Monday, November 20, 2017
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 holika dahan

मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार भद्रा में होलिका दहन अथवा शुभ कार्य का निषेध माना गया है, सर्पिणी-रूपिणी भद्रा के मुख में विष होने के कारण उसे विषाक्त मानकर समस्त शुभ कार्यों में इसका निषेध किया गया है। विशेष परिसिथतियों में होलिका दहन भद्रा पुच्छ में करने का निर्देश धर्मशास्त्रों में प्राप्त होता है, भद्रा विषयुक्त सर्पिणी है लेकिन भद्रा पुच्छ को विषविहीन माना गया है, इसलिए आवश्यकता अनुसार भद्रा पुच्छकाल में होलिका दहन किया जा सकता है।

ज्योतिषीय दृषिटकोण से होलिका दहन भद्रा रहित मुहूर्त में करने का विधान है लेकिन इस बार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से प्रारम्भ होकर अगले दिन दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक ही रहेगी। भद्रा का संचार मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से अगले दिन भोर में 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसी असामंजस्य की सिथति में धर्मसिंधु और निर्णयसिन्धु के शास्त्रीय निर्देशानुसार भद्रापुच्छ में होलिका दहन किया जाना चाहिए। भद्रापुच्छ रात्रि 11 बजकर 25 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक है। प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा को होलिका दहन होता है, बुधवार तारीख 27 मार्च को प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा नहीं मिल रही है, अत: होलिका दहन 26 मार्च को होलिका पूजन, उपायों द्वारा सम्पन्न होगा। वृशिचक लग्न में होलिका दहन, पंचम भाव में उच्च राशि का शुक्र, सूर्य एवं मंगल के साथ, कन्या राशि में सिथत चन्द्रमा, उच्च राशि में सिथत शनि एवं अन्य ग्रह योग होली पर्व पर सित्रयों के प्रति हिंसा में कमी आने के संकेत दे रहे हैं।

होलिका दहन पूजन विधि - प्रत्येक शहर का स्थानीय होलिका दहन मुहूर्त जानकर होलिका दहन के समय फल-फूल, जल, मोली, गुलाल तथा गुड़ आदि से होलिका का पूजन करना चाहिए। होलिका की अगिन में पूजन सामग्री डालते समय अथवा बाली भूनते समय मुंह पूर्व या उतर दिशा की ओर ही होना चाहिए। लोक परम्परा अनुसार गोबर से बनाई गई ढाल व खिलौनों की चार मालाएं अलग से घर लाकर सुरक्षित रख ली जाती है। इसमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमान जी के नाम की, तीसरी शीतला माता के नाम की तथा चौथी अपने घर-परिवार के नाम की होती है। कच्चे सूत को होलिका के चारों और तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना चाहिए, फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित करना चाहिए। अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए नवग्रहों की लकड़ी मंत्रोच्चारण कर होलिका में अर्पण करनी चाहिए। होलिका दहन के दौरान गेहूं की बाल को इसमें सेंकना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन के समय बाली सेंककर घर में फैलाने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। पूजन के बाद जल से अघ्र्य देना चाहिए। होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए,

अहकूटा भयत्रस्तै: ता त्वं होलि बालिशै:

अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।।

इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच माला विषम संख्या के रुप में करना चाहिए।

 

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