Friday, November 24, 2017
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jupiter
'यत पिण्डे तत ब्रहमाण्डे, तत ब्रहमाण्डे, यत पिण्डे सिद्धांत के अनुसार जो मानव पिण्ड में है, वही ब्रहमाण्ड में है और जो ब्रहमाण्ड में है वहीं मानव पिण्ड में समाहित है। जब ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है तो उसका विशेष प्रभाव मानव जीवन पर 12 राशियों पर पड़ता है। 31 मई को देवगुरू बृहस्पति वृष राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ग्रह नक्षत्रम ज्योतिष शोध संस्थान के निदेकश ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार प्रत्येक राशि के लिए गुरू का राशि परिवर्तन शुभाशुभ फल इस प्रकार लेकर आया है।

मेष राशि - गुरू का तृतीय भाव में गोचर मेष राशि वालों को विशेष संघर्ष के बाद ही लाभ प्रदान करेगा। पराक्रम में वृद्धि एवं सफलता के लिए विशेष जददोजहद करनी पड़ेगी। आय से अधिक व्यय होगा, स्थान परिवर्तन सम्भव है, किसी को धन उधार न दें, अनावश्यक यात्रा से बचें। उपाय - बुजुर्गों और गुरूजनों का नित्य आशीर्वाद प्राप्त करें।

वृष राशि - आपकी राशि से द्वितीय भाव अर्थात धन स्थान में गुरू का प्रवेश धनलाभ के योग बनाएगा, मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अविवाहितों का विवाह योग, कर्ज में डूबे को ऋण मुकित, व्यापारियों को व्यापार में लाभ होगा। स्थायी सम्पतित में वृद्धि, संतान सुख एवं यश प्राप्त होगा। उपाय - भगवान विष्णु की पूजा-उपासना करें, महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जाते समय पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

मिथुन राशि - देवगुरू बृहस्पति का मिथुन राशि में प्रवेश पहले से चली आ रही समस्याओं का तो निदान करेगा साथ ही अज्ञात भय, मानसिक परेशानियां, स्थान परिवर्तन के योग बनाएगा। बुद्धि भ्रमित होने के कारण गलत निर्णय पीड़ा पहुंचा सकता है। उपाय - भगवान श्रीकृष्ण की नित्य पूजा-उपासना करें, गुरू और वृद्धजनों का अपमान न करें।

कर्क राशि - आपके लिए द्वादश भाव में गुरू का गोचर प्रतिकूल परिसिथतियां उत्पन्न करेगा जिसके कारण मानसिक अशानित और भय रहेगा। यात्रा में कष्ट और धन व्यय के संकेत प्राप्त हो रहे हैं, बिना कारण परिजनों और अन्य व्यकितयों से विवाद रह सकता है। जीवनसाथी से छोटी-छोटी बातों को लेकर मनमुटाव रहेगा। कार्य करते समय एकाग्रता रखें और लापरवाही न बरतें। उपाय-गुरूवार का व्रत करें, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें, पीपल के वृक्ष के नीचे सायंकाल घी का दीपक प्रज्जवलित करें।

सिंह राशि - सिंह राशि वालों के लिए गुरू का मिथुन राशि में गोचर एकादश लाभ भाव में होगा जिसके कारण विभिन्न प्रकार का शुभ फल एवं लाभ प्राप्त होगा। मन में चल रही अशानित दूर होगी, प्रसन्नता रहेगी, मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, पदोन्नति, मित्रों से लाभ, अविवाहितों का विवाह सम्पन्न होगा। उपाय - भगवान विष्णु के नित्य दर्शन कर आशीर्वाद लें, पांचमुखी रूद्राक्ष धारण करें।

कन्या राशि - गुरू का मिथुन राशि में गोचर आपके लिए दशम भाव में होगा। यह गोचर आपके लिए सामान्य फलदायी है, पिता से वैचारिक मतभेद, कार्यक्षेत्र में परिवर्तन, नौकरीपेशा वालों को उच्चाधिकारियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। उपाय - भगवान श्रीराम की पूजा-उपासना करें, गुरू की कारक वस्तुओं का दान करें।

तुला राशि - गुरू का नवम भाव में गोचर तुला राशि वालों को अत्यधिक शुभ फल प्रदान करेगा। धार्मिक कार्यों और अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी। मान-सम्मान और कीर्ति में वृद्धि होगी, घर में मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे, वैभव में वृद्धि एवं अविवाहितों के विवाह का योग बन रहा है। उपाय - केसर का तिलक बृहस्पतिवार के दिन माथे पर लगाएं।

वृशिचक राशि - गुरू का मिथुन राशि में गोचर आपके लिए अष्टम भाव में होगा, इस दौरान आपको विशेष सावधानी बरतनी होगी, वरना चोट-चपेट एवं नुकसान की सम्भावनाएं बन रही हैं। आर्थिक पक्ष विशेष रूप से प्रभावित रहेगा, भाग्य में रूकावट आने के कारण होते-होते कार्य अचानक रूकेंगे। लम्बी यात्राओं से बचें और यात्रा के समय भी सावधानी रखें, वाद-विवाद में न पड़ें। उपाय - गुरूवार के दिन केले के वृक्ष के नीचे दीपदान करें, बुजुर्गों एवं गुरूजनों का प्रतिदिन आशीर्वाद लें।

धनु राशि - सप्तम भाव में गुरू का गोचर धनु राशि वालों के लिए शुभ फलदायक है। गुरू के इस गोचर से आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा, दाम्पत्य जीवन में शुभता आएगी, प्रभावशाली व्यकित्यों से सम्पर्क और लाभ प्राप्त होगा। जिन व्यकितयों का विवाह नहीं हो पा रहा हो, इस सिथति में उनके विवाह के योग बनाएगी। उपाय - धार्मिक पुस्तकें मंदिर में दान करें।

मकर राशि - षष्ठ भावस्थ गुरू का गोचर मकर राशि वालों के लिए सामान्य फलकारी है। पराक्रम में वृद्धि होने के साथ ही शत्रु आप पर हावी होने का प्रयास करेंगें, इसलिए आपका नम्रतापूर्ण व्यवहार रखना अनुकूल रहेगा। किसी से झगड़ा-फसाद न करें, अन्यथा मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ सकता है। परिजनों से भी वैचारिक मतभेद बढ़ सकते हैं। उपाय - केले के वृक्ष को जल से सीचें, जन्मकुण्डली में बृहस्पति कारक होने पर पुखराज धारण करें।

कुम्भ राशि - पंचम भावस्थ गुरू का गोचर कुम्भ राशि वालों के लिए श्रेष्ठ है, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, बेरोजगारों को नौकरी मिलेगी, व्यापारियों के धन लाभ में बढ़ोत्तरी, मानसिक समस्याओं का अन्त होगा। विधार्थियों के लिए परीक्षा परिणाम मनोनुकूल रहेगा, मित्रों का सहयोग, सन्तान उन्नति एवं परिवार में प्रसन्नता का माहौल बनेगा। उपाय - गुरूवार के दिन शुभ फलों में वृद्धि के लिए गाय को गुड़-रोटी खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

मीन राशि - गुरू का चौथे भाव में गोचर मीन राशि वालों के लिए कलहप्रद सिथति उत्पन्न करेगा अत: सोच-समझकर ही कार्य व्यवहार करें, आर्थिक पक्ष प्रभावित होगा, परिजनों से असहयोग प्राप्त होगा। निवेश आदि सोच-समझकर सावधानीपूर्वक करें। माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर परेशानी रह सकती है। उपाय - केले के वृक्ष के नीचे घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें।

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