Saturday, November 25, 2017
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नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

मां दुर्गा की पूजा अनेक रूपों में होती है। वह शक्ति का रूप हैं। शक्ति के तीन मुख्य रूप श्री महा सरस्वती ,श्री महा लक्ष्मी एवं श्री महाकाली ने देवी के और तीन तीन रूपों की सृष्टि की ।इन नौ रूपों को एक साथ नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है। नवरात्र के नौ दिन देवी के इन्हीं नौ रूपों की पूजा होती है।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

शैलपुत्री- शैलपुत्री का अर्थ है पर्वत की बेटी। शैल का अर्थ है पर्वत और पुत्री का बेटी। पर्वतों के राजा हिमावन की बेटी पार्वती को शैलपुत्री कहा जाता है। नवरात्र में पूजे जाने वाले नौ रूपों में यह पहला है। नवरात्र की पहली रात शैलपुत्री की पूजा को समर्पित है। उनके एक हाथ में त्रिशूल है और दूसरे में कमल का फूल। उनका वाहन बैल है। माना जाता है कि शैलपुत्री ही पूर्व जन्म में सती थीं।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

ब्रहमचारिणी- दुर्गा शक्ति का दूसरा रूप है ब्रहमचारिणी। यहां ब्रहमा का अर्थ है तप। देवी का यह रूप भव्य है। एक हाथ में कमंडल है तो दूसरे में जप की माला। ब्रहमचारिणी बुद्धि और ज्ञान का भंडार हैं। उनके व्यक्तित्व से प्रेम और वफादारी झलकती है। अपने पूर्व जन्म में यह राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में उत्पन्न हुई थीं। भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए इन्होने घोर तपस्या की थी। मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों को अन्नत फल देने वाला कहा गया है। मां ब्रहमचारिणी देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

चन्द्रघंटा- देवी दुर्गा की तृतीय शक्ति का नाम है चन्द्रघंटा। वह कपाल पर अर्ध चंद्र धारण किए हुए हैं। उनका रूप आकर्षणीय और उज्जवल है। उनका रंग सुनहरा है। उनके दस भुजाएं और तीन नेत्र हैं। आठ भुजाओं में अस्त्र शस्त्र और दो आर्शीवाद की मुद्रा में हैं।चन्द्रघंटा का अर्थ है सर्वोच्च आनंद औंर बुद्धि। उनके प्रभाव से चारों तरफ शांति छा जाती है जिस तरह चांदनी रात में चन्द्रमा की रोशनी चारों तरफ छा जाती है। देवी शक्ति के इस रूप का वाहन बाघ है। यू तो इनकी पूजा सर्वत्र होती है परंतु इनकी पूजा मुख्य रूप से तामिल नाडू में की जाती है।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

कूष्मांडा- नवरात्र की चैथी रात को देवी के कूष्मांडा रूप की पूजा होती है। इनके आठ भुजाएं हैं जिनमें वह अस्त्र शस्त्र , जप की माला इत्यादि ली हुई हैं। इनका वाहन भी बाघ है। अंधकारमय पृथ्वी में सृष्टि का प्रकाश इसी देवी की देन है। इसलिए उन्हें सृष्टि की आदि स्वरूपा आदि शक्ति कहा जाता है।उनका निवास स्थान भीमा पर्वत है।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

स्कंद माता- देवी दुर्गा का पांचवा रूप है स्कंद माता। यह सिंह वाहिनी हैं। उनकी गोद में उनके पुत्र स्कंद बैठे दिखते हैं इसलिए उन्हे स्कंद माता कहा जाता है। इनके तीन नेत्र और चार भुजाएं हैं। दो हाथों में कमल का फूल है और दो हाथ आर्शीवाद की मुद्रा में। स्कंद माता की कृपा दृष्टि पाकर कोई महा मूर्ख भी महा ज्ञानी बन सकता है।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

कात्यायनी- नवदुर्गा का छटवां रूप है कात्यायनी देवी। इनकी चार भुजाएं हैं। एक में कमल का फूल, एक में तलवार, और अन्य दो में स्वास्तिक और आर्शीवाद की मुद्रा अंकित है। वह एक तेजस्वी सिंह की सवारी करती हैं। महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने के कारण महर्षि ने उन्हें बेटी के रूप में पाला और उनका नाम कात्यायनी पड़ा। कहा जाता है कि यह असुरों , दानवों का नाश करती हैं। पृथ्वी लोक, पाताल लोक और स्र्वग लोक को शुंभ निशुंभ से इन्होने ही मुक्ति दिलाई थी।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

कालरात्रि- यह देवी का सप्तम रूप है। नवदुर्गा के कालरात्रि रूप का अर्थ है अंधकार का दुश्मन। इनका रंग रूप काला अथवा नीला है। चार भुजाओं की यह देवी विशाल केश राशि के साथ नेत्रों से अग्नि की वर्षा करती हैं। इनका वाहन वफादार गधा है। इनका रूप भयानक होने पर भी फल हमेशा शुभ देती है इसलिए इनका नाम शुभंकरी भी है।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

महा गौरी- देवी दुर्गा का आठवां रूप महा गौरी का रंग श्वेत है। वह शंख, चंद्रमा और बेल फूल की भांति श्वेत रंग की हैं।उत्पत्ति के समय वह आठ वर्ष की थीं इसलिए उन्हें नवरात्र के आठवें दिन पूजा जाता है। इस दिन इन्हें पूजने से यह सदा सुख और शांति देती हैं। यह देवी अक्सर सफेद या हरी साड़ी में दिखती हैं। इनके एक हाथ में डमरू, एक में त्रिशूल और अन्य आर्शीवाद की मुद्रा में हैं।वह बैल की सवारी करती हैं।

नवदुर्गारू मां दुर्गा के नौ रूप

सिद्धिदात्री- नवरात्र का नौंवा दिन यानि अंतिम दिन देवी के सिद्धिदात्री रूप को समर्पित है। नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ, सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। देवी सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं। एक में चक्र, एक में गदा, एक में शंख और एक में कमल का फूल है। उनका वाहन सिंह है और वह कमल के फूल पर विराजती हैं।

 

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