Monday, November 20, 2017
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भारत का सबसे बड़ा चर्च गोवा में सिथत है। इसे सी कैथिड्रेल कहते हैं।यह लैटिन रिट रोमन कैथोलिक आर्कडायोसिस आफ गोवा एंड दमन का कैथिड्रल है। ओल्ड गोवा में सिथत भारत का यह सबसे बड़ा चर्च कैथरीन आफ ऐलेक्जेंडि्रया को समर्पित है।

यह चर्च एशिया के बड़े चर्चों में से एक है।

यह चर्च एफोन्सो डी अल्बूकर्क और उसकी पुर्तगाली सेना की मुसिलम सेना पर विजय के अवसर पर बनार्इ गर्इ थी। इस युद्ध के परिणामस्वरूप 1510 में गोवा का शहर उनके कब्जे में आया। 1562 में चर्च का वास्तविक निमार्ण कार्य राजा डोम सीबेसिटआयो  के शासन काल में प्रारंभ हुआ। 1619 में कैथेड्रल पूरी तरह बनकर तैयार हुआ तथा 1640 में इसे धर्मार्थ समर्पित किया गया। प्रारंभ में इसके दो टावर थे परंतु 1776 में एक गिर गया , उसका पुर्न निर्माण आज तक नहीं हुआ।

सी कैथेड्रल का भीतरी हिस्सा

सी कैथिडै्रल की वास्तु शैली पोर्चुगीस - मैनुइलार्इन है। बाहरी हिस्सा टस्कन है और भीतरी हिस्सा कोरिनथियन। चर्च लंबार्इ में 250 फिट है और चौड़ार्इ में 181 फिट। सामने के हिस्से की उंचार्इ 115 फिट है।

सी कैथेड्रल का गोल्डेन बेल

सी कैथिड्रेल के टावर में एक बहुत बड़ा बेल है इसे गोल्डेन बेल कहते हैं। कहा जाता है कि यह गोवा में सबसे बड़ा है और  विश्व के अच्छे बेलों में से एक है। मुख्य पूजा स्थल कैथरीन आफ ऐलेक्जेंडि्रया को समर्पित है। दूसरी ओर कर्इ पुरानी पेंटिंग्स हैं। दाहिनी तरफ क्रास आफ मिराक्लस का चैपल ; प्रार्थना करने की जगह द्ध है। कहा जाता है कि 1919 में इस स्थान पर र्इसा मसीह की छवि प्रकट हुर्इ थी। यहां छ: मुख्य पैनेल है जिस पर सेंट कैथरीन के जीवन की घटनाओं का चित्र खुदा हुआ है।  

भारत में गोवा देश विदेश के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का स्थल है और गोवा के पर्यटन स्थलों का यह आकर्षण है।

 

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