Monday, November 20, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

kedar nath

कल 23 जुलाई से सावन का महीना प्रारंभ होगा। भोले बाबा के भक्तों में गजब का उत्साह आ गया है। भगवान शिव का प्रिय मास है श्रावण। इसलिए यह पूरा मास भगवान शिव को समर्पित है। श्रावण मास में महादेव के जलाभिषेक का अपना ही महत्व है। कहते हैं इस मास के दौरान पूर्ण समर्पण और श्रद्धा के साथ भगवान शिव को जल चढ़ाने से मनोकामना पूर्ण होती है। हर शहर,गांव में सावन के दौरान शिव मंदिरों को सजाया जाता है। खूब धूमधाम होती है। लोगों की कामना होती है कि श्रावण के दौरान वह ज्योर्तिलिंगों पर जल चढ़ा सकें।

दूसरे ज्योर्तिलिंगों की तुलना में हर साल श्रावण के महीने में केदारनाथ में कुछ ज्यादा ही रौनक होती है। सावन की घटाओं का संपूर्ण केदार घाटी से गहरा रिश्ता है। सावन की घटाओं के घिरते ही पूरी केदार घाटी उल्लासमय हो उठती है परंतु इस सावन सूनी रहेगी केदार घाटी। उत्तराखंड में हुए जल प्रलय के बाद इस बार केदार नाथ धाम में भगवान शिव के ज्योर्तिलिंग का जलाभिषेक नही हो पाएगा। यह पहला मौका है जब श्रावण मास के दौरान बाबा केदार नाथ का जलाभिषेक केदार धाम में नहीं हो पाएगा। हां केदार नाथ की परंपरा के अनुसार ओंकारेश्वर में ही बाबा का विधि विधान पूर्वक जलाभिषेक होगा। तबाही के बाद भगवान शिव को उनके शीत कालीन प्रवास उखी मठ सिथत ओंकारेश्वर मंदिर में स्थापित कर दिया गया है।

सावन में केदार नाथ मंदिर में बाबा केदार नाथ को जल चढ़ाने का अपना महत्व है। लेकिन इस साल यह नहीं हो पाएगा क्योंकि केदार घाटी तबाह हो गई है। केदार नाथ मंदिर में लाशें मिलने के कारण मंदिर अशुद्ध हो गया है। केदार नाथ मंदिर के आस पास छोटे छोटे अनेक शिव मंदिर हैं वहां का भी यही हाल है अर्थात वहां भी पूजा नहीं होगी। छोटे शिव मंदिर या तो मंदाकिनी की लहराें में समा चुके हैं या उनका संपर्क मार्ग कट जाने के कारण वहां कोई नहीं पहुंच सकता है। आशा करते हैं कि इस सावन की तरह केदार धाम अगले सावन में भी सूना न रहे बलिक वहां अन्य सावनों की तुलना में अधिक रौनक हो।

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

culture

Who's Online

We have 2983 guests online
 

Visits Counter

749580 since 1st march 2012