Monday, November 20, 2017
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धरहरा टॉवर नेपाल की एक ऐतिहासिक धरोहर है। लेकिन दुख के साथ आज इस टॉवर को है नहीं था कहना चाहिए। काठमांडू का गर्व था धरहरा टॉवर। शनिवार 25 अप्रैल 2015 को आए विनाशकारी भूकंप ने इस टॉवर की क्या दशा की है यह ऊपर का चित्र दर्शा रहा है।

 

टीवी चैनेलों से आप सबको इस टॉवर के बारे में पता चला है परंतु क्या आपको पता है कि यह कितनी ऊंची हुआ करती थी या इसमें कितनी सीढि़यां थीं। तो आईए आज इस पर एक नजर डालते हैं।

धरहरा टॉवर को भीमसेन टॉवर भी कहते हैं। सुंधरा, काठमांडू के मध्य में स्थित यह टॉवर 61.88 मीटर ऊंची है। यह नौ मंजिला इमारत है। नेपाल के प्रथम प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने बनवाया था। काठमांडू की इस वास्तुकला को UNESCO से स्वीकृति मिली है।

टॉवर की आठवीं मंजिल पर गोल बालकनी है जिससे लोगों को काठमांडू घाटी का बहुत ही सुंदर दृश्य दिखे। टॉवर के ऊपर 5.2 मीटर यानि 17 फीट ऊंची ब्राॅन्ज मास्ट है। टॉवर पर चढ़ने के लिए 213 घुमावदार सीढि़यां हैं।


भीमसेन थापा ने दो टॉवरो का निर्माण कराया था। धरहरा टॉवर के निर्माण से आठ साल पहले 1824 में पहले टॉवर का निर्माण हुआ था। पहला टॉवर धरहरा से दो मंजिल ऊंचा था। कहा जाता है कि धरहरा रानी ललित त्रिपुरा सुंदरी के लिए बनवाया गया था।


धराहरा टॉवर 1834 के भूकंप से पहले

1834 के भूकंप में दोनों टॉवर बच गए। परंतु भीमसेन द्वारा बनवाए गए प्रथम टॉवर को काफी नुकसान हुआ। सौ साल बाद 15 जनवरी 1934 के भूकंप में पहला टॉवर पूरी तरह बर्बाद हो गया और धरहरा टॉवर की केवल दो मंजिलें बची थीं। नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री जूद्दा शमशेर ने धरहरा टॉवर को फिर से बनवाया और टॉवर लोगों के सामने अपनी पूर्व अवस्था में आया। धरहरा टॉवर को भीमसेन टॉवर भी कहा जाने लगा।


धरहरा टॉवर मुगल और यूरोपीय शैली में बनाई गई है। इसे टॉवर कहते हैं लेकिन यह इस्लामिक मीनार की याद दिलाता है। इसे नेपाल का कुतुबमीनार भी कहा जाता है। टॉवर की बालकनी में  शिव  लिंग भी है। शनिवार के इस विनाशकारी भूकंप के बाद टॉवर 10 मीटर ऊंचा रह गया है यानि की आधार ही बचा है। वास्तव में यह टॉवर आज नहीं है लेकिन लोगों की यादों में यह आज भी और हमेशा सर ऊंचा करके खड़ा रहेगा।

 

 

 

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