Monday, November 20, 2017
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navratra history

नवरात्र का त्यौहार देवी दुर्गा को समर्पित है। यह त्यौहार हिंदुओं का एक बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है, जो नौ दिनों तक चलता है और सम्पूर्ण भारतवर्ष में हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है। इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के इतिहास के बारे में हमें हिंदू धर्म ग्रंथों से जानकारी मिलती है।



आइए नवरात्र के इतिहास के बारे में कुछ जानने की कोशिश करते हैं।

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उत्तर भारत. उत्तर भारत में नवरात्र की प्रचलित कथा के अनुसार महिषासुर नामक असुर ने भगवान शिव की पूजा की और उनसे शक्तियां प्राप्त करके निर्दोष मनुष्यों को मारना और परेशान करना प्रारंभ कर दिया एवं तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने हेतु निकल पड़ा। स्वर्गलोक में बैठे देवता घबरा गए और भगवान शिव के पास सुरक्षा की गुहार लेकर पहुंचे। संसार को महिषासुर के अत्याचारों से बचाने के लिए ब्रहमा, विष्णु एवं शिव ने अपनी शक्तियों को एकत्रित करके एक नारी योद्धा की सृष्टि की, जिन्हें हम देवी दुर्गा के नाम से जानते हैं। महिषासुर ने जब देवी दुर्गा को देखा तो उनकी दैवीय सुंदरता पर मोहित हो गया।
महिषासुर देवी दुर्गा की सुंदरता पर इतना मोहित हो गया था कि वह देवी के समक्ष विवह का प्रस्ताव लेकर पहुंच गया। देवी विवाह के लिए मान गईं परंतु उन्होंने उसके सामने एक शर्त रखी दृ महिषासुर को देवी को युद्ध में जीतना होगा। घमंडी महिषासुर ने तुरंत शर्त मान ली। युद्ध नौ रात तक चलता रहा और नौंवी रात्रि के अंत में देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। इस तरह नौ रातों को नवरात्र और दसवें दिन को विजया दशमी कहते हैं।

पूर्वी भारत. इस क्षेत्र में प्रचलित कथा के अनुसार, हिमालय के राजा दक्ष की उमा नामक एक सुंदर और सुशील कन्या थी। बचपन से ही वह भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी। भगवान शिव को पाने के लिए उसने कड़ी तपस्या की और अंत में शिव प्रसन्न भी हुए। जब भगवान शिव उमा से विवाह करने के लिए आए तो बाघ की छाल पहने दामाद को देखकर दक्ष बेहद अप्रसन्न हुंए और बेटी दामाद के साथ सारे रिश्ते तोड़ दिए। एक दिन दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया परंतु भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। पिता के इस व्यवहार से उमा क्रोधित हो गईं और यज्ञ की अग्नि कुंड में कूदकर जान देने का फैसला किया। तब से उन्हे सती के नाम से जाना जाता है।
उनका पुर्नजन्म हुआ, इस जन्म में भी उन्होने भगवान शिव को पति के रूप में पाया। परंतु इस बार शांति रही। माना जाता है कि तभी से उमा यानि देवी दुर्गा प्रति वर्ष अपने पुत्र गणेश एवं कार्तिक, पुत्री सरस्वती एवं लक्ष्मी के साथ नवरात्र के दौरान पिता के घर आती हैं।

राम और रावण से जुड़ी कथा . नवरात्र की एक अन्य कथा हिंदू धर्म ग्रंथ रामायण से संबंधित है। इसके अनुसार भगवान राम ने देवी दुर्गा की नौ दिनों तक नौ रूपों में पूजा की ताकि रावण को मारने के लिए उन्हें शक्ति मिल सके। असुर राजा रावण ने भगवान राम की पत्नी सीता का हरण कर लिया था और राम सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाना चाहते थे। इन नौ रातों को नवरात्र कहा जाता है और दसवें दिन को विजयादशमी या दशहरा। इसी दिन राम ने रावण का वध किया था अर्थात बुराई पर अच्छाई की विजय।

 

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