Saturday, November 25, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

ram navmi

रामनवमी के दिन क्या करें

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मर्यादा पुरूषोतम भगवान राम का जन्म चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में हुआ था। महर्षि वाल्मीकि रामायण में राम के जन्म को इस प्रकार दर्शाया गया है-


ततो यज्ञे समात्पेतु ऋतु नाम षटसमत्ययु:। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ।
नक्षत्रे दितिदैवत्ये स्वोश्चसंस्थेषु पश्चसु, ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह।।
प्रोधमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम। कौशल्याजनयत रामं दिव्य लक्षणसंयुतम।।

गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के अनुसार,

जोग लगन ग्रह बार, तिथि सकल भये अनुकूल।
चर अरु अचर हरष जुत राम जनम सुख मूल।।
नवमी तिथि मधुमास पुनीता सुकुल पक्ष अभिजित हरि प्रीता।
मध्य दिवस अति शीत न घामा, पावन काल लोक विश्रामा।।

रामनवमी, भगवान राम को समर्पित पर्व है, रामजन्म के कारण चैत्र शुक्ल नवमी रामनवमी कहलाती है। भगवान विष्णु ने राम रूप में असुरों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया और जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का श्रीगणेश किया था। उस दिन जो कोर्इ व्यä दिनभर उपवास और रातभर जागरण का व्रत रखकर भगवान श्रीरामकी पूजा करता है, तथा अपनी आर्थिक सिथति के अनुसार दान-पुण्य करता है, वह अनेक जन्मों के पापों को भस्म करने में समर्थ होता है।

रामनवमी पूजन विधि - चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी अंतिम नवरात्र होने के कारण विशेष महत्वपूर्ण मानी गर्इ है, इस तिथि को देवी पूजन, हवन, कन्या पूजन के साथ ही भगवान राम की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है। इस दिन व्रत रखकर भगवान राम सहित रामचरितमानस (रामायण) की पूजा की जाती है। भगवान राम की मूर्ति को शुद्ध जल अथवा गंगाजल से स्नान कराकर नवीन वस्त्राभूषणों से सुसजिजत करें और धूप-दीप दिखाकर पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करें। रामायण में वर्णित राम जन्म कथा का श्रवण, वाचन श्रद्धा भकितपूर्वक करें, भक्त आज के दिन अखण्ड रामायण का पाठ भी करते हैं। भगवान राम को दूध, दही, घी, शहद, चीनी मिलाकर बनाए गए पंचामृत तथा भोग अर्पित किया जाता है। भगवान राम का भजन, पूजन, कीर्तन आदि करने के बाद प्रसाद को पंचामृत सहित श्रद्धालुओं में वितरित करने के बाद व्रत खोलने का शास्त्रीय विधान है। भक्तों का चाहिए कि रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें अथवा राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने का जप करें।

रामनवमी के दिन राम कृपा प्रापित के लिए भक्तों को चाहिए कि,

• व्रत रखकर भगवान राम सहित रामचरितमानस (रामायण) की पूजा करें। मां जानकी, लक्ष्मण जी, हनुमान जी, सहित राम दरबार को स्थापित करें।

• लाल रंग की स्याही से कम से कम 108 बार राम नाम अथवा सीताराम लिखें, तत्पश्चात निकटतम राम बैंक में जमा करवाएं अथवा राम नाम की माला बनाकर प्रभु हनुमान जी को पहनाएं, चमत्कारिक लाभ अनुभव करें।

• शुभ कार्य करने की दृषिट से रामनवमी का दिन विशेष महत्वपूर्ण माना गया है, किसी भी शुभ काम की शुरूआत आज के दिन से प्रारम्भ की जा सकती है। नया घर, दुकान अथवा प्रतिष्ठान में इस दिन पूजा-अर्चना कर प्रवेश किया जाए तो व्यकित को जीवन भर शुभ-लाभ मिलता है।

• मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की उपासना भी इस दिन की जाती है।

• कुंवारी कन्याओं को भोजन कराएं।

• गरीबों की सामथ्र्य अनुसार यथासम्भव मदद करें।

• गृहस्थ जो कठिन मंत्रों का जप नहीं कर सकते, वे भगवान राम की स्तुति ''श्रीरामचन्æ पालु भजु मन प्रतिदिन करें। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम की इस स्तुति का प्रतिदिन गान करने से जातक के जीवन में किसी भी प्रकार के कष्ट नहीं आते। यदि कोर्इ जातक जीवन में किसी बड़ी समस्या से परेशान हो तो दिन में तीन बार भगवान श्री राम के मंदिर में या उनके चित्र के सामने बैठ कर इस का गान करने से वह समस्या दूर हो जाती है।

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

Astrology

Who's Online

We have 1387 guests online
 

Visits Counter

751152 since 1st march 2012