Thursday, November 23, 2017
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आप सभी करवा चैथ के बारे में जानते ही हैं पर क्या आपने कभी सोचा कि करवा चैथ की शुरूआत कैसे हुई। दो शब्दों से बना है करवा चैथ। करवा का अर्थ है मिट्टी का दिया और चैथ का चार। करवा चैथ हिंदू कैलेंडर के मुताबिक कार्तिक महीने के चैथे दिन पर होता है।

पहले करवा चैथ केवल पति के लिए रखने वाले व्रत के रूप में नहीं देखा जाता था। धीरे धीरे पुरानी प्रथा की जगह करवा चैथ के नए मायने बनें। आज करवा चैथ पर सुहागिनें भगवान से पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं।हालंकि करवा चैथ मनाने की पुरानी परंपरा आज बदल चुकी है परंतु आज भी करवा चैथ एक बड़े त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।
करवा चैथ की प्रथा कैसे शुरू हुई-करवा चैथ का इतिहास कहता है कि करवा चैथ बहुत पुराने समय से मनाया जा रहा है। माना जाता है कि करवा चैथ की रीतियां सुहागिन और उसके ससुराल की किसी महिला से उसके रिश्ते को दर्शाती थी। पुराने दिनों में एक लड़की जब विवाह के पश्चात ससुराल आती थी तो नव वधु किसी हम उम्र लड़की या किसी भी उम्र की महिला के साथ दोस्ती का रिश्ता बनाती थी, जिसके साथ वह अपनी परेशानियां और भावनाएं बांट सके। करवा चैथ इस दोस्ती के रिश्ते को सम्मानित करने का जरिया था। धीरे धीरे करवा चैथ का यह अर्थ बदल गया और अब करवा चैथ का अर्थ है पति की लंबी उम्र के लिए पत्नी द्वारा व्रत रखना। यह अर्थ क्यों बदला इसका जिक्र कहीं नहीं मिलता। हो सकता है कि एकल परिवार इसका कारण हो।
करवा चैथ उत्तर भारत और उत्तर पश्चिमी भारत में मनाया जाता है। इसकी कई कहानियां हैं। एक कथा के अनुसार करवा चैथ साल के जिस समय होता है उस समय घर के पुरूष कमाने के लिए दुर दराज की यात्रा पर निकल जाते थे। सप्त सिंधू क्षेत्र सूखा ही रह जाता था और बरसात के लिए अगले मानसून तक इंतजार करने के सिवाय कोई चारा न था। ऐसे में घर के पुरूष कमाने के लिए दूर दराज के क्षेत्र में चले जाते थे और स्त्रियां घर पर रहकर पति की सलामती और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती थीं। तो इस तरह करवा चैथ का रूप बदल गया। एक और कथा कहती है कि यह त्यौहार फसल बोआई के समय आती है। लोग मिट्टी के बर्तनों में फसल रखते थे जिसे करवा कहा जाता था। यह माना जाता था कि शायद अच्छे फसल की कामना से ही व्रत रखने की शुरूआत हुई।
खैर यह तो पहले की बात है। आज पत्नी पति की मंगल कामना के लिए व्रत रखती है। यह त्यौहार सुहागिन और ऐसी लड़कियां भी मनाती हैं जिनकी शादी तय हो गई हो। आजकल करवा चैथ बेहद धूम धाम से मनाया जाता है। बाजार करवा चैथ के लिए प्रयोग में आने वाली वस्तुओं से भर जाती है विशेषकर साडि़यां और गहने। डिजायनर साडि़यां ,डिजायनर सूट और डिजायनर गहने करवा चैथ करने वाली महिलाओं की पहली पसंद होती है। कहीं कहीं देखा जा रहा है कि पति पत्नी के लिए करवा चैथ का व्रत रखते हैं। उनका कहना है कि क्या पत्नी को लंबी उम्र की आवश्यकता नहीं है। जब पत्नी पति की लंबी आयु के लिए व्रत कर सकती है तो पति क्यों नहीं। सोच अच्छी है। इस तरह के अनेक बदलाव देखने को मिल रहे हैं लेकिन करवा चैथ हमेशा मनाया जाता था जाता रहेगा।

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