Friday, November 24, 2017
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गंगा की धारा को निर्मल बनाएगा उच्च राशि का बृहस्पति - ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय

आकाशमार्ग में देवगुरू बृहस्पति का गोचरीय परिवर्तन सभी राशियों को प्रभावित करेगा। मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन राशियों के लिए 19 जून से बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश वर्ष भर विशेष उन्नतिकारक रहेगा। वृष, कर्क, तुला, कुम्भ राशियों के लिए बृहस्पति का राशि परिवर्तन संघर्ष के साथ सफलता प्रदान करेगा। मेष, सिंह, धनु राशि वालों के लिए यह परिवर्तन कुछ कष्टदायक है, उपाय की शक्ति से कष्टों को कम कर सफलता पाई जा सकती है।

बारह वर्षों के बाद देवगुरू बृहस्पति अपनी उच्च कर्क राशि में जून मध्य से प्रवेश करेंगे जिसके साथ सभी के भाग्य परिवर्तन का क्रम प्रारम्भ होगा। जन्मकुण्डली में चल रही दशा, महादशा, गोचर गुरू के राशि परिवर्तन के परिणाम में वृद्धि अथवा कमी ला सकती है। अशुभ परिणाम से निवृत्ति के लिए गुरू का उपाय अवश्य करें। ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार उच्च राशि में सर्वाधिक बलवान देवगुरू बृहस्पति गंगा को संजीवनी शक्ति प्रदान करेंगे, ग्रह प्रभाव से गंगा स्वच्छ एवं निर्मल होगी, ग्रह राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी क्षेत्रों में परिलक्षित होगा। प्रत्येक राशि के लिए गुरू का राशि परिवर्तन शुभाशुभ फल इस प्रकार लेकर आया है।  

मेष राशि - गुरू का परिवर्तन सुख-साधनों में वृद्धि करेगा परन्तु मानसिक अशान्ति एवं तनाव का वातावरण परिजनों से मतभेद उत्पन्न करेगा। वाहन धीमी गति से चलाऐं, निवेश आदि सोच-समझकर सावधानीपूर्वक करें। माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर परेशानी रह सकती है। कष्ट निवृत्ति के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को केले के वृक्ष के नीचे घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें।

वृष राशि - वृष राशि वालों को पारिवारिक एवं सामाजिक मामलों में तृतीय भाव में भ्रमणरत गुरू मिश्रित फल प्रदान करेंगे, पराक्रम में वृद्धि परन्तु आकस्मिक खर्च, स्थान परिवर्तन, निकटतम भाई-बन्धुओं को शारीरिक कष्ट। गुरू के शुभ प्रभाव में वृद्धि एवं कष्ट निवृत्ति के लिए बुजुर्गों और गुरूजनों का नित्य आशीर्वाद प्राप्त करें।

मिथुन राशि - आपकी राशि से द्वितीय भाव अर्थात् धन स्थान में गुरू का प्रवेश धनलाभ के योग बनाएगा, मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अविवाहितों का विवाह योग, कर्ज में डूबे को ऋण मुक्ति, व्यापारियों को व्यापार में लाभ होगा। स्थायी सम्पत्ति में वृद्धि, पुत्र सुख एवं यश प्राप्त होगा। भगवान विष्णु की पूजा-उपासना करने से कार्यों में दोगुनी प्रगति प्राप्त होगी।

कर्क राशि - देवगुरू बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश पहले से चली आ रही समस्याओं का निदान करेगा लेकिन अज्ञात भय, स्थान परिवर्तन, मानसिक उलझनें एवं संघर्षों के बाद धन लाभ एवं कार्य में प्रगति प्राप्त होगी। विष्णु अवतार भगवान राम अथवा भगवान श्रीकृष्ण की नित्य पूजा-उपासना करें, गुरू और वृद्धजनों की सेवा शीघ्र शुभ फल प्रदान करेगी।

सिंह राशि - आपके लिए द्वादश भाव में गुरू का गोचर प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न करेगा जिसके कारण मानसिक अशान्ति और भय रहेगा। यात्रा में कष्ट और धन व्यय के संकेत प्राप्त हो रहे हैं, बिना कारण परिजनों और अन्य व्यक्तियों से विवाद रह सकता है। जीवनसाथी से छोटी-छोटी बातों को लेकर मनमुटाव रहेगा। कार्य करते समय एकाग्रता रखें और लापरवाही न बरतें। गुरूवार का व्रत करें, केले के वृक्ष के नीचे सायंकाल घी का दीपक प्रज्जवलित करें।

कन्या राशि - कन्या राशि वालों के लिए गुरू का कर्क राशि में गोचर एकादश लाभ भाव में होगा जिसके कारण शीघ्र प्रगति, भाग्य में उन्नति एवं धन लाभ प्राप्त होगा। मन में चल रही अशान्ति दूर होगी, प्रसन्नता रहेगी, मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, पदोन्नति, मित्रों से लाभ, अविवाहितों का विवाह सम्पन्न होगा। भगवान विष्णु के नित्य दर्शन कर आशीर्वाद लें, पांचमुखी रूद्राक्ष धारण करें तो मन की सभी मुरादें पूरी होंगी।

तुला राशि - गुरू का कर्क राशि में गोचर आपके लिए दशम भाव में होगा। यह गोचर आपके लिए सामान्य फलदायी है, पिता से वैचारिक मतभेद, कार्यक्षेत्र में परिवर्तन, नौकरीपेशा वालों को उच्चाधिकारियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। भगवान श्रीराम की पूजा-उपासना करें, गुरू की कारक वस्तुओं का दान करें।

वृश्चिक राशि - गुरू का नवम भाव में गोचर वृश्चिक राशि वालों को अत्यधिक शुभ फल प्रदान करेगा। धार्मिक कार्यों और अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी। मान-सम्मान और कीर्ति में वृद्धि होगी, घर में मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे, वैभव में वृद्धि एवं अविवाहितों के विवाह का योग बन रहा है। केसर का तिलक बृहस्पतिवार के दिन माथे पर लगाएं।

धनु राशि - गुरू का कर्क राशि में गोचर आपके लिए अष्टम भाव में होगा, इस दौरान आपको कार्य-व्यवहार में विशेष सावधानी बरतनी होगी, वरना चोट-चपेट एवं नुकसान की सम्भावनाएं बन रही हैं। आर्थिक पक्ष विशेष रूप से प्रभावित रहेगा, भाग्य में रूकावट आने के कारण होते-होते कार्य अचानक रूकेंगे। लम्बी यात्राओं से बचें और यात्रा के समय भी सावधानी रखें, वाद-विवाद में न पड़ें। कष्ट निवृत्ति के लिए गुरूवार के दिन केले के वृक्ष के नीचे दीपदान करें, बुजुर्गों एवं गुरूजनों का प्रतिदिन आशीर्वाद लें।

मकर राशि - सप्तम भाव में गुरू का गोचर मकर राशि वालों के लिए शुभ फलदायक है। गुरू के इस गोचर से आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा, दाम्पत्य जीवन में शुभता आएगी, प्रभावशाली व्यक्त्यिों से सम्पर्क और लाभ प्राप्त होगा। जिन व्यक्तियों का विवाह नहीं हो पा रहा हो, इस स्थिति में उनके विवाह के योग बनाएगी। धार्मिक पुस्तकें मंदिर में दान करें तो मन की मुराद पूरी होगी।

कुम्भ राशि - षष्ठ भावस्थ गुरू का गोचर कुम्भ राशि वालों के लिए शत्रु भय, ऋण-रोग, आय से अधिक व्यय की परिस्थितियां पैदा करेगा। शत्रु आप पर हावी होने का प्रयास करेंगें, इसलिए आपका नम्रतापूर्ण व्यवहार रखना अनुकूल रहेगा। किसी से झगड़ा-फसाद न करें, अन्यथा मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ सकता है। परिजनों से भी वैचारिक मतभेद बढ़ सकते हैं। केले के वृक्ष को जल से सीचें, जन्मकुण्डली में बृहस्पति कारक होने पर पुखराज धारण करें।

मीन राशि - पंचम भावस्थ गुरू का गोचर मीन राशि वालों के लिए श्रेष्ठ है, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, बेरोजगारों को नौकरी मिलेगी, व्यापारियों के धन लाभ में बढ़ोत्तरी, समस्याओं का अन्त होगा। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा परिणाम मनोनुकूल रहेगा, मित्रों का सहयोग, सन्तान उन्नति एवं परिवार में प्रसन्नता का माहौल बनेगा। गुरूवार के दिन शुभ फलों में वृद्धि के लिए गाय को गुड़-रोटी खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय

निदेशक, ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान

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