Thursday, November 23, 2017
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राशि के अनुरूप करें खरीददारी दान और पूजन

पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ एवं बलवान होने के कारण नक्षत्र राज कहलाता है। विवाह को छोड़कर सभी मांगलिक शुभ कार्यों में पुष्य नक्षत्र का महत्व है। शास्त्रों में पुष्य को सौ दोषों को दूर करने वाला, शुभ कार्य उददेश्यों में निशिचत सफलता प्रदान करने वाला एवं बहुमूल्य वस्तुओं की खरीददारी हेतु सबसे श्रेष्ठ एवं शुभ फलदायी माना गया है।

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार दिनांक 5 नवम्बर 2012, कार्तिक कृष्ण पक्ष षष्ठी, सोमवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संचरण सायं 4 बजकर 24 मिनट से प्रारम्भ होगा जो कि दिनांक 6 नवम्बर 2012, कार्तिक कृष्ण पक्ष सप्तमी, मंगलवार सायं 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ग्रह सिथति अनुसार दीपावली से पहले पड़ने वाला यह पुष्य नक्षत्र खरीददारी के लिए धनतेरस के समान फलदायक है। ऐसा माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र के दिन किए गए हर शुभ कार्य का परिणाम कई गुना हो जाता है, इसी तरह इस दिन किया गया दान अक्षत हो जाता है और इस दिन खरीदी गई वस्तुए भी अक्षत रहेगी। पुष्य नक्षत्र संचरण के समय चंæमा अपनी स्वराशि कर्क राशि में होने के कारण विशेष बलवान होता है। वर्तमान में मंगल अपनी स्वराशि वृशिचक मे चल रहे हैं तथा शनि उच्च तुला राशि में विराजमान हैं। ग्रह नक्षत्रम संचालिका ज्योतिर्विद गुंजन वाष्र्णेय के अनुसार जिन लग्नों से मंगल स्वराशि का होकर केन्द्र में होगा उन लग्नों में सर्वश्रेष्ठ पंचमहापुरुष राजयोग में रूचक योग का निर्माण होगा, साथ ही मंगल पष्य होने से यह धन वृद्धि का योग बना रहा है। मंगल-पुष्य नक्षत्र योग में व्यापार के लिए नए खाता बही, नए वाहन, जमीन जायदाद के सौदे, गहने, मशीनरी, इलेक्ट्रानिक्स समान खरीदना शुभ रहेगा। भूमि पर मंगल का आधिपत्य है, अत: मंगल पुष्य में खरीदी गई जमीन व्यकित विशेष के लिए विशेष फलदायी होती है। इस संयोग में मंत्रों से संबंधित कोई भी उपासना करने से उसका सौ गुना अधिक फल मिलता है। ग्रह नक्षत्रम एन पी आर्केड के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार प्रत्येक राशि के जातकों को पुष्य नक्षत्र संयोग का लाभ खरीददारी, दान एवं पूजन कर अवश्य लेना चाहिए।

 


1. मंगल के स्वामित्व की राशि यानी मेष और वृशिचक के लोग राशि स्वामी मंगल का रत्न इस मंगल-पुष्य योग में मूंगा धारण करें, विशेष लाभदायक रहेगा। मंगल से संबंधित वस्तुएँ खरीद कर उनका दान करें। हनुमान जी का पूजन करें, स्वर्ण धातु अथवा ताम्बे से निर्मित वस्तुओं का क्रय विशेष लाभदायक रहेगा।

2. शुक्र के स्वामित्व की राशि (वृष और तुला) के लोग चाँदी की वस्तु अवश्य खरीदे और पहने। शुक्र यदि कमजोर है तो माँ दुर्गा की विशेष आराधना संध्या के समय करें और कन्याओं को सफेद वस्तु या खीर दान करें। दुर्गा के मंत्र का जाप करे, गणेश जी का ध्यान करे।

3. बुध के स्वामित्व की राशियों (मिथुन और कन्या) के लोग इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा करे, ताँबा या पीतल अवश्य खरीदे और शनि की वस्तुओं का दान अवश्य करे। किसी अपाहिज या कुष्ठ रोगी को भोजन दें।

4. कर्क राशि के लिए यह दिन खास है क्योंकि चन्द्र स्वराशिस्थ है और पुष्य नक्षत्र का संयोग है। इस समय का भरपूर फायदा उठाना चाहिए। चाँदी का क्रय और दान दोनों करें (कुंडली में चन्द्र के बलाबल के अनुरूप), चंद्र देव के मंत्रों का जाप करे, सफेद वस्तुओं का दान करें।

5. सिंह राशि के लोग सोने या पीतल की वस्तु खरीदे। गेहूँ-ज्वार या वस्त्र का दान करे, सूर्य दर्शन एवं पूजन करें और किसी ब्राह्राण को भोजन कराएँ। आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी होगा।

6. गुरु के स्वामित्व की राशि (धनु और मीन) के लोग पुष्य नक्षत्र में गुरू पूजन कर गुरू का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें अथवा मंदिर अवश्य जाएँ। अन्न या पीले फल का वहाँ दान करे, सोना या पीतल खरीदे, वस्त्र भी खरीद सकते है। 

7. शनि के स्वामित्व की राशि (मकर और कुम्भ) के लोग पुष्य नक्षत्र संयोग में तेल, काले तिल और उड़द का दान करें। सारे घर की या घर के किसी कोने की सफाई स्वयं करें, घी का दीपक जलाकर ही पूजा करें. महादेव की आराधना भी शुभ होगी।

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय

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