Saturday, November 25, 2017
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Alopi Devi Temple  4

इलाहाबाद । इलाहाबाद  मे  देवी  माँ  का  एक  ऐसा  भव्य  मन्दिर  है  जहाँ  कोई  मूर्ती  नही  है . आस्था  के  इस  अनूठे  केन्द्र  मे  लोग   मूर्ती  की  नही  बल्कि  पालने  की  पूजा  करते  हैं . मान्यता  है  की  यहाँ  शिवप्रिया  सती  के  दाहिने  हाथ  का  पंजा  गिरकर  अदृश्य  ( aloap) हो  गया  था , इसी  वजह  से  इस   सिद्ध्पीठ  को  अलोप  शंकरी  नाम  देकर  यह  प्रतीक    के  रूप  मे  एक  पालना   रख  दिया  गया . मान्यता  है  की  यह  हाथों  पेर  रक्षा  सूत्र  बांधकर    मांगने  वालो  की  हर  कामना  पूरी  होती  है  और  हाथ  मे  धागा  बंधे  रहने  तक  अलोपी   देवी  उनकी  रक्षा  करती  हैं 

 
Alopi Devi Temple  1
धर्म  की  नगरी  इलाहाबाद में . यह मंदिर  संगम  के  नजदीक  स्थित  है ,  देवी का  ये  मंदिर आस्था  का  एक  अनूठा  केन्द्र है ऐसा  मन्दिर .., एक  ऐसी  सिद्ध -पीठ  जिसमे  कोई  मूर्ती  नही  है . यहाँ  मूर्ती  न  होने  के  बाद  भी  रोज़अना देश  के  कोने -कोने  से  आने  वाले   हजारों  श्रद्धालुओं  का  जमावाडा  होता  है . आस्था  के  इस  अनूठे  केन्द्र  में  मूर्ती  के बजाये    एक  पालना  ( झूला ) लगा  है . श्रद्धालु  मूर्ती  की  जगह  इसी  पालने  का  दर्शन  करते  हैं ,और   इसकी  पूजा  करते  हैं  इसी  पालने  मे  देवी  का  स्वरूप  देखकर  उनसे  सुख -समृधि  व  वैभव  का  आशीर्वाद  लेते  हैं . मान्यता  है  की  यहाँ  जो  भी  श्रद्धालु  देवी  के  पालने  के  सामने  हाथों  मे  रक्षा -सूत्र  बाँधता  है  देवी  उसकी  सभी  मनोकम्नाये  पूरी  करती  हैं  और  हाथो  मे  रक्षा  सूत्र  रहने  तक  उसकी  रक्षा  भी  करती  हैं .
 
Alopi Devi Temple  2
पुरारो मे   वर्धित  कथा  के  मुताबिक  भगवन  विष्णु  ने  जब  सुदर्शन  चक्र  से  शिव  प्रिया  सती  के  शरीर  के  टुकडे  किए  तबी   इलाहाबाद  मे  इसी  जगह पर  देवी  के  दाहिने  हाथ  का  पंजा  कुंद  मे  गिरकर  अदृश्य  ( aloap) हो  गया  था . पंजे  के  अलोअप  होने  की  वजह  से  ही  इस  जगह  को  सिद्ध -पीठ  मानकर  इसे  अलोअप  शंकरी  मन्दिर  का  नाम  दिया  गया . सती  के  शरीर  के  अलोअप  होने  की  वजह  से  ही  यहाँ  कोई  मूर्ती  नही  है  और  श्रद्धालु  कुंड  पर   लगे  पालने  (झूले ) का  ही  दर्शन -पूजन  करते  हैं . आस्था  के  इस  अनूठे  केन्द्र  मे  लोग  कुंड  से  जल  लेकर  उसे  पलने  मे  चढ़ते  हैं  और  उसकी  परिक्रमा  कर  देवी  से  आशीर्वाद  लेते  हैं .
Alopi Devi Temple  3 
सिद्ध-पीठ  अलोप   शंकरी  मन्दिर  मे  पालने  की  पूजा  के  लिए  श्रद्धालुओं  की  भारी   भीड़  उमड़ती  है . ऐसी  मान्यता  है  की  श्रद्धालु  सच्चे  मन   से  जो  भी  कामना  करता  है  देवी  माँ  अपने    दाहिने  हाथ  से  उसे  आशीर्वाद  देकर  उसकी  मन   की  मुरादे  पूरी  करती  हैं . यहाँ  पर  नारियल  और  चुनरी  के  साथ  जल  व  सिन्दूर  चढाये  जाने  की  भी  परम्परा  है .
nishaan 
नवरात्र  के  अलावा  यह  आम  दिनों  मे  भी  यह  गाजे -बजे  के  साथ  निशान  चढाये  जाने  और  देवी  की  शान  मे  भजन  कीर्तन  किए  जाने  की  परम्परा  है . देवी  जागरण  तो  यहाँ  का  निय्मित  हिस्सा  है  जिसमे  शामिल  होकर  श्रद्धालु  आस्था  के  सागर  मे  गोते  लगते  हैं ...मन्दिर के बाहर पूरे साल
भक्तों कि लम्बी लाइन लगी रहती है | 

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