Saturday, November 25, 2017
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dhayanchand

नई दिल्ली। हॉकी के इतिहास के महानतम खिलाड़ी और हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की महागाथा का अमर चित्रकथा में अवतार हुआ है।मेजर ध्यानचंद के 108वें जन्मदिन के अवसर पर यहां मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में बृहस्पतिवार को खेल दिवस पर मानव संसाधन राज्य मंत्री शशि थरूर और भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक जीजी थामसन ने ‘ध्यानचंद द विजार्ड ऑफ हॉकी’ का अनावरण किया।

दशकों से पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रेत रही अमर चित्रकथा ने पहली बार किसी खिलाड़ी पर आधारित किताब पेश की है। अभी तक अमर चित्रकथा पौराणिक महानायकों, देश के बहादुरों और आदर्श व्यक्तियों पर चित्रकथा के जरिए किताब लाते रहे थे। लेकिन एक अनूठे प्रयास में अमर चित्रकथा ने भारत के एक ऐसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पर चित्रकथा के जरिए किताब पेश की है जिन्होंने अपनी हॉकी की जादूगरी से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध किया था।

                इस किताब के विमोचन से पहले शशि थरूर और जीजी थामसन ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में हॉकी के जादूगर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर पूर्व हॉकी ओलंपियन हरविंदर सिंह भी मौजूद थे। शशि थरूर ने इस मौके पर कहा, ‘ध्यानचंद ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने 22 साल के अपने कॅरियर में एक हजार से ज्यादा गोल किए थे। 1935 में एडिलेड में क्रिकेट की रन मशीन डान ब्रैडमैन ने हॉकी की गोल मशीन ध्यानचंद से मुलाकात की थी।‘ केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद ने हिटलर की पेशकश ठुकराई थी। इससे भी ज्यादा बड़ी बात यह थी कि अपने रिटायरमेंट के बाद ध्यानचंद को तीन देशों से कोचिंग का प्रस्ताव मिला था और उन्होंने सच्चे देशभक्त होने के नाते इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया था।‘

        पूर्व हॉकी ओलंपियन हरविंदर ने दद्दा ध्यानचंद को याद करते हुए कहा, ‘इस किताब को जब बच्चे पढेंगे तो वे ध्यानचंद के बारे में कुछ सीखेंगे। जिस तरह ‘भाग मिल्खा भाग’ को देखकर युवा पीढ़ी ने मिल्खा सिंह के बारे में कुछ जाना है उसी तरह यह किताब भी नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।‘ हरविंदर ने साथ ही कहा, ‘दद्दा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिलना चाहिए। एकमात्र वही ऐसे खिलाड़ी हैं जो इसके सबसे बड़े हकदार हैं।‘

साभार: राष्ट्रीय सहारा

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