Monday, November 20, 2017
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इलाहाबाद में चाहे बसंत पंचमी हो या मकर संक्रांति अथवा श्रावण मास इसे मनाने का तरीका निराला होता है। इलाहाबाद अर्थात प्रयाग में लगभग हर त्यौहार का एक महत्वपूर्ण अंग होता है संगम स्नान।

प्रयाग में हर 12 साल में पूर्ण कुंभ,हर छ: साल में अर्ध कुंभ और प्रत्येक वर्ष माघ मेला होता है। हर बार बसंत पंचमी ऐसे ही मेले के दौरान पड़ती है।

इस वर्ष 4 फरवरी को बसंत पंचमी है। मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी का स्नान एक बड़ा स्नान पर्व है। अनेक श्रद्धालू इस अवसर पर संगम में डुबकी लगाने के लिए आते हैं। डुबकी लगाने के पश्चात पीले वस्त्र पहनते हैं, संगम तट पर ब्राहमणों को दान देते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। पूर्वजों की पूजा होती है और कुछ लोग प्रेम के देवता कामदेव की भी पूजा करते हैं। इस माघ मेले में भी बसंत पंचमी का दृश्य कुछ ऐसा ही होगा बशर्ते मौसम साथ दे तो।

स्नान पर्व होने के कारण शहर के बाहर से आए हुए स्नानार्थियों की भारी भीड़ होती है इसीलिए शहर के लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है विशेषकर रूट डायवर्जन का।फिर भी  शहरवासी अपनी तरह से बसंत पंचमी मनाते हैं। कर्इ मोहल्लों में बारवारियां सार्वजनिन सरस्वती पूजा का आयोजन करते हैं। सरस्वती पूजा का एक आकर्षण है सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं। इसमें मुख्यत: मोहल्ले के बच्चे ही भाग लेते हैं। जिन मोहल्लों में सार्वजनिन पूजा नहीं होती वहां भी किसी न किसी के घर में पूजा होती है। केवल इलाहाबाद ही नहीं इस तरह सरस्वती पूजा के माध्यम से बसंत पंचमी तो हर शहर में मनार्इ जाती है। परंतु प्रयाग में बसंत पंचमी के स्नान पर्व का अधिक महत्व है। संगम तट पर स्नानार्थी जो समां बांधते हैं उसका रंग ही कुछ और होता है। इलाहाबाद में बसंत पंचमी सम्पूर्ण होता है संगम स्नान और सरस्वती पूजा के मेल से।

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