Monday, November 20, 2017
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 asht laxmi

मां लक्ष्मी के अष्ट स्वरूप

धन प्राप्ति के लिए अधिकांश लोग लक्ष्मी की आराधना करते हैं लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपकी मन की मुराद शीघ्र पूरी हो, तो आप अपने कार्य से सम्बनिधत देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए ताकि कम समय में ही मनोवांछित फल प्राप्त हो सके, जैसे वाहन की कामना करने वालों को शीघ्र वाहन सुख मिलने के लिए वाहन लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए, समाज में यश-कीर्ति चाहने वालों को यश लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।


लक्ष्मी का अर्थ मात्र धन या मुद्रा से ही नहीं है, बलिक जीवन में सुख-समृद्धि से भी है जिसकी पूजा-अर्चना से व्यकित को अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों पुरूषार्थ मिलते हैं। ग्रह नक्षत्रम सिविल लाइन्स एन पी आर्केड के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय बताते हैं कि लक्ष्मी के साथ सुख-सुविधा, ऐश्वर्य, यश-कीर्ति प्राप्ति हेतु शास्त्रों में बताए गए लक्ष्मी के आठ रूपों का पूजन किया जाए, तो व्यकित की हर मनोकामना परिपूर्ण होती है।

 

1. धन लक्ष्मी - लक्ष्मी के इस रूप की साधना करने से लगातार धन की प्राप्ति होती है। 
2. यश लक्ष्मी - लक्ष्मी के इस रूप की पूजा करने से समाज में यश, प्रसिद्धि, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
3. आयु लक्ष्मी - मां लक्ष्मी के इस रूप की पूजा करने से व्यकित को दीर्घायु एवं अच्छा स्वास्थ प्राप्त होता है, निरोगी शरीर एवं सुन्दर काया की चाहत वालों को आयु लक्ष्मी की उपासना अवश्य करनी चाहिए।
4. वाहन लक्ष्मी - जिन व्यकितयों को वाहन सुख नहीं प्राप्त है, उन्हें वाहन सुख एवं सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु वाहन लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए।
5. सिथर लक्ष्मी - घर में धन-सम्पदा, वैभव सदैव बना रहे, इसके लिए सिथर लग्न में सिथर लक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए।
6. गृह लक्ष्मी - लक्ष्मी के इस रूप की पूजा करने से व्यकित को सर्वगुण सम्पन्न पत्नी की प्राप्ति होती है।
7. संतान लक्ष्मी - लक्ष्मी के स्वरूप की आराधना करने से माता-पिता एवं सभी को सुख देने वाली सुबुद्धि संतान की प्राप्ति होती है।
8. भवन लक्ष्मी - यदि आपके पास रहने के लिए खुद का मकान नहीं है, तो आपको सच्चे मन से भवन लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए, भवन लक्ष्मी की कृपा हो, तो जल्दी ही आप सुन्दर भवन के मालिक बन सकते हैं।

लक्ष्मी पूजन के समय राशि अनुसार एवं जन्म लग्न को दृषिटगोचर रखते हुए अष्टलक्ष्मी के निम्न मंत्र का ध्यान-पूजन, अर्चन, जप किया जाना हितकर रहेगा।

राशि मंत्र मंत्र राशि अनुसार

मेष  -         ओम आध लक्ष्म्यै नम: ओम ऐं क्लीं सो:
वृष   -         ओम विधा लक्ष्म्यै नम: ओम ऐं क्लीं श्रीं
मिथुन  -    ओम काम लक्ष्म्यै नम: ओम क्लीं ऐं सो:
कर्क  -        ओम सौभाग्य लक्ष्म्यै नम: ओम ऐं क्लीं श्रीं
सिंह  -        ओम भोग लक्ष्म्यै नम: ओम हरीं श्रीं सो:
कन्या -      ओम काम लक्ष्म्यै नम: ओम श्रीं ऐं सो:
तुला  -       ओम विधा लक्ष्म्यै नम: ओम हरीं क्लीं श्रीं
वृशिचक -  ओम आध लक्ष्म्यै नम: ओम ऐं क्लीं सो:
धनु  -        ओम सत्य लक्ष्म्यै नम: ओम हरीं कलीं सो:
मकर  -     ओम योग लक्ष्म्यै नम: ओम ऐं क्लीं हरीं श्रीं सो:
कुम्भ -      ओम योग लक्ष्म्यै नम: ओम हरीं ऐं क्लीं श्री
मीन -        ओम सत्य लक्ष्म्यै नम: ओम हरीं क्लीं सो:

 

 

 

 

 

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