Monday, November 20, 2017
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 ganesh-laxmi

जब किसी व्यक्ति  के पास लक्ष्मी के रूप में अपार धन-दौलत-समृद्धि आ जाती है, तो वह उस धन-समृद्धि के अहंकार के कारण अपने बुद्धि-विवेक को खो बैठता है। ऐसे समय में धन का सदुपयोग, सुरक्षा एवं निवेश के लिए सही विवेक एवं बुद्धि का होना परम आवश्यक है। बिना बुद्धि के धन, दौलत व्यर्थ है। लक्ष्मी का स्थायित्व केवल बुद्धि के द्वारा ही किया जा सकता है। गणेश जी विधा, बुद्धि (विवेक) के देवता हैं। प्रत्येक मंगलकार्य के आरम्भ में भगवान गणेश की पूजा होती है, क्योंकि वे सर्वस्वरूप ब्रह्रा स्वरूप हैं व विघ्नों को नष्ट करने वाले मंगलमूर्ति हैं। लक्ष्मी के आगमन के पश्चात व्यक्ति अपनी बुद्धि विवेक न खो दे इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा लक्ष्मी तथा बुद्धि की एक साथ  प्राप्ति के लिए की जाती है। 

पौराणिक कथाओं के अनुसार लक्ष्मी का निवास क्षीर-सागर में शेषनाग की शैया पर लेटे हुए भगवान विष्णु के श्री चरणों के निकट है। लक्ष्मी के होने से ही भगवान विष्णु ' लक्ष्मी नारायण कहलाते हैं। विष्णु प्रिया लक्ष्मी, भगवान विष्णु की पत्नी हैं, फिर भी दीपावली के पर्व पर लक्ष्मी के साथ गणेश जी का पूजन होता है। दीपावली धन, समृद्धि एवं ऐश्वर्य का पर्व है तथा धन की देवी लक्ष्मी हैं। जब किसी व्यक्ति के पास लक्ष्मी के रूप में अपार धन-दौलत-समृद्धि आ जाती है, तो वह उस धन-समृद्धि के अहंकार के कारण अपने बुद्धि-विवेक को खो बैठता है। ऐसे समय में धन का सदुपयोग, सुरक्षा एवं निवेश के लिए सही विवेक एवं बुद्धि का होना परम आवश्यक है। बिना बुद्धि के धन, दौलत व्यर्थ है। लक्ष्मी का स्थायित्व केवल बुद्धि के द्वारा ही किया जा सकता है। गणेश जी विधना, बुद्धि (विवेक) के देवता हैं। प्रत्येक मंगलकार्य के आरम्भ में भगवान गणेश की पूजा होती है, क्योंकि वे सर्वस्वरूप ब्रह्रा स्वरूप हैं व विघ्नों को नष्ट करने वाले मंगलमूर्ति हैं। लक्ष्मी के आगमन के पश्चात व्यक्ति अपनी बुद्धि विवेक न खो दे इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा लक्ष्मी तथा बुद्धि की एक साथ प्राप्ति के लिए की जाती है। लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा के संबंध में कई किंवदंतियाँ प्रचलित हैं, एक प्रसिद्ध दंत कथानुसार एक बार एक साधु सन्यासी को धन-समृद्धि-ऐश्वर्य भोगने की प्रबल इच्छा हुई। उसने देवी लक्ष्मी को कठोर तपस्या द्वारा प्रसन्न कर राजसी ठाठ-बाट से जीवन व्यतीत करने की इच्छा प्रकट की। देवी लक्ष्मी उसे य थोचित वरदान देकर अंतर्ध्यान हो गईं। वरदान प्राप्ति के बाद वह साधु सीधे राजा के दरबार पहुँचा और लक्ष्मी के वरदान के अभिमान में उसने सीधे राजा के पास जाकर उसे थप्पड़ मारकर उसका राजमुकुट नीचे गिरा दिया। जब राजा तथा उसके मंत्री क्रोध से साधु को मारने के लिए लपके, तभी उसी समय उन्होंने राजा के मुकुट से एक काले नाग को निकलकर भागते देखा। राजा ने उस काले नाग से अपनी जान बचाने के पुरस्कार में साधु को अपना मंत्री बना लिया। साधु महाराज, देवी लक्ष्मी की कृपा से राजा के यहाँ मंत्री बनकर ठाठ-बाट से रहने लगे। एक दिन साधु ने अचानक भरी सभा में राजा को खींचकर बाहर ढकेल दिया। यह देख सभी राज दरबारी राजा के पीछे-पीछे राजमहल से बाहर की ओर दौड़ पड़े तभी उसी समय भूकम्प के कारण राजमहल की दीवारें ढह गईं। अब तो राजा तथा सभी दरबारी साधु पर पूर्ण आस्था रखने लगे तथा सन्यासी के परामर्श के अनुसार ही सारा राज-काज चलने लगा। बस फिर क्या था? साधु को घोर अभिमान एवं घमंड हो गया। वह अपने आप को बहुत बड़ा विद्वान समझने लगा। इसी अभिमान में उसने राजमहल के अंदर लगी एक गणेश जी की मूर्ति, वहाँ से यह कहकर हटवा दिया कि वह मूर्ति राजमहल की शोभा को बिगाड़ रही है। गणेश जी बुद्धि के देवता हैं। जिस दिन उस साधु मंत्री ने गणेश जी की मूर्ति हटवाई, उसी दिन से उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गर्ई तथा उसकी समस्त भविष्यवाणियाँ गलत होने लगीं। एक बार उसने भरी राजसभा में राजा से अपनी पोशाक उतार फेंकने को कहा क्योंकि उसके अनुसार उसमें नाग था। राजा ने साधु पर विश्वास कर सभी दरबारियों के सामने अपने समस्त वस्त्रों को उतार दिया लेकिन पोशाक में कोई नाग नहीं निकला तो राजा ने समस्त राजसभी के सामने निर्वस्त्र होने के अपमान में साधु मंत्री को जेल में डलवा दिया। जेल में साधु ने पुन: लक्ष्मी जी की आराधना की। लक्ष्मी ने स्वप्न में दर्शन देकर उसे बताया कि तुम्हारी दुर्दशा गणेश जी के अपमान करने के कारण हुई है। साधु ने पश्चाताप हेतु जेल में ही सच्चे मन से श्री गणेश की आराधन की तथा उनसे क्षमा माँगी। गणेश जी ने प्रसन्न होकर राजा को सपने में साधु को क्षमा करने को कहा। राजा ने साधु को पुन: अपना मंत्री पद संभालने से पहले गणेश जी की मूर्ति को पूर्व स्थान पर स्थापित करवाकर उनके साथ-साथ लक्ष्मी जी की पूजा शुरू की ताकि धन एवं बुद्धि दोनों साथ-साथ रहें। इसी प्रकार उसी समय से आज तक दीपावली पर लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा होती आ रही है। 

Comments 

 
#1 navdeep 2012-11-08 21:21
this is also good and intersting
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