Monday, November 20, 2017
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ग्रह पीड़ा मुक्ति के लिए होली पर विशेष स्नान

ज्योतिष शास्त्र में अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए उनसे संबंधित रत्न धारण, मन्त्र जाप, पूजा-पाठ, यन्त्र धारण दान आदि उपायों का सहारा लिया जाता है। रत्न धारण, मन्त्र जप हर आदमी नहीं कर पाता। ग्रह पीड़ा से शांति प्राप्ति के लिए रत्न धारण, मन्त्र जप, पूजा-पाठ के समान ही औषधीय स्नान भी बहुत प्रभावशाली तथा चमत्कारिक होता है। आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान द्वारा स्पष्ट है कि औषधियों में विशेष शक्ति पाई जाती है। ज्योतिष शास्त्र में औषधि स्नान एवं उससे मिलने वाले लाभ का वृहद वर्णन प्राप्त होता है। ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार अपनी विशेषता के अनुसार प्रत्येक ग्रह से संबंधित औषधि का प्रयोग, प्रकाश को अधिक आकर्षित करके उस ग्रह से पीडि़त व्यक्ति की व्यथा शांत करती है।

  • यदि आपका सूर्य खराब चल रहा हो तो केसर, खस, इलायची, कमल, कुकुंम, मुलहठी, देवदार, मैनसिल, मधु, साठी चावल तथा लाल रंग के पुष्प (गुलाब/गुड़हल) मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से सूर्यकृत पीड़ा का निवारण होता है।
  • यदि आपका चन्द्रमा खराब चल रहा हो तो पंचगव्य (गाय का घी, दूध, दही, गोबर व मूत्र), शंख जल, चांदी बुरादा, मोती तथा सफेद चन्दन आदि से युक्त जल के द्वारा स्नान करने से चन्द्रकृत पीड़ा का निवारण होता है।
  • यदि आपका मंगल खराब चल रहा हो तो लाल चन्दन, लाल पुष्प, हींग, बेलपत्र के वृक्ष की छाल, ©लसिरी के फूल, सौंफ, सोंठ, जटामासी तथा मालसांगरी के फूल आदि के मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से मंगलकृत पीड़ा का शमन होता है।
  • यदि आपका बुध खराब चल रहा हो तो आंवला, पान का पत्ता, अमरूद, गाय का गोबर, चावल, यरहइ गोरोचन, सोना, मोती (मोती व सोने को बाद में निकालकर रख लें, फेकें नहीं) आदि के मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से बुधकृत पीड़ा का शमन होता है।
  • यदि आपका बृहस्पति खराब चल रहा हो तो पीली सरसों, मालती के फूल, मुलहठी, मधु, हरिदा (हल्दी), भृंगराज की जड़ तथा चमेली के पुष्प आदि के मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से गुरुकृत पीड़ा का शमन होती है।
  • यदि आपका शुक्र खराब चल रहा हो तो मूली के बीज, इलायची, चीनी, जायफल, मैनसिल, सफेद चन्दन तथा किसी भी सुगन्ध देने वाले वृक्ष या लता की जड़ आदि के मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से शुक्रकृत पीड़ा का शमन होता है।
  • यदि आपका शनि खराब चल रहा हो तो काला तिल, लोबान, सुरमा, शमी वृक्ष की लकड़ी का बुरादा, गोंद आदि के मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से शनिकृत पीड़ा का शमन होता है।
  • यदि आपका राहु खराब चल रहा हो तो लोबान, नागरमो था, तिलपत्र, कुम्भ पर्व का गंगाजल आदि मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से राहुकृत पीड़ा का शमन होता है।
  • यदि आपका केतु खराब चल रहा हो तो लाल चन्दन, जटामासी, लोबान आदि के मिश्रित जल द्वारा स्नान करने से केतुकृत पीड़ा का शमन होता है।

      अनुभव में आया है कि अ©षधि स्नान उस ग्रह से संबंधित वार में कभी भी प्रारम्भ किया जा सकता है। लेकिन होली पर्व पर अथवा ग्रहण काल में स्नान करना विशेष उपयोगी होता है। होली से पूर्व ग्रहों के अनुसार जो अ©षधि बताई गई हैं उन्हें इकट्ठा करना चाहिए। यह औषधियां किसी पंसारी के यहाँ आसानी से मिल जाती हैं। औषधि को कूटकर अथवा पाउॅडर बनाकर उन्हें कम से कम 3 घण्टे अथवा अधिक से अधिक 24 घण्टे पहले किसी शुद्ध पात्र में जल में भिगो देना चाहिए। जब इल औषधियों का गुण पानी में आ जाये तो पानी को छान कर किसी पात्र में भर लेना चाहिए। स्नान करते समय मुख पूर्व की तरफ होना चाहिए।

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