Friday, November 24, 2017
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गरीबों, असहाय और पीडि़तों के मसीहा एवं प्रवर्तक प्रभु यीशु मसीह का जन्म बेथलहम नगर की एक गौशाला में 25 दिसम्बर 7 ईसा पूर्व को ज्योतिष विधा के अनुसार कन्या लग्न के उदय काल का है। ईश्वर के पुत्र, यीशु के जन्मांग में केन्द्र में सूर्य, बुध, शनि, चन्द्र, गुरु सिथत है। चतुर्थ भाव (केन्द्र) में सुर्य तथा बुध, सप्तम भाव (केन्द्र) में शनि, चन्द्र एवं गुरु को देखा जा सकता है।

 

Jeseus horoscope

पराक्रम के घर में राहु के साथ शुक्र विराजमान हैं तथा भाग्य के घर में (अर्थात भाग्य स्थान में) केतु सिथत है। षष्ठ भाव में मंगल विधमान है। शनि, गुरु दोनों चन्द्रमा के साथ मीन राशिगत हैं। केतु शुक्र की राशि में है। सूर्य बुध गुरु की धनु राशि में 'बुधादित्य योग का सृजन कर रहे हैं। मंगल अपनी 'ऊर्जा लिए शनि की कुम्भ राशि में बेचैन हैं। इस प्रकार मंगल की वृशिचक राशि में शुक्र तथा राहु का कब्जा है। बृहस्पति अपनी स्वयं की राशि मीन में शीतल चन्द्रमा से युक्ति 'गजकेसरी योग का सृजन कर रहा है। बलवान गुरु ईसा मसीह को आध्यातिमक बल प्रदान कर रहे हैं। भाग्य स्थान में केतु आध्यातिमक प्रवृत्ति जागृत कर रहा है। प्रभु यीशु के कुण्डली में शुक्र स्वयं अपनी राशि को पूर्ण दृषिट से देखकर बल प्रदान कर रहा है। अर्थात नवमेश की नवम धर्म स्थान पर (राहु के साथ) पूर्ण दृषिट ने ईसा को ईसाइयों के धर्म का प्रवर्तक बनाया। देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृषिट नवमेश शुक्र पर इस बात की पुषिट भी करती है। शनि की पूर्ण दृषिट व्ययेश पर पड़ रही है। पराक्रम स्थान पर राहु तथा नवमेश शुक्र ईसा को पीडि़त, असहायों के लिए मदद का मसीहा बनाता है। मोक्षकारक केतु धर्म भाग्य स्थान पर धार्मिक प्रवत्ति का सृजन करता है। चन्द्रमा मीन राशिगत तथा लग्नेश बुध माता के स्थान चतुर्थ भाव में बुध से युक्ति तथा गुरु से दृष्ट यीशु की माता मरियम के बारे में बताता है। अष्टमेश मंगल षष्ठ स्थान में सिथत होकर यीशु के शत्रुओं की वृद्धि करता है। यही मंगल षष्ठ शत्रु स्थान से लग्न को पूर्ण दृषिट से देख रहा है। व्यय स्थान तथा भाग्य भाव पर भी क्रूर मंगल की दृषिट है इसी कारण मंगल के प्रभाव से ही प्रभु यीशु शत्रुओं द्वारा सूली पर चढ़ाए गए। इस प्रकार संसार में व्याप्त घनघोर अंधकार को दूर करने वाला 'ईश्वर का पुत्र यीशु इच्छापूर्ति कर वापस उनके पास पहुँच गया।

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