Monday, November 20, 2017
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deepawali-pooja

इस वर्ष दीपावली का पंचदिवसात्मक महापर्व 11 नवम्बर से 15 नवम्बर तक मनाया जाएगा। इस महापर्व का शुभारंभ 11 नवम्बर रविवार को धंत्रयोदशी के पर्व से होगा, 12 नवम्बर, सोमवार को नरक चतुर्दशी (रूप चतुर्दशी) अर्थात छोटी दीपावली मनेगी, अगले दिन 13 नवम्बर को दीपावली मनाई जाएगी, 14 नवम्बर के दिन गोवर्धन पूजा तथा अन्नकूट ए वं 15 नवम्बर को भाईदूज अर्थात यमद्वितीया का पर्व मनाया जाएगा। ग्रह नक्षत्र ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार मंगलवार की दीपावली मंत्र-जाप, सिद्धि एवं तांत्रिक प्रयोगों के लिए विशेष रूप से ग्राह्रा मानी जाती है। 

 

पहला दिन
धनत्रयोदशी (11 नवम्बर 2012) - पंचपर्व का प्रथम दिन धनत्रयोदशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन धनवन्तरि पूजन, बर्तन-आभूषण आदि का क्रय, यम दीपदान, कुबेर पूजन इत्यादि कार्य सम्पन्न किए जाते हैं। इस वर्ष रविवार प्रात: 10:18 से कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी का संचरण हो रहा है, खरीददारी के लिए शुभ समय चर लग्न दोपहर 11:21 से 1:08 तक, 4:07 से 5:44 तक, रात 9:54 से 12:12 तक।
सिथर लग्न दोपहर 1:09 से 2:39 तक, शाम 5:45 से 7:40 तक
अभिजीत मुहूर्त 11: 30 से 12:30 तक

दूसरा दिन
रूप चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) (12नवम्बर 2012) - पंचपर्व का दूसरा दिन नरकचतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन उबटन से स्नान, यम तर्पण, दीपदान तथा हनुमान जी की पूजा की जाती है। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का संचरण इस वर्ष प्रात: 8:35 से हो रहा है।

तीसरा दिन
दीपावली (13 नवम्बर 2012) - ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय के अनुसार सिथर लग्न वृषभ और सिंह में पूजन करने से लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। इस वर्ष कार्तिक क्रेष्ण पक्ष अमावस्या, मंगलवार की दीपावली मंत्र, जप सिद्धि आदि के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। दीपावली पूजन का मुख्य समय प्रदोषकाल माना जाता है जिसमें वृष लग्न की प्रधानता होती है। अत: इस दिन वृष लग्न सायं 05:37 से रात्रि 07:33 तक है जो दीपावली पूजन के लिए उत्तम समय है। उसके पश्चात अद्र्धरात्रि में सिंह लग्न रात्रि 12:05 से रात्रि 2:19 तक सिथर लग्न मुहूर्त है।

चौथा दिन
गोवर्धन पूजा (14 नवम्बर 2012) - पंचपर्व का चौथा दिन गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन चित्रगुप्त एवं विश्ववकर्मा जी की पूजा भी की जाती है।

पांचवा दिन
भाईदूज (15 नवम्बर 2012) - पंचपर्व का पांचवा दिन भार्इदूज एवं यमद्वितीया के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यमुना में स्नान, दीपदान आदि का महत्व है। इस दिन बहनें, भाइयों के दीर्घजीवन के लिए यम की पूजा करती हैं। जो भाई इस दिन अपनी बहन से स्नेह और प्रसन्नता से मिलता है, उसके घर भोजन करता है, उसे यम के भय से मुक्ति मिलती है।

Comments 

 
#1 navdeep 2012-11-08 21:18
thanks to activeindiatv team for list of all deepawali festival and timinigs and also regards and thanks to reknown astrologer ashutosh ji
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