Monday, November 20, 2017
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नवरात्र का अर्थ है नौ रातों तक नौ रूपों में देवी दुर्गा की अराधना। भारत के सभी राज्यों में अलग अलग तरीकों से इसे मनाया जाता है। यह त्योहार प्रधानत: महिलाओं से संबंधित है। इस समय नौ दिनों तक महिलाएं व्रत रखती हैं।घर पर व्रत का खाना बनता है और सभी इसका आनंद उठाते हैं। दुकानों में वत्र के दौरान खाए जाने वाले खाध पदार्थों की भरमार होती है। सजे धजे मंदिरों में पूजा ,भजन,कीर्तन ,जगराता होता है। कुल मिलाकर हर शहर का वातावरण उत्सव के रंग में रंगा होता है।हां पूजा के रस्मों में अंतर है-  


तामिल नाडू
दक्षिण के इस राज्य में नवरात्र का त्यौहार अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। नवरात्र की नौ रातें देवी दुर्गा,देवी लक्ष्मी एवं देवी सरस्वती को समर्पित हैं।अययर समुदाय की महिलाएं शाम को सुहागिनों को अपने घर पर बुलाती हैं तथा सुहाग की निशानियां जैसे चूड़ी ,कान की बाली आदि उपहार में देती हैं। एक नारियल , पान ,सुपारी एवं रूपये भी इन महिलाओं को दिये जाते हैं। मसूर और अन्य दालों से बने विशेष व्यंजन आमंति्रतों के लिए प्रतिदिन बनता है। कुछ लोग घर में गोलू बनाते हैं।गोलू में अस्थाई रूप से नौ सीढ़ी बनाई जाती है जिस पर सजावटी सामान , देव देवी की मूर्तियां रखी जाती हैं। यह मूर्तियां पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती हैं।
आंध्र प्रदेश
यहां नवरात्र के दौरान विशेषकर तेलेंगाना क्षेत्र में बटुकम्मा पान्डुगा मनाया जाता है।इसका अर्थ देवी मां का आहवान करना है। महिलाएं बटुकम्मा तैयार करती हैं। इसमें मौसमी फूलों की सात परतें होती हैं। यह देखने में फूलों का फूलदान जैसा लगता है। तेलगू में बटुक का अर्थ है जीवन और अम्मा का अर्थ है मां।इस दौरान महिलाएं सोने के जेवर और सिल्क की साड़ी पहनती हैं। बटुकम्मा बनाने के बाद महिलाएं शाम को रस्म निभाती हैं। बटुकम्मा को बीच में रखकर देवी शकित को समर्पित गीतों पर नृत्य करती हैं। इसके बाद बटुकम्मा का विसर्जन पानी में कर दिया जाता है।
केरल
यहां अनितम तीन दिन ही नवरात्र मनाई जाती है अष्टमी ,नवमी एवं विजया दशमी। केरल में शिक्षा प्रारंभ करने के लिए इन तीन दिनों को शुभ माना जाता है। अष्टमी के रोज किताबें और वाध यंत्र देवी सरस्वती के सामने रखकर उसकी पूजा का जाती है। ऐसा ही बसंत पंचमी के दिन पशिचम बंगाल में होता है।दशमी के दिन किताबों को निकालकर पढ़ा जाता है।
कनार्टक
इस राज्य में नवरात्र मनाने की परंपरा बहुत पुरानी है।सन 1610 ई.में राजा वाडयार के समय से यह त्यौहार मनाया जाता है। विजयनगर साम्राज्य में जिस तरह से नवरात्र मनाई जाती थी आज भी यहां के लोग उसी तरह से इसे मनाते हैं। अधिकांश स्थानों की तरह यहां भी नवरात्र मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में मनाई जाती है।महिषासुर मैसूर का निवासी था। मैसूर का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है। यहां सड़क पर सजे धजे हाथियों का जुलूस निकलता है।इसके अलावा प्रदर्शनी और मेले तो आम बात है।
गुजरात
यहां धरती पर जीवन का स्रोत मां के गर्भ का प्रतीक मिटटी का कलश नवरात्र का मुख्य आकर्षण है। कलश में पानी ,सुपारी एवं चांदी का सिक्का डाला जाता है। सबसे ऊपर एक नारियल रखते हैं। महिलाएं इसके चारों ओर नृत्य करती हैं। इसे ही गरबा कहते हैं। डांडिया रास भी गुजरात में नवरात्र का आकर्षण है।
महाराष्ट्र
यहां के निवासियों क लिए नवरात्र नई शुरूआत करने का समय है जैसे नया घर ,नया वाहन इत्यादि खरीदना। महिलाएं एक दूसरे को अपने घर पर आमंति्रत करते हैं और उन्हें नारियल ,पान ,सुपारी भेंट करते हैं। सुहागिनें एक दूसरे के माथे पर हल्दी-कुमकुम लगाती हैं।महाराष्ट्र विशेषकर मुम्बई में नवरात्र गुजरात जैसा ही मनाया जाता है। प्रत्येक इलाके में गरबा और डांडिया खेला जाता है और सभी इसका भपूर मजा लेते हैं।
हिमाचल प्रदेश
यहां का नवरात्र अनोखा है। नवरात्र में यहां के लोग रिश्तेदारों के साथ मिलकर पूजा करते हैं। अन्य राज्यों में जब यह पर्व खत्म होता है तब यहां कुल्लू दशहरा प्रारम्भ होता है। यह भारतवर्ष की शान है। लोग भकित को व्यक्त करने के लिए नाचते गाते हैं।दशमी के दिन मनिदर की मूर्तियों का जुलूस निकाला जाता है।
पंजाब
यहां के निवासी पहले सात दिन व्रत रखते हैं। यहां जगराता भी होता है। जगराता का अर्थ है पूरी रात जागकर देवी के भजन गाना। अष्टमी के दिन व्रत तोड़ने के लिए नौ कुमारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है जिसे भंडारा कहते हैं। भंडारे में पूरी ,हल्वा और चना खिलाया जाता है।कन्याओं को लाल चुनरी उपहार में दी जाती है।इन कन्याओं को कनिजका कहते हैं।नवतरात्र पूरे देश में मनाई जाती है।मनाने की विधि में अंतर है। परंतु पूजा हर जगह पर देवी के शकित रूप की ही होती है और लोगों का जोश ,उमंग और उल्लास भी एक जैसा ही होता है।

 

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