Monday, November 20, 2017
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बसंत पंचमी धार्मिक त्यौहार के साथ मौसमी त्यौहार भी है।  यह बसंत के आगमन की सूचना देता है। पंजाब में बसंत पंचमी को बसंत कहते हैं । पंजाब के लोग पूर्ण आस्था के साथ पारंपरिक रूप से बसंत मनाते हैं।

पंजाबी परंपरा में बसंत पंचमी

बसंत पंचमी का त्यौहार हरमिंदर साहिब, अमृतसर में धूम धाम से मनाया जाता है। कार्यक्रम की  शुरूआत राग बसंत से होता है और यह बैसाख के पहले दिन तक चलता है। अमृतसर में ही छेहारता साहिब गुरूद्वारा में बसंत का मेला लगता है। इस मेले का मुख्य आकर्षण है पतंग उड़ाना। बसंत पंचमी के दिन पतंग उड़ाना बहुत पुरानी परंपरा है। इस दिन अमृतसर के आकाश में रंग बिरंगे पतंग छा जाते हैं।

 कपूरथला के शासक महाराजा जगतजीत सिंह ने बसंत पंचमी मेले की शुरूआत की थी जो शालीमार बाग में होता है। यह मेला इस साल 97 वर्ष में कदम रखेगा। लोग पीले वस्त्र और पीली पगड़ी पहनकर मेले में शामिल होते हैं। पंजाब में बसंत का एक और महत्व है। वहां बसंत को हकीकत राय के शहादत से जोड़ा जाता है। हकीकत राय लोगों को अपने पसंद का धर्म अपनाने का अधिकार दिलाने के लिए लड़े और अपने प्राण गंवाए। होशियारपुर में बाबा भंडारी की बोइली में इस दिन मेला लगता है जहां हजाराें की संख्या में स्त्री, पुरूष और बच्चे शहीद हकीकत राय की समाधि पर श्रद्धांजली अर्पित करने आते हैं। इस मेले में भी पतंगबाजी प्रतियोगिता पुरानी परंपरा है।

पंजाब के साथ हरियाणा में भी बसंत पंचमी के दिन पतंगबाजी की पुरानी परंपरा है। त्यौहार कोर्इ भी हो यहां के लोग उसे भरपूर जीते हैं। बसंत पंचमी के दिन पंजाब और हरियाणा के सभी शहरों में पतंगबाजी की धूम होती है। यहां इस अवसर पर चीन से पतंग मंगार्इ जाती है।

पंजाब में बसंत पंचमी पर पतंग उत्सव के द्वारा लोग शहीद संत राम सिंह कुका को भी याद करते हैं। उनका जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ था। वह रंजीत सिंह की सेना में सिपाही थे, बाद में संत बन गए। उनके विचारों से प्रभावित होकर अनेक लोग उनके शिष्य बने। समाज की भलार्इ के लिए उन्होने अनेक कार्य किए। अंग्रेजों ने उनके शिष्यों को मार डाला और उन्हें बर्मा के जेल में भेज दिया। वहां उन पर हुए भीषण अत्याचार के फलस्वरूप उनकी मृत्यु हो गर्इ।

हिंदू परंपरा में बसंत पंचमी

व्यापक रूप से हिंदू इस दिन सरस्वती पूजा करते हैं परंतु प्राचीन हिंदू परंपरा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन सुबह उठकर नहाने के पश्चात पीले वस्त्र धारण करते हैं। कपाल पर पिसी हल्दी का तिलक लगाते हैं और सूर्य देवता की पूजा करते हैं, फिर मां गंगा और पृथ्वी का। इसके बाद सरस्वती पूजा होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है।

अनेक शिक्षण संस्थनों में मां सरस्वती की पूजा होती है जिसकी शुरूआत गुरूदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने शांती निकेतन में की थी। जिस तरह शिक्षा का प्रारंभ बसंत पंचमी के दिन शुभ होता है, ठीक उसी तरह इस दिन शिक्षण संस्थानों की नींव रखना बेहद शुभ होता है जैसे 1916 में बसंत पंचमी के दिन पं0 मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की नींव रखी थी।

बसंत पंचमी को बंगाल में श्री पंचमी भी कहते हैं।

पूरे भारत में बसंत पंचमी को मुख्यत:  सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है।  हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का धर्मिक महत्व ही है। पंजाब में बसंत को दो शहीदों से जोड़ा जाता है और उनकी याद में पतंगबाजी होती है। पंजाब के अलावा उत्तर भारत के अन्य शहरों ,गांवों में भी पतंग उड़ार्इ जाती है लेकिन इसका कारण शहीदों की याद नहीं है। बसंत पंचमी को ठंड के खत्म होने का सूचक माना जाता है इसिलिए उत्तर भारत के अन्य प्रदेशों में खुशी से पतंग उड़ाते हैं। जो भी हो पतंगबाजी के बिना बसंत पंचमी संपूर्ण नहीं होती।

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