Saturday, November 25, 2017
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lohri

कहते हैं भारत त्यौहारों का देश है और साल के पहले महीने जनवरी का पहला त्यौहार है लोहड़ी। यह त्यौहार पंजाबियों एवं हरियाणवियों में बहुत लोकप्रिय है। खेती से जुड़ा यह शीतकालीन त्यौहार संपूर्ण पंजाब और हरियाणा , हिमाचल प्रदेश और जम्मू के कुछ भाग एवं दिल्ली में मनाई जाती है।


यूं तो लोहड़ी का मूल पंजाब से है । समय के साथ साथ पंजाब के आस पास के राज्यों में भी यह त्यौहार फैल गया जैसे सिंध ,जम्मू , हरियाणा, हिमाचल प्रदेश ,दिल्ली इत्यादि। लोहड़ी को रबी फसल के साथ जोड़ा जाता है। लोग पूजा के स्थान पर मूंगफली , रेवड़ी ,मैदा , मक्खन इत्यादि खाध पदार्थ रखते हैं एवं भगवान को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद करते हैं। पंजाब के किसानों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। उनके लिए लोहड़ी के बाद से नया आर्थिक वर्ष प्रारंभ होता है।

लोहड़ी और मौसम का संबंध 
साल में दो दिन ऐसे होते हैं जब सूर्य भू मध्य रेखा से सबसे दूर होता है। ग्रीष्म ऋतु का एक दिन और शीत ऋतु का एक दिन। शीत ऋतु का यह दिन 22 दिसंबर के आस पास पड़ता है और इसे विंटर सालसिटस कहते हैं। विंटर सालसिटस की पूर्व संध्या को लोहड़ी का पर्व पड़ता है लेकिन पंजाबी इस त्यौहार को मकर संक्रान्ती की पूर्व संध्या को मनाते हैं। इसका कारण है विंटर सालसिटस का दिन पौष महीने में पड़ता है और इस महीने में कोई भी पवित्र त्यौहार नहीं मनाया जाता है। इस तरह से लोहड़ी को विक्रमी कैलेंडर से जोड़ देते हैं। सिंधी लोग इस पर्व को लाल लोई कहते हैं। लोक कथा के अनुसार प्राचीन पंजाब में विंटर सालसिटस की पूर्व संध्या पर ही लोहड़ी मनाया जाता था । इसलिए लोहड़ी की रात को साल की सबसे बड़ी रात कहते हैं क्योंकि विंटर सालसिटस के दिन से ही दिन बड़े होने प्रारंभ होते हैं।

पंजाब के त्यौहार एवं प्रकृति
पंजाबियों में उनके लोक धर्म का महत्व बहुत अधिक है। उनके त्यौहारों में ऋतु एवं पंच तत्व बहुत महत्वपूर्ण है जैसे लोहड़ी शीत ऋतु की समाप्ती को समर्पित है , तीज जिसे पंजाबी में तीयां कहते हैं वर्षा ऋतु को समर्पित है और बसंत बसंत ऋतु को समर्पित है।

दुल्ला भटटी का लोहड़ी में महत्व
दुल्ला भटटी पंजाब का राबिनहुड है। पंजाब के लोग उसे हीरो मानते हैं। मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दुल्ला भटटी पंजाब में रहता था। वह अमीरों को लूटता था और मध्य पूर्व क्षेत्र के गुलामों के बाजार में बिकने वाली लड़कियों को बचाता था। वह रीति रिवाज के साथ लड़कियों की शादी हिंदू लड़कों से करवाकर उन्हे दहेज भी देता था। इसलिए पंजाब के लोग आज भी उसे याद करते हैं और लोहड़ी के गीतों द्वारा उसके प्रति सम्मान , आस्था प्रकट करते हैं।

दुल्ला भटटी भटटी राजपूत और एक विद्रोही था । उसके पूर्वज संदल बार क्षेत्र के पिंडी भाटीयां के शासक थे। यह क्षेत्र आज पाकिस्तान में है।

लोहड़ी का गीत

सुंदर मुंदि्रय हो -
तेरा कौन विचारा हो -
दुल्हा भटटी वाला हो -
दुल्हे की धी ब्याही हो -
सेर शक्कर पाई हो -
कुड़ी दा लाल पाटाखा हो -
कुड़ी दा सालू फटटा हो -
सालू कौन समीती -
चाचा गाली देसे -
चाची चूड़ी कुटटी -
जमींदारा लुटटी -
जमींदार सुधाय -
बम बम भोले आए -
एक भोला रह गया -
सिपाही फर के लई गवा -
सिपाही ने मारी ईंट -
भानवे रोते भानवे पीट -
सानू दे दे लोहड़ी , ते तेरी जीवी जोड़ी।

कैसे पड़ा लोहड़ी नाम
पक्के तौर पर तो यह कहना नामुमकिन है कि इस पर्व का नाम लोहड़ी कैसे पड़ा। कुछ लोग कहते हैं प्राचीन धारणा के अनुसार लोहड़ी शब्द लोह यानि लौ से आया। लौ शब्द का अर्थ है प्रकाश और आग की गर्मी।

एक और धारणा है कि इस पर्व पर तिल और रेवड़ी खाना आवश्यक है। हो सकता है कि तिल और रेवड़ी मिलकर तिलौड़ी बन गया जो समय के साथ लोहड़ी में तब्दील हो गया।

परंपरिक लोहड़ी 

tradition lohri
दिन में बच्चे घर घर जाकर दुल्ला भटटी की प्रशंसा में लोक गीत गाते हैं और सभी घरों से बच्चों को मिठाई , खाध पदार्थ मिलता है। उन्हें खाली हाथ लौटाना बुरा होता है। सभी घरों से बच्चों को गजक , तिल ,गुड़ , मूंगफली तथा फुलिया मिलता है जिसे लोहड़ी कहते हैं। रात को लोहड़ी सभी लोगों में बांटा जाता है। तिल ,मुंगफली ,पपकार्न इत्यादि आग में फेंक दिया जाता है।

पंजाब के कुछ भागों में गोबर से लोहड़ी देवी बनाकर उसे सजाते हैं और फिर उसके नीचे आग लगाते हैं एवं उसकी प्रशंसा में गीत गाते हैं। पंजाब के अन्य भागों व देश के अन्य भागों में गोबर एवं लकड़ी से आग जलाते हैं।

लोहड़ी के दिन सूरज ढ़लने के बाद खुले में गांव के चौक पर आग जलाया जाता है और लोग उसमें तिल , गुड़ ,रेवड़ी फेंकते हैं , दूध और पानी डालते हैं , आग के चारों ओर गोला बनाकर बैठते हैं ,नाचते व गाते हैं जब तक आग बुझ न जाये। कुछ लोग प्रार्थना भी करते हैं।ऐसा करके लोग आग के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।इसके द्वारा सूर्य को धन्यवाद किया जाता है।

लोहड़ी सर्दी की समापित को दर्शाने के लिए मनाया जाता है। यह त्यौहार मूलत: पंजाब का है लेकिन आजकल पंजाब के आस पास के राज्यों में लोहड़ी जोर शोर से मनाई जाती है। देश विदेशों में जहां भी पंजाबी हैं वहीं लोहड़ी मनाई जाती है। अब लोग अपने घरों में भी लोहड़ी मना लेते हैं। जिन परिवारों में नई शादी हुई हो या नन्हा मेहमान आया हो उस वर्ष उस घर की लोहड़ी बहुत धूम धाम से मनाई जाती है। 

नृत्य और गीत लोहड़ी के अभिन्न अंग हैं। लोग चटख रंगों के कपड़े पहनकर ढ़ोल के धुन पर भांगड़ा और गिददा करते हैं। इस दौरान पंजाबी गाने गाये जाते हैं और सरसों दा साग तथा मक्के दी रोटी रात के भोजन के मुख्य अंश होते है। यह त्यौहार परिवार एवं मित्रों के साथ मनाया जाता है।

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