Friday, February 23, 2018
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सभी महीनों में श्रावण मास को सबसे पवित्र माना जाता है। यह सौर वर्ष का पांचवा महीना है। चंद्र पंचांग के अनुसार श्रावण मास , पूर्णिमा के अगले दिन प्रारंभ होता है। पूर्णिमा के दिन दैवीय आकाश श्रावण नक्षत्र ; सत्ताइस में से एक नश्रत्रद्ध के अधीन होता है , इसीलिए इस माह को श्रावण मास कहते हैं। इस मास का हर दिन शिव शंभू की पूजा के लिए पवित्र होता है।

पवित्र श्रावण मास में कई सारे त्यौहार होते हैं जैसे नाग पंचमी, गोवत्स, श्रावणी पूर्णिमा, ऋषि पंचमी, रक्षा बंधन इत्यादि। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तिसगढ़ जैसे उत्तरी राज्यों में दक्षिणी राज्यों से पंद्रह दिन पहले ही श्रावण मास प्रारंभ हो जाता है।
श्रावण मास का महत्व-

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यही वह माह है जब भगवान शिव ने विषपान किया था। अर्थात श्रावण मास में ही अमृत के लिए समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से अनेक वस्तुएं निकलीं जैसे रत्न, गाय, शंख इत्यादि। इन सभी वस्तुओं को देवताओं या दानवों ने रख लिया। इसके बाद समुद्र से भयानक विष हलाहल निकला। सभी देवता और असुर पीछे हट गए क्योंकि हलाहल विष में संपूर्ण ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता थी। तब भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए हलाहल विष को पीने का निश्चय किया। भगवान शिव को विषपान करते हुए उनकी पत्नी ने देख लिया और तुरंत भगवान शिव का गला पकड़ लिया ताकि विष अंदर न जा सके। इसीलिए उनका कंठ नीला पड़ गया और भगवान शिव को नीलकंठ कहा जाने लगा।
विष तो कंठ के नीचे नहीं उतरा परंतु उसका कुछ तो असर होना ही था। महादेव का मस्तिष्क गर्म होने लगा। जिस तरह सृष्टि के लिए हलाहल विष घातक था उसी तरह सृष्टि के लिए महादेव के मस्तिष्क का गर्म होना भी घातक सिद्ध हो सकता था। देवता घबरा गए। समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें। अंत में उन्होने महादेव के मस्तिष्क पर पानी डालना प्रारंभ किया। इससे महादेव को कुछ राहत तो मिली। पानी के अलावा उनके मस्तिष्क पर बेल के पत्ते भी रखे गए क्योंकि बेल की तासीर ठंडी होती है। इसीलिए हम भोले बाबा की पूजा जल और बेलपत्र से करते हैं।
चूंकि श्रावण मास भगवान शिव को सम्र्पित है, आप भोले बाब को प्रसन्न करने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं जैसे रूद्राभिषेक एवं होम, मंत्रों का पाठ, सोमवार का व्रत इत्यादि। रूद्राभिषेक एवं होम से आपके शरीर की शुद्वि होती है, शांति मिलती है, इच्छाएं पूर्ण होती है तथा आत्मा जागृत होती है।
आप रूद्राक्ष की माला के साथ या मन में शिव मंत्रों का जाप कर सकते हैं। जाप सुबह या शाम को एक सौ आठ बार कर सकते हैं अथवा पूरे दिन मन ही मन मंत्रों का जाप कर सकते हैं जिसे अजप - जप कहते हैं। इस दौरान ऊँ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र, रूद्र गायत्री मंत्र इत्यादि का जाप कर सकते हैं।
शिव पुराण के अनुसार जो श्रावण के सोमवार को व्रत रखते हैं, भोले बाबा के आर्शीवाद से उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। भोले बाबा अल्प से ही संतुष्ट हो जाते हैं। इसीलिए आप व्रत रखते समय अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए जैसे भी हो सके व्रत रखें पूरा दिन, आधा दिन या व्रत का खाना खाकर। भगवान कभी नहीं कहते हैं कि उनकी पूजा करने के लिए मनुष्य अपने को कष्ट देकर कठोर व्रत रखे। भगवान कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी सृष्टि को कष्ट पहुंचे। आप मन में श्रद्वा और भक्ति लेकर जैसे भी श्रावण मास का पालन करेंगे आपको उसका फल अवश्य मिलेगा। आप जितना भी व्रत रखें या मंत्रों का जाप करें यदि मन में श्रद्वा और भक्ति न हो तो कुछ नहीं होगा।

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