Friday, November 24, 2017
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sun makar sankranti

मकर संक्रांति से सूर्य की गति तिल-तिल करके आगे बढ़ती रहती है, इसलिए इस दिन तिल के लडडुओं को दान करने का विशेष महत्व है। तीर्थों के तीर्थ प्रयाग में मकर संक्रांति से प्रारम्भ होगा कुम्भ 2013 का प्रथम शाही स्नान।

भगवान सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश करते ही मकरस्थ सूर्य की किरण संगम के जल पर अमृत वर्षा करेगी जिसमें स्नानादि कर व्यकित निरोगी काया सहित पुण्य लाभ प्राप्त करता है। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार दोपहर 12:55 से सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा जिससे देवताओं का दिन उत्तरायण प्रारम्भ होगा। स्नान-दान का विशेष पुण्यकाल दोपहर 12:55 से सायं 5:26 तक रहेगा।

14 जनवरी 2013, मकर संक्रांति सूर्य मकर प्रवेष कुण्डली

14 jan pravesh kundali

'मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करने को 'मकर संक्रानित कहा जाता है। इस दिन से खरमास समाप्त होकर शुरू हो जाते हैं मांगलिक कार्य। भारतीय ज्योतिष एवं खगोल शास्त्र के अनुसार मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृशिचक, धनु, मकर, कुम्भ, मीन, यह बारह राशियाँ हैं। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को 'संक्रानित कहते हैं। सूर्य करीब एक माह, एक राशि में रहता है। इसीलिए संक्रानित प्रत्येक माह में पड़ती है किन्तु मकर राशि में सूर्य का संचार विशेष महत्वपूर्ण होता है। मकर संक्रानित से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायण में दिन बड़े होने लगते हैं प्रकाश तथा उष्मा की वृद्धि होती है। धर्मशास्त्रों के कथानुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान, पुण्य, दान, जप, धार्मिक अनुष्ठानों का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति के दिन दिया हुआ दान 'पुनर्जन्म होने पर सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। संगम के पावन तट पर इस दिन हजारों श्रद्धालुओं को स्नान, दानादि द्वारा पुण्यार्जन करते देखा जा सकता है। पौराणिक ग्रंथों में तिल के तेल से स्नान, तिल का उबटन लगाना, तिल से होम करना, तिल का जल पीना, तिल से बने पदार्थ खाना और तिल का दान देना ये 6 कर्म तिल से ही होना का विधान मिलता है। इसके अतिरिक्ति चंदन से अष्टदल का कमल बनाकर उसमें सूर्य नारायण की मूर्ति स्थापित करके उनका अवाध्रादि क्रम से विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए।

इस मास में घी और कम्बल देने का विशेष महात्म्य है। शीत के निवारण के लिए तिल, तेल तथा तूल का महत्व अधिक है। इसीलिए भारतीय प्राचीन वैज्ञानिक ऋषि महर्षियों ने इस पर्व पर तिल से स्नान, उबटन, हवन, भोजन, दानादि का विधान बनाया है। वे लोग जो राजभय से पीडि़त हो, या राजकृपा के इच्छुक हों, या राजपद में तरक्की या उन्नति के अभलिषी हों वे मकर संक्रांति के दिन "ओम घृणि सूर्याय: नम:" मंत्र की दस मालाएँ फेरकर सूर्य पूजा करें उसके पश्चात किसी चर्म रोग पीडि़त या कुष्ठ पीडि़त मनुष्य को, पशुओं को दान और भोजनादि दें, फिर नीम के वृक्ष को जल से सींच कर उसके पत्ते लेकर सदा अपने पास रखें, नीम पर धूप-दीप करना न भूलें।
मकर संक्रांति पर्व के महत्व के संबंध में संत तुलसीदास जी कहते हैं,

माघ मकर रवि गति होई। तीरथपतिहिं आवै सब कोई।।

makar sankranti bath
जहाँ मकर संक्रानित पूजा-पाठ, दान, व्रत आदि हेतु सर्वोत्तम पुण्यकाल है वहीं सूर्य नारायण की पूजा संक्रानित पर्व पर सूर्य संक्रमण काल में विशेष दानादि करना चाहिए। सूर्य नारायण की पूजा एवं व्रत, सब प्रकार के पापों का क्षय, सब प्रकार की आधियों, व्याधियों का निवारण और सब प्रकार की हीनता अथवा संकोच का निपात होता है तथा प्रत्येक प्रकार की सुख, सम्पत्ति, संतान और सहानुभूति की वृद्धि होती है। मकर संक्रानित के दान में काष्ठ और अगिन के दान का विशेष महत्व है। संक्रानित काल में जो भी वस्तु दान की जाती है या कृत्य-कृत्यादि जो भी दिया जाता है सूर्य नारायण उसे जन्म जन्मान्तर प्रदान करते रहते हैं। मकर संक्रांति पर दान का विशेष विधान है, अगर व्यक्ति खिचड़ी, तिल आदि दान करने के साथ अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं का दान करे तो उसे जीवन में विशेष शुभ प्रभाव प्राप्त होंगें।

मेष तथा वृशिचक राशि :- मेष तथा वृशिचक राशि वाले संक्रांति दान में लाल मसूर की दाल, गुण, लाल चन्दन, लाल फूल, सिन्दूर, तांबा, मूंगा, लाल वस्त्र आदि दान हेतु समिमलित करें तो उनको विशेष लाभ प्राप्त होगा।

वृष तथा तुला राशि :- वृष तथा तुला राशि वाले संक्रांति दान में सफेद वस्त्र, कपूर, खुशबूदार अगरबत्ती, धूप, इत्र आदि, दही, चावल, चीनी, दूध, चांदी, आदि दान हेतु समिमलित करें तो उनको विशेष लाभ प्राप्त होगा।

मिथुन तथा कन्या राशि :- मिथुन तथा कन्या राशि वाले संक्रांति दान में हरी सब्जी, हरा फल, हरा वस्त्र, काँसे का बर्तन, पन्ना या उसका उपरत्न अ‚नेक्स, हरी दाल, आदि दान हेतु समिमलित करें तो विशेष शुभ फल प्राप्त होगा।

कर्क राशि :- कर्क राशि वाले संक्रांति दान में दूध, दही, चावल, सफेद वस्त्र, चीनी, चांदी, मोती, शंख, कपूर, बड़ा बताशा आदि का दान अवश्य करें।

सिंह राशि :- सिंह राशि वाले मकर संक्रांति के दिन गेंहू, गुड़, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चन्दन, माणिक्य, शहद, केसर, सोना, ताँबा, शुद्ध घी, कुमकुम आदि दक्षिणा सहित दान करें।

धनु तथा मीन राशि :- धनु तथा मीन राशि वाले संक्रांति के दान में पीला वस्त्र, हल्दी, पीला अनाज, केला, चने की दाल, पुखराज या उसका उपरत्न सुनहला अथवा पीला हकीक, देशी घी, सोना, केसर, धार्मिक पुस्तक, पीला फूल, शहद आदि दान हेतु समिमलित अवश्य करें।

मकर तथा कुम्भ राशि :- मकर तथा कुम्भ राशि वाले संक्रांति के दान में काले तिल, काला वस्त्र, लोहा, काली उड़द दाल, काले फूल, सुरमा (काजल), चमड़े की चप्पल, कोयला, काला मिर्च, नीलम अथवा उसका उपरत्न जमुनिया, काले चने, काली सरसों, तेल आदि दान करें।

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