Thursday, November 23, 2017
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durga

नवरात्र मनाना केवल व्रत, उपवास ,मौज,मस्ती नहीं है। प्रत्येक व्यकित को अपने तरीके से नवरात्र अवश्य मनाना चाहिए।

एक दिव्य शकित पृथ्वी को सूर्य के इर्द गिर्द चक्कर लगाने की उर्जा प्रदान करती है।इससे प्रकृति में बदलाव होता है। परंतु यह दिव्य शकित विश्व का संतुलन बनाए रखती है। मौसम और प्रकृति के बदलाव का असर मनुष्य के शरीर के उर्जा स्तर पर पड़ता है। जब शरीर का उर्जा स्तर उंचा होता है तो सकारात्मकता बढ़ती है और मनुष्य कि्रयाशील, उत्साही और खुश हो जाता है।जब शरीर का उर्जा स्तर नीचा होता है तो नकारात्मकता बढ़ती है और मनुष्य लोभी , इष्र्यालू हो जाता है।

 भाद्र के महीने में शरीर का उर्जा स्तर सबसे नीचा होता है। सबसे पहले उर्जा स्तर को उंचा करने के लिए हम गणपति उत्सव मनाते हैं। गणपति बप्पा के आर्शीवाद से मनुष्य में सकारात्मकता बढ़ती है। उसके बाद पितृ पक्ष में हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इससे शरीर का उर्जा स्तर और बढ़ जाता है। इसके बाद आता है नवरात्र। इस दौरान नौ दिनों तक देवी शकित की नौ रूपों की आराधना की जाती है।देवी शकित उर्जा का स्रोत हैं। इनकी आराधना से शरीर का उर्जा स्तर बहुत बढ़ जाता है।

व्रत, उपवास से हमारा शरीर बदलते मौसम के अनुसार अपने आपको ढ़ालने में सक्षम हो जाता है।पूजन और आरती से देवी शकित हमें सदा जीवन में आगे बढ़ने की शकित देती हैं।गरबा नृत्य से हममें जोश और उत्साह पैदा होता है।देखते देखते जो मनुष्य कुछ दिनों पहले नकारात्मकता से भरा होता है, वह नवरात्र मनाने के बाद पूरी तरह सकारात्मक हो उठता है और सकारात्मक इंसान ही जीवन में सफल हो सकता है।

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