्ठाता ग्रह देवगुरू बृहस्पति हैं जो ज्योतिष और अंक विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। संस्कृत में बारह को द्वादश कहते हैं, द्वादश मूलांक का धार्मिक व ज्योतिष गणना के अनुसार विशेष महत्व है। भारतीय ज्योतिष में द्वादश राशि, द्वादश भाव में सिथत ग्रह-नक्षत्र ही मनुष्य के भाग्य को निर्धारित करती हैं। इसी प्रकार द्वादश आदित्य, द्वादश ज्योतिर्लिग, द्वादश गणपति और भागवत महापुराण के द्वादश स्कन्ध हैं। हिन्दी, अंग्रेजी व मुसिलम महीने भी द्वादश ही हैं। द्वादश अंक में धार्मिक और मंत्रों का महत्व भी छिपा हुआ है। जैसे भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए द्वादश अक्षर का मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय। ऐसा ही मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए और मृत्युपाश से छुटकारा दिलाने के लिए ओम जूं स: पालय, पालय स: जूं ओम। सभी कार्यों में शुभ अमृत सिद्धि योग रात के 8 बजकर 22 मिनट तक होने के कारण खरीददारी के लिए विशेष शुभ योग है। 12.12.12 का यह संयोग इस सदी में अब नहीं आनेवाला है, अब यह संयोग 2101 में यानी 89 साल बाद आयेगा। वर्तमान में 2000 के इस सदी में 01.01.01 से लेकर 11.11.11 जैसे यादगार तारीख आये ओर चले गये। वर्ष 2013 भी आयेगा. इसमें 13 तारीख व 13 साल तो आयेगा, पर 13वां महीना नहीं आयेगा, अब यह तारीख 2101 में वापस आयेगी। पंचग्रही योग के कारण अचानक मौसम में परिवर्तन और ठंड बढ़ेगी। पंचग्रही योग में सूर्य के साथ राहु भी विराजमान है जिसके प्रभाव से राहु सूर्य को ग्रसित कर आकाश को मेघाच्छादित कर सकता है, बूंदा बांदी व तेज हवाएं, समुद्र में तूफान आदि का भी योग बन रहा है। पंचग्रही योग के अलावा तुला राशि में स्वराशि के चल रहे शनि तथा सूर्योदय के समय शनि व्यय भाव में सिथत रहेंगे इसलिए खाध पदार्थ, सोना, चांदी, वस्त्र आदि के भाव बढ़ेंगे।

 

 

 

 

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