Sunday, February 25, 2018
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कालचक्र निरन्तर गतिमान है, नए साल का प्रथम सप्ताह आने वाले कल को संवारने का है। वर्ष प्रारम्भ में किए गए संकल्प, पूजा-पाठ सम्पूर्ण वर्ष व्यकित को धर्म, कर्म के मार्ग पर चलने की ऊर्जा प्रदान करता है। घर-परिवार की रक्षा, उन्नति, सफलता के लिए जरूरी है शास्त्रों में वर्णित नियमों का अनुसरण करना। नए साल में माता-पिता, बुजुर्गों, जरूरतमंदों की सेवा, अच्छे संस्कारों को अपनाकर धर्म मार्ग पर चलकर जीवन में सुख-शांति प्राप्त की जा सकती है।

 

• नए वर्ष के प्रथम शनिवार को वास्तुशास्त्र के अनुसार घर से दु:ख दारिद्रय रूपी टूटे-फूटे बर्तनों एवं सामानों को निकाल देना चाहिए, पुराने की जगह नया हमेशा लेता है, यह प्रकृति एवं वास्तुशास्त्र का मूलभूत 
सिद्धांत है।

• वर्ष प्रारम्भ में ही ग्रहदशा की जांच किसी विद्वतजन से करवाएं और अनिष्ट ग्रहों का निदान करें ताकि पूरा वर्ष सुख-समृद्धि के साथ व्यतीत हो। जैसे वैध रोगी की जांचकर दवाई व परहेज से रोग को ठीक करता है, बीमार आदमी को स्वस्थ और दीर्घायु देता है, उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र भी मनुष्य को भाग्य का मार्ग दिखलाता है तथा ज्योतिषी द्वारा उपाय आदि के माध्यम से अनिष्ट ग्रह दशाओं से मुकित दिलाकर व्यकित को सुख-शांति प्रदान करता है।

• किसी से ऋण लिया है, तो शीघ्र-अतिशीघ्र चुकाने का भरपूर प्रयास करें, अगर ऋण आसानी से न उतर रहा हो तो ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें और जन्मकुण्डली के अनुसार मूंगा रत्न धारण करें।

• प्रात:काल उठकर ईश्वर स्मरण के साथ अपनी हथेलियों का दर्शन कर भूमि माता को स्पर्श एवं प्रणाम कर पैर जमीन पर रखना चाहिए, फिर स्नान आदि से निवृत्त होकर अपने इष्टदव के समक्ष वर्ष भर घर-परिवार की सुरक्षा एवं मंगलकामना की प्रार्थना करनी चाहिए।

• नित्य घर के ईशान कोण में देसी घी का दीपक जलाकर पूरे परिवार के आरोग्य की कामना करें।

• वर्ष भर के लिए संकल्प लें कि भोजन ग्रहण करने से पूर्व एक रोटी गाय को अवश्य खिलाऐंगे।

• असहाय, विधवा और अपाहिजों की सेवा कर पुण्यबल विकसित करें। पुण्यबल का संचय जीवन में हर मुसीबतों से बचाता है तथा समृद्धि को आपके पास बुलाता है। पुण्य संचित करने के लिए अगर दान-पुण्य न कर सकें तो नित्य लाल रंग की कलम से 108 बार भगवान राम का नाम लिखें ताकि जरूरत पड़ने पर नए वर्ष में पूर्व अर्जित पुण्य आपकी रक्षा कर सके।

• संशय का त्याग करें, गुरू, माता-पिता पर पूर्ण श्रद्धा रखें एवं भगवान का स्मरण करने के बाद माता-पिता, गुरू आदि बड़ों को प्रणाम करें तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें, क्योंकि कहा गया है कि, जाकी जैसी भावना, ताको जैसा सिद्ध। हंसा मोती चुगत है, मुर्दा चिखत गिद्ध।सत्य भावना देव में, सकल सिद्ध का मूल। बिना भाव भटक्यो फिरै, खोवे समय फिजूल।

• जिस प्रकार प्रत्येक मंत्र के आरम्भ में ओंकार का उच्चारण किया जाता है उसी प्रकार प्रत्येक शुभ कार्य का प्रारम्भ गणेश जी का स्मरण कर किया जाता है। सम्पूर्ण वर्ष मंगलमय हो, किसी भी कार्य में विघ्न-बाधाएं न आएं इसके लिए गणपति आराधना सभी को करनी चाहिए। प्रात:काल उठकर कोई भी कार्य करने से पहले, वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ: निर्विघ्नं कुरू में देव सर्व कार्येषु सर्वदा, अथवा, ओम गं गणपतये नम: का जप कर गणेश जी से वर्ष भर शुभ बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करें।

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