Friday, November 24, 2017
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ज्योतिष के अनुसार मीन राशि में सिथत होने पर बुध को नीच का बुध कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ होता है कि मीन राशि में सिथत होने पर बुध अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र अनुसार जहां उच्च राशि के ग्रह व्यकित को जीवन में शुभ फल प्रदान करते हैं, वहीं नीच राशि में आने पर ग्रह जीवन में संघर्ष एवं उतार-चढ़ाव दिलाते हैं, नीच राशि के ग्रहों को प्राय: अशुभ माना जाता है। 9 अप्रैल 2013 की अद्र्धरात्रि से बुध कुम्भ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे, मीन में प्रवेश करते ही नीच का बुध बलहीन हो जाता है। सामान्य रूप से बुध ग्रह बुद्धिमत्ता और वाकपटुता का निर्धारक ग्रह है, बुध के प्रभाव वाला व्यकित विद्वान होता है और पूर्व में किसी वस्तु अथवा बात का अनुमान या पूर्वाभास प्राप्त करने में माहिर होता है। बुध प्रधान जातक व्यापारी होता है, सेल्समेनशिप आदि के पुरूषार्थ में खूब कमाता है। कुंडली में बुध अच्छा होता है तो जातक की त्वचा और रंगरूप बहुत ही सुन्दर और देखने में प्रिय होता है, यह त्वचा प्रधान ग्रह है, अगर कुंडली में बुध खराब हो तो त्वचा एवं गले सम्बन्धी रोग होते है और दशा महादशा में भी खराब फल देता है। इससे वायु, काफ व पित के रोग देता है और शारीर के तंत्रिका तंत्र यानि की नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। बुध के कमजोर होने से जातक के सोचने और समझने की शक्ति कमजोर होती है जैसे की त्वचा का सुन्न होना, नाक के सेंसर कम काम करते है, चोट लगने या किसी प्रकार की पीड़ा का महसूस नहीं होना, त्वचा पर काले रंग के धब्बे बन जाना और स्वत: ही समाप्त हो जाना जैसे प्रभाव दिखार्इ देते हैं। बुध के मजबूत होने से धन धन्य की कमी नहीं रहती, जीवन बहुत आनद से गुजरता जाता है। अगर व्यापार में भी बार-बार घाटा होता है या व्यापार बदलना पड़ता है तो बुध ही इसका कारण होता है। पन्ना इसका रत्न होता है, बुध व्यापारियों का रक्षक है। बुध ग्रह नीच राशि का होने से बुध से सम्बनिधत कारक वस्तुएं विशेष रूप से प्रभावित होंगी। बड़े व्यापारियों के यहां सरकारी कार्यवाही, नोटिस से नुकसान, शेयर बाजार में हलचल उत्पन्न होगी। बुध बुद्धि का कारक है, नीच राशि में आने के कारण बुद्धि भ्रम की सिथति उत्पन्न करता है, मिथुन और कन्या राशि का स्वामी होने के कारण इन दोनों राशियों को इस दौरान सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। अन्य ग्रहों के गोचर को देखते हुए नीच राशि का बुध मिथुन राशि वालों को शारीरिक कष्ट प्रदान करेगा, इसी प्रकार जन्मकुण्डली में चल रही दशा-अन्तर्दशा सभी राशियों के गोचर फल को प्रभावित करता है।
मेष राशि - अपव्यय, शारीरिक कष्ट, मानसिक चिंता, कार्य हानि।
वृष राशि - आय वृद्धि, व्यापार में लाभ, आरोग्यता, भूमि लाभ, भाइयों को सुख, कायोर्ं में सफलता, संतान सुख।
मिथुन राशि - पद प्रापित, शत्रु पराजय, व्यवसाय में लाभ, यश व सफलता लेकिन स्वास्थ्य कष्ट
कर्क राशि - भाग्य हानि, कार्यों में विघ्न-बाधाएं, मान-सम्मान में कमी
सिंह राशि - आकसिमक धन प्रापित, सफलता, विजय।
कन्या राशि - जीवनसाथी से विवाद ,शारीरिक कष्ट, राज्य व उच्चाधिकारी से भय, यात्रा, व्यवसाय में हानि और चिंता।
तुला राशि - धन लाभ, उत्तम स्वास्थ्य, शत्रु पराजय, यश मान में वृद्धि, प्रसिद्धि प्रापित।
वृशिचक राशि - मन में अशांति, संतान कष्ट, योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता।
धनु राशि - माता का सुख, जमीन जायदाद का लाभ,घरेलू सुख-सुविधाओं में वृद्धि।
मकर राशि - भय, बंधुओं से विवाद, धन का अपव्यय।
कुम्भ राशि - धन आभूषण कि प्रापित, विधा लाभ, उत्तम भोजन व सम्बनिधयों से लाभ।
मीन राशि - अप्रिय वाणी का प्रयोग, विश्वासघात, धनहानि, सम्बनिधयों को हानि तथा अनादर।
उपाय - बुध के निर्बल होने पर अशुभ फलों की शांति के लिए निम्नलिखित उपाय करने से बुध बलवान होकर शुभ फल प्रदान करता है, ऐसा ज्योतिषशास्त्र का मत है। जन्मकुण्डली में बुध की सिथति अथवा जन्मलग्न के अनुसार बुध कारक होने पर पन्ना रत्न धारण करें, बुधवार के दिन नमक रहित व्रत रखें, श्री विष्णु सहस्रनामस्तोत्र का पाठ करें, बुध के मंत्र का जप एवं हरे वस्त्र धारण करें अथवा हरा रूमाल का सदैव प्रयोग करें।

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