Sunday, February 25, 2018
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khaar maas

करें पूजा-पाठ और दान-पुण्य खरमास में
ग्रहराज सूर्य के वृशिचक से धनु राशि में पहुंचते ही खरमास प्रारम्भ हो जाता है। सनातन संस्कृति के अनुसार खरमास में विभिन्न शुभ कार्यों, नये वस्त्रों, गहनों आदि की खरीददारी वर्जित माना गया है।
खरमास की समयावधि एक माह तक होती है। 15 दिसम्बर 2012 को रात्रि 8 बजकर 14 मिनट से भगवान सूर्य के धनु राशि में आने से खरमास प्रारम्भ होगा जो कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही समाप्त हो जाएगा। अर्थात मकर संक्रांति से मांगलिक कार्यों का आयोजन पुन: प्रारम्भ हो जाता है। मनुष्य के सभी शुभ मांगलिक कार्य, आजीविका, विवाह, संतान, शिक्षा में शुभ बृहस्पति ग्रह का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। जब सूर्य गुरू की राशि धनु में आ जाते हैं तो गुरू से सम्बंधित सभी शुभ मांगलिक कार्यो में विराम लग जाता है। खरमास में विवाह उत्सव, विवाह चर्चा, नूतन गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नव वधु की विदाई, मुण्डन, अन्नप्राशन, नामकरण, भूमि क्रय विक्रय यज्ञोपवीत आदि कर्मकाण्ड निषेध हैं, सिर्फ भगवत कथा, रामायण आदि का श्रवण पाठ किया जाता है। खरमास में व्यकित को ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ, ईश्वर आराधना करनी चाहिए ताकि उनके जीवन में अध्यातिमक शकित्यों द्वारा शुभ उर्जा का विकास हो सके। प्रत्येक राशि वाले व्यकित चाहें तो अपनी राशि के स्वामी की आराधना अपने ईष्ट देव के साथ करके शुभ फल में वृद्धि कर सकते हैं।


• मेष तथा वृशिचक राशि वालों को अपनी राशि के स्वामी मंगल देवता के साथ-साथ हनुमान जी तथा भगवान राम की उपासना करनी चाहिए।


• वृष तथा तुला राशि वालों को अपनी राशि के स्वामी शुक्र देवता के साथ-साथ माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए।


• मिथुन तथा कन्या राशि वालों को अपनी राशि के स्वामी बुध देवता के साथ-साथ गणपति भगवान की उपासना करनी चाहिए।


• कर्क राशि वालों को अपनी राशि के स्वामी चन्द्रमा के साथ-साथ भगवान शिव की आराधना करना लाभप्रद रहेगा।


• सिहं राशि वालों को अपनी राशि के स्वामी सूर्य के साथ-साथ मां गायत्री एवं हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए।


• धनु तथा मीन राशि वालों को अपनी राशि के स्वामी देवगुरू बृहस्पति के साथ-साथ माता लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।


• मकर तथा कुम्भ राशि वालों केा अपनी राशि के स्वामी शनिदेव के साथ-साथ हनुमान जी एवं भैरव बाबा की उपासना करनी चाहिए ताकि शुभ फलों की प्रापित हो सके।


राशि स्वामी सहित इष्ट देव की पूजा करने के साथ रोज एक या दो माला मंत्र जाप करना चमत्कारिक फल दे सकता है और संकटों से रक्षा करता है। महाभारत में वर्णित है कि जब खरमास में अजर्न ने भीष्म पितामह को धर्मयुद्ध में बाणों की शैयया पर लिटा दिया था, सैकड़ों बाणों से घायल भीष्म पितामह ने अपने प्राण नहीं त्यागे, उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। भीष्म पितामह पूरे खरमास में अद्र्ध मृत अवस्था में बाणों की शैयया पर लेटे रहे और जब माघ मास में मकर संक्रानित आई, खरमास समाप्त होने के बाद उन्होंने अपने प्राण त्यागे ताकि उन्हें सदगति प्राप्त हो सके। खरमास में अधिक से अधिक पूजा-पाठ, दान-पुण्य करना चाहिए, गरीबों को भोजन करवाएं, कुष्ठ रोगियों की सहायता करें, केवल शुभ कार्य प्रारम्भ न करें।

ज्योतिषाचार्य आषुतोष वाष्र्णेय
ग्रह नक्षत्रम ज्योतिष षोध संस्थान

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