Monday, November 20, 2017
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पूरे वर्ष में केवल अक्षय तृतीया ही एक ऐसा पर्व है, जिसका कोई भी क्षण क्षय नहीं होता, अर्थात् खंडित नहीं होता है। इसी कारण यह दिवस सभी कार्यों में सफलता प्रदान करता है। वैशाख शुक्ल तृतीया को पड़ने वाले इस विशिष्ट दिवस को लक्ष्मी पूजन, दीपावली के बाद, सबसे विशिष्ट माना गया है। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार अक्षय-तृतीया के दिन सूर्य और चन्द्रमा अपनी उच्च राशि में रहते हैं, जिसके कारण स्वर्ण सहित चांदी के आभूषण आदि धातु की खरीददारी विषेष शुभप्रद रहती है। इस दिन दान-दक्षिणा का भी विशेष महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन 10 ब्राह्मणों को भोजन कराने से पूर्वजन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। यह दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है, अक्षय तृतीया के दिन जल से भरा पात्र व छाता और पंखा दान करने से तथा पानी की प्याऊ लगवाने से विशेष पुण्य मिलता है, जिससे मृत्योपरांत स्वर्ग जाने की बाधाऐं समाप्त हो जाती हैं, ऐसा धर्मशास्त्रों का मत है। इस दिन जो एवं चावल का दान विशेष रूप से किया जाता है। स्नान करते समय जल में भी तीर्थ जल और अक्षत डालने चाहिए। इस दिन नए कार्य, व्यापार आदि का शुभारंभ करना विशेष फलप्रद रहता है। इस दिन प्रारंभ किए गए कार्य, व्यापार आदि का क्षय नहीं होता है। मान्यता है कि इस दिन नए स्वर्ण आभूषण धारण करने वाली विवाहित स्त्री अखण्ड सौभाग्यवती होतो है। इस तिथि का सर्वसिद्धि मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। अक्षय तृतीया पर्व पर त्रेतायुग का आरंभ हुआ था और श्री परशुराम जी का जन्म हुआ जो भगवान विष्णु के छठवें अवतार थे। महाकाव्य-महाभारत की एक कथा अनुसार जब पांडव वनवास में थे तो उनके पास एक अक्षय-पात्र्’ था जिसमें भोजन कभी समाप्त नही होता है। खाने के पश्चात वह अक्षय-पात्र्’ पुनः भर जाता था। उसी प्रकार से माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन खरीदा स्वर्ण उस व्यक्ति के धन-समृद्धि में वृद्धि करेगा। खरीददार का जीवन, ‘अक्षय’ शब्द के समान बन जाता है। जिसमें कभी कमी नहीं आती, केवल समृद्धि आती है। यह दिन केवल स्वर्ण खरीदने के लिए ही नहीं परन्तु नए कार्यों को आरंभ करने के लिए भी शुभ दिन है। इस दिन खरीदे गए स्वर्ण सिक्के, आभूषण इत्यादि सौभाग्यशाली हैं और सफलता दिलवाते हैं।

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय

निदेशक, ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान

 

विवाह लग्न 

अप्रैल 2015 से मार्च 2016 तक सर्वाधिक शुभ मुहूर्त के बारे में बता रहे हैं ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय :-

 

अप्रैल 2015      : 16] 21] 22] 27] 28] 29] 30 तारीख

मई 2015           : 7] 9] 14] 25] 27] 28] 30] 31 तारीख

जून 2015          : 2] 3] 4] 5] 6] 10] 11] 12 तारीख

जुलाई 2015      : अधिक (मल) मास व हरिशयन (चातुमार्स) के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है।

अगस्त 2015     : शुक्र और गुरु के अस्त तथा हरिशयन (चातुमार्स) के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है।

सितम्बर 2015     : गुरु अस्त व हरिशयन (चातुमार्स) के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है।

अक्टूबर 2015    : हरिशयन (चातुमार्स) के कारण विवाह मुहूर्त नहीं है।

नवम्बर 2015      : 26 तारीख

दिसम्बर 2015     : 7] 8] 13] 14 तारीख

जनवरी 2016      : 19] 20] 27] 28] 29 तारीख

फरवरी 2016       : 7] 12] 16] 17] 22] 24] 25] 26] 29 तारीख

मार्च 2016         : 1] 3] 5 तारीख

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