Friday, November 24, 2017
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दीपावली पर अगर न आई हों माँ लक्ष्मी तो अक्षय तृतीया पर पुकारें

पूरे वर्ष में केवल अक्षय तृतीया ही एक ऐसा पर्व है, जिसका कोई भी क्षण क्षय नहीं होता, अर्थात खंडित नहीं होता है। इसी कारण यह दिवस सभी कार्यों में सफलता प्रदान करता है। वैशाख शुक्ल तृतीया को पड़ने वाले इस विशिष्ट दिवस को लक्ष्मी पूजन, दीपावली के बाद, सबसे विशिष्ट माना गया है।

अक्षय-तृतीया के दिन, ज्योतिष अनुसार सूर्य और चन्द्रमा उत्कर्ष और शुभ स्थानों पर माने जाते हैं जिसके कारण शुभ माना जाने वाला स्वर्ण धातु भी इस दिन खरीदा जाता है। इस दिन दान-दक्षिणा का भी विशेष महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन 10 ब्राह्राणों को भोजन कराने से पूर्वजन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। यह दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है, अक्षय तृतीया के दिन जल से भरा पात्र व छाता और पंखा दान करने से तथा पानी की प्याऊ लगवाने से विशेष पुण्य मिलता है, जिससे मृत्योपरांत स्वर्ग जाने की बाधाऐं समाप्त हो जाती हैं, ऐसा धर्मशालों का मत है। इस दिन जौ एवं चावल का दान विशेष रूप से किया जाता है। स्नान करते समय जल में भी तीर्थ जल और अक्षत डालने चाहिए। इस दिन नए कार्य, व्यापार आदि का शुभारंभ करना विशेष फलप्रद रहता है। इस दिन प्रारंभ किए गए कार्य, व्यापार आदि का क्षय नहीं होता है। मान्यता है कि इस दिन नए स्वर्ण आभूषण धारण करने वाली विवाहित ली अखण्ड सौभाग्यवती होती है। इस तिथि का सर्वसिद्धि मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वर्ष आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। नवीन वर्ष, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। अक्षय तृतीया पर्व पर त्रेतायुग का आरंभ हुआ था और श्री परशुराम जी का जन्म हुआ जो भगवान विष्णु के छ:वें अवतार थे। महाकाव्य-महाभारत की एक कथा अनुसार जब पांडव वनवास में थे तो उनके पास एक 'अक्षय-पात्र था जिसमें भोजन कभी समाप्त नही होता है। खाने के पश्चात वह 'अक्षय-पात्र पुन: भर जाता था। उसी प्रकार से माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन खरीदा स्वर्ण उस व्यक्ति किे धन-समृद्धि में वृद्धि करेगा। खरीददार का जीवन, 'अक्षय शब्द के समान बन जाता है। जिसमें कभी कमी नहीं आती, केवल समृद्धि आती है। यह दिन केवल स्वर्ण खरीदने के लिए ही नहीं परन्तु नए कार्यों को आरंभ करने के लिए भी शुभ दिन है। इस दिन खरीदे गए स्वर्ण सिक्के, आभूषण इत्यादि सौभाग्यशाली हैं और सफलता दिलवाते हैं।

 

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