Monday, November 20, 2017
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प्रत्येक ग्रह का सम्बंध प्रकृति की वनस्पतियों से है। अनिष्ट ग्रहों की शान्ति के लिए उनसे संबंधित वनस्पतियों का प्रयोग हवन में करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। नवग्रह वाटिका में प्रत्येक ग्रह से संबंधित लकड़ी का उल्लेख शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित है। ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार यदि कोई ग्रह अनिष्टकारक हो, तो उससे सम्बन्धित लकड़ी से हवन, होम आदि करना विशेष फलप्रद रहता है और अगर यह हवन, आहुति होलिका की अग्नि में दी जाए तो अनिष्ट ग्रहों के शमन के लिए विशेष कारगर एवं प्रभावशाली रहता है।

 

       ग्रहों के अनुसार होलिका दहन से पहले नवग्रह की लकडि़यां एकत्रित कर होली की परिक्रमा करते हुए उन्हें होलिका में क्रमशः अर्पित करें।

       अगर आपका सूर्य खराब हो या सर्य के कारण मारकेश आदि का भय हो तो होलिका की अग्नि में मदार की लकड़ी अर्पित कर परिक्रमा कर अनिष्ट सूर्य शांति हेतु प्रार्थना करें। इसी प्रकार चन्द्रमा के अनिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए पलाश की लकड़ी, मंगल को अनुकूल बनाने के लिए खैर (खादिर) वनस्पति, बुध के अनिष्ट को शांत करने के लिए अपामार्ग की लकड़ी, बृहस्पति के विपरीत प्रभाव को दूर करने के लिए पीपल की लकड़ी, शुक्र के अनिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए गूलर की लकड़ी, शनि को अनुकूल बनाने के लिए शमी की लकड़ी, राहु की शांति के लिए दूब अ©र केतु की शांति हेतु कुशा को अग्नि में समर्पित कर ग्रहों की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। अगर किसी को ग्रह दशा का ज्ञान नहीं है, तो भी सुख-समृद्धि एवं मंगल कामना के लिए होली की न© परिक्रमा लगाऐं, पहली परिक्रमा में मदार की लकड़ी, दूसरी परिक्रमा में पलाश की लकड़ी, तीसरी परिक्रमा में खैर (खादिर) वनस्पति, ©थी परिक्रमा में अपामार्ग की लकड़ी, पांचवी में पीपल की लकड़ी, छठी में गूलर की लकड़ी, सातवीं परिक्रमा में शमी की लकड़ी, आठवीं में दूब तथा नवीं परिक्रमा में कुशा को होलिका में अर्पित कर नवग्रहों को एक साथ नमन करें अ©र अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए प्रार्थना करें।

 

 

 

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