Monday, November 20, 2017
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हरियाली तीज सुहागिनों का त्यौहार है और सुहागिनों के हर त्यौहार का श्रंगार से गहरा रिश्ता होता है।इसी तरह हरियाली तीज का भी श्रंगार से गहरा रिश्ता है। सुहागिनों का त्यौहार होने के बावजूद कुंवारी कन्याएं भी अपने आने वाले सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए इसे मानती हैं।अब श्रंगार करना है तो खरीददारी करनी ही पड़ेगी। हरियाली तीज से काफी पहले तीज को मानने वाली महिलाएं तय कर लेती हैं कि इस बार तीज पर कैसा श्रंगार करना है। इस दिन सुहागिन यहां तक कि कुंवारी लड़कियां भी नव वधु जैसा श्रंगार करना चाहती है।

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जैसा कि हम जानते हैं भारत त्यौहारों का देश है।हर त्यौहार पर महिलाएं अपने हाथों को मेहंदी से सजाती हैं और हरियाली तीज के श्रंगार का तो अहम हिस्सा है मेहंदी।इस अवसर पर महिलाएं, युवतियां यहां तक कि बचिचयां भी हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाती हैं। पहले मेहंदी लगाने का उत्सव घर पर ही होता था। आजकल प्रोफेशनल मेहंदी लगाने वाले भी मिल जाते हैं।

कहा जाता है कि जिसकी मेहंदी जितनी गहरी होगी उसे सास और पति का उतना ज्यादा प्यार मिलेगा। मेहंदी का रंग गहरा करने के लिए विशेष मेहंदी पेस्ट और तेल लगाया जाता है।कुछ महिलाएं मेहंद के डिजायन में पति का नाम लिखवाती हैं और हरियाली तीज के दिन रात को पति अपने पत्नी के हाथों पर अपना नाम ढ़ूंढ़ता है तथा पत्नी को सुखी वैवाहिक जीवन का आर्शीवाद देता है।

हरियाली तीज पर चमकीले रंग के कपड़े पहनने का रिवाज है। सामान्यत: महिलाएं साड़ी, सलवार सूट या लहंगा पहनती हैं।इस पर जरी का काम रहता है इसलिए यह भारी होते हैं।कुछ महिलाएं शादी का जोड़ा पहनना पसंद करती हैं।आजकल बाजार में हरियाली तीज के अवसर पर डिजायनर साडि़यां मिलती हैं।हरियाली तीज का हरे रंग के एक संबंध है।इसलिए यह डिजायनर साडि़यां हरे रंग की ही होती हैं।आजकल हरियाली तीज पर महिलाएं ज्यादातर हरे रंग पर आधारित साज श्रंगार करती हैं।

इस अवसर पर सोने और हीरे के जेवर पहने जाते हैं। परंतु इन दिनों महिलाएं अधिकतर इमिटेशन ज्वेलरी खरीदती हैं। इमिटेशन गहने बड़ी आसानी से साड़ी के रंग के साथ मैचिंग मिल जाते हैं।हरियाली तीज पर आजकल बाजार में गहने भी ज्यादातर हरे रंग के मिलते हैं।शादी शुदा महिलाएं भारी नेकलेस और मोटे कड़े पहनती हैं ताकि देखकर समझा जा सके कि वह विवाहित हैं।

श्रंगार चूडि़यों के बिना पूरा नहीं होता है।हरियाली तीज पर महिलाएं रंग बिरंगी कांच की चूडि़यां पहनती हैं।यह चूडि़यां भी कपड़े तथा अन्य गहनों से मैच करता है। कांच की चूडि़यों के अलावा मेटल की चूडि़यां भी पहनती हैं। श्रंगार के नाम पर महिलाएं कुछ भी अधूरा नहीं छोड़ना चाहती। यदि हरी साड़ी पहनती हैं तो बिंदी से लेकर चप्पल तक सब हरा होता है।इसी तरह जो लाल पहनती हैं वह सब कुछ लाल पहनती हैं।

हरियाली तीज में ज्यादातर हरे रंग का वर्चस्व रहता है। प्रकृति भी इस समय हरी होती है । इसलिए महिलाएं जब हरा कपड़ा, हरा गहना इत्यादि पहनती हैं तो प्रकृति के साथ एकाकार हो जाती हैं।

यूं तो हरियाली तीज उत्तर भारत में ही मनाई जाती है परंतु किसी त्यौहार को कुछ प्रांतों तक सीमित रखना संभव नहीं है। गुजरात, महाराष्ट्र में भी महिलाएं हरियाली तीज मनाती हैं। गुजरात की महिलाएं भी इस दिन अपनी पारंपरिक वेष भूषा धारण करती हैं। वह हरे के अलावा दूसरे रंग भी पहनती हैं। सजी धजी यह महिलाएं सर पर कलश रखकर देवी पार्वती की स्तुति में नृत्य करती है और गाना गाती है। गुजरात में इस अवसर पर विशेष गरबा भी होता है।

महाराष्ट्र में महिलाएं हरे वस्त्र, हरी चूडि़यां पहनती हैं। साथ में सुनहरे रंग की बिंदी और काजल लगाती हैं।

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हरियाली तीज पर महिलाओं का श्रंगार करना त्यौहार का एक रस्म माना जाता है। माता पार्वती की खुशियों को उत्सव के रूप में मनाने के लिए हाथों में मेहंदी लगााई जाती है, नए कपड़े पहने जाते हैं, झूला झूलते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन सोलह श्रंगार करने का नियम है।श्रंगार की तरह ही झूला भी हरियाली तीज का अहम हिस्सा है।

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