Monday, November 20, 2017
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इलाहाबाद। प्रभु यीशु मसीह के जन्म की तैयारी कर रहे मसीही परिवार इस समय घरों और चर्च को सजाने में जुटे हैं। शहर के सभी गिरजाघर इस बिजली की आकर्षक सजावट से जगमगा रहे हैं। सोमवार रात तक सजावट में फूलों को भी शामिल कर सजावट को पूरा किया गया। अब सभी को इंतजार है तो कि्रसमस बेल का जो ठीक रात 12 बजे यीशु के जन्म की खबर सुनाएगी। कड़ाके की ठंड भी लोगों के उत्साह के आगे फीकी नजर आ रही है। चौक और सिविल लाइंस में देर रात की खरीदारी इसी खुशी को बयां कर रही है। सोमवार की शाम तक लोगों ने आर्डर किए गए केक को घर में लाकर रख दिया और जिन्होंने घर में केक बनाया था उन्होंने केक की सजावट को अंतिम रूप दिया।

सुभाष चौराहे पर सजी दुकानों पर बड़ों और बच्चों ने घरों और कि्रसमस टी्र को सजाने के लिए देर रात तक खरीदारी की। तरह-तरह के सजावटी सामानों के साथ उपहारों के खरीदने का सिलसिला भी चला। चर्च को सजाने वालों ने यीशु के जन्म की झांकी सजाने के लिए चरनी, सितारे खिलौने खरीदे तो बच्चों को सेंटा क्लाज की टोपी ने खूब लुभाया। कई जगहों पर नारियल की जटाओं जूट, कूलर की घास, पेड़ की झाड़ आदि से सुंदर झांकी सजाई गई हैं।

कि्रसमस के मौके पर कि्रसमस वृक्ष का विशेष महत्व है। इस दिन इस पौधे को सजाया जाता है। अनुमानत: इस प्रथा की शुरुआत हिबूर लोगो ने की थी लेकिन आधुनिक कि्रसमस वृक्ष को सजाने की शुरुआत पशिचम जर्मनी से हुई। जर्मनी के लोगों ने 24 दिसंबर को फर के पेड़ से अपने घर की सजावट करनी शुरू की। विक्टोरिया काल में इन पेड़ों को मोमबतितयों टाफियों और केकों को पेड़ से बांधा जाता था। माना जाता है इंग्लैंड के प्रिंस अलबर्ट ने 1841 में विंडसर कैसल में पहला कि्रसमस वृक्ष लगाया था।

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