Monday, November 20, 2017
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eid-ul-fitar

रमजान के पाक महीने का अंत होने पर मुसिलम समुदाय एक त्यौहार मनाते हैं जिसे ईद उल फितर कहते हैं। ईद उल फितर का शाबिदक अर्थ है रोजा तोड़ने का त्यौहार। यह त्यौहार निष्ठा का प्रतीक है। ईद शव्वाल के पहले तारीखपर मनाया जाता है।शव्वाल इस्लामिक कैलेंडर का दसवां महीना है। इस त्यौहार के दौरान नमाज पढ़ने के अलावा उपहारों का आदान प्रदान होता है , एक दूसरे के गले मिलते हैं और बधाई देते हैं। इसे सेंवई ईद भी कहते हैं। इस दिन प्रत्येक मुसिलम भाई के घर सेंवई बनता है।

ईद मनाने से ठीक पहले मुसिलम समुदाय के लोग रमजान के पाक महीने में रोजा रखते हैं। भोर से लेकर शाम तक उपवास रखने को रोजा कहते हैं।अरबी में रोजा का अर्थ है खुद पर नियंत्रण रखना। रोजा रखने वाले इस दौरान कुछ भी खाते - पीते नहीं हैं। इस महीने में केवल खाने पीने के मामले में ही संयम नहीं बरतते है बलिक हर तरह से अपने आप को काबू में रखना पड़ता है। आम तौर पर इस महीने में निकाह नहीं होता, किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए, झगड़ा नहीं करना चाहिए, गलत काम नहीं करना चाहिए।

इस दिन मुसिलम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनते हैं। पुरूष एवं बालक मसिजद में नमाज पढ़ते हैं। महिलाएं और बालिकाएं घर पर नमाज पढ़ती हैं।नमाज के बाद एक दूसरे के गले मिलते हैं तथा जान पहचान वालों को बधाई देते हैं। इस पवित्र अवसर पर गरीबों को दान देते हैं, खाना खिलाते हैं ताकि वह भी ईद मना सके। ईद उल फितर का केवल धार्मिक अर्थ ही नहीं सामाजिक अर्थ भी है।

अन्य त्यौहारों की तरह ईद उल फितर भी बहुत जोश के साथ मनाया जाता है। कुछ भोजन और पेय पदार्थ इस त्यौहार का अभिन्न हिस्सा है। मुसिलम लोग इस अवसर पर घरों को सजाते हैं। कुछ पारंपरिक मिठाईयां और पकवान घर पर बनता है। इस अवसर पर मीठी सेंवईयां तो बनती ही हैं जो खाने में लाजवाब होती है। ईद से पहले बाजारों में भी रौनक छा जाती है केवल मुसिमल ही नहीं सभी दुकानदार और व्यापारी जितना हो सके व्यापार में लाभ करने की कोशिश करते हैं। यह पर्व हर्षोल्लास और मिलन का पर्व है।

 

 

 

 

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