Saturday, November 25, 2017
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solar system

आए दिन अपराधिक गतिविधियों एवं अपराधियों का बढ़ता हुआ हौसला ग्रह-नक्षत्रों की विशेष सिथति के कारण है, आकाशमण्डल में अतिबलवान मंगल और सूर्य की अगिन तत्व मेष राशि में युति अपराधियों के मनोबल को बढ़ावा दे रहे हैं। जब अगिन तत्व राशि में अगिन तत्व प्रधान ग्रहों की प्रबलता होती है, साथ ही सूर्य-शनि अपनी-अपनी उच्च राशि में आमने-सामने होकर एक दूसरे को पूर्ण दृषिट से देखते हैं, तो विरोधाभास बढ़ता है, जिसके कारण अपराध घटित होता है क्योंकि सूर्य-शनि पिता-पुत्र होने के बावजूद एक-दूसरे के प्रमुख विरोधी एवं शत्रु हैं।

दोनों ग्रह उच्च के आमने-सामने आने से सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा आपस में संग्राम की सिथति उत्पन्न करती है। सूर्य के सामने आने से शनि अति वक्री हो जाता है। सूर्य राजा है और शनि प्रजा है, इसलिए दोनों ग्रहों का आकाशमण्डल में आमने-सामने आना अच्छा नहीं माना जाता है। जनता में असंतोष रहेगा, सरकार को आंदोलन और हड़ताल का सामना करना पड़ेगा। देश में असिथरता की सिथति निर्मित होगी। वर्तमान में बने हुए पंचग्रही योग के कारण अपराध का ग्राफ बढ़ा हुआ है। विगत 28 अप्रैल 2013 सायंकाल से बुध का मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करने के कारण पंचग्रही योग बना, जिससे अपराध में वृद्धि हुई, 4 मई 2013 की अद्र्धरात्रि को शुक्र के मेष राशि से निकलकर वृष राशि में आ जाने के कारण पंचग्रही योग समाप्त होकर चार ग्रहों की युति चतुग्र्रही योग के रूप में ही रह गया। 8 मई 2013 को चन्द्रमा का मेष राशि में प्रवेश पंचग्रही योग का एक बार फिर पुन: सृजन कर रहा है जो 10 मई 2013 की दोपहर तक कायम रहेगा। इसके बाद 23 मई 2013 को वृष राशि में पंचग्रही योग को पुन: देखा जा सकेगा। जब पांच ग्रह एक साथ एक ही राशि में हों तो पंचग्रही योग के निर्माण के कारण अराजक तत्वों की अराजकता में वृद्धि होती है। इसी के साथ शनि एवं राहु, दो पाप ग्रहों की युति तथा शनि की वक्र अवस्था अपराध को बढ़ा रहे हैं। जहां सूर्य एवं शनि एक-दूसरे के आमने-सामने हैं, वहीं मंगल और शनि भी एक दूसरे को पूर्ण दृषिट से देखकर हिंसक घटनाओं की वृद्धि कर रहे हैं, मंगल को अरबी-फारसी में जल्लादे फलक कहा जाता है, मंगल युद्ध का देवता है, मंगल-शनि की एक-दूसरे से बिल्कुल नहीं बनती। इन दोनों ग्रहों की एक-दूसरे पर दृषिट दुर्घटना आदि का योग बनाती है।

 

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