Saturday, November 25, 2017
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april fool
कल पहली अप्रैल है। अप्रैल महीने की पहली तारीख। हर महीने में पहली तारीख आती है लेकिन अप्रैल महीने की पहली तारीख की बात ही कुछ और है। इस दिन को अप्रैल फूलस डे कहते हैं। इस दिन हम किसी न किसी को फूल यानी बुद्धू बनाने की कोशिश करते हैं। दिन भर सोचते हैं कि कहीं मुझे कोई अप्रैल फूल न बना दे। कभी बन जाते हैं तो किसी साल बच जाते हैं। हंसी मजाक में यह दिन गुजार देते हैं। कोई और दिन लोगों को बेवकूफ बनाया जाए तो लोग बिगड़ जाते हैं परंतु पहली अप्रैल यानि अप्रैल फूलस डे को कोई बुरा भी नहीं मानता। इसे आल फूलस डे भी कहते हैं।पहली अप्रैल को ही अप्रैल फूलस डे क्यों होता है।

हालंकि इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं मिलता। लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी यह कहानी जुबानी चली आ रही है। प्राचीन सभ्यताएं नया साल 25 मार्च से 1 अप्रैल तक मनाती थी। तब के कैलेंडर के अनुसार 1 अप्रैल को नया साल होता था। मध्य युग के दौरान यूरोप के अधिकांश भाग में यही परंपरा थी। फ्रांस में तो सप्ताह भर खुशियां मनाई जाती थी , भोज होता था जो 1 अप्रैल को खत्म होता था।

सन 1582 के लगभग पोप ग्रेगरी 12वें ने पुराने जुलियन कैलेंडर के स्थान पर नए ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाने का आदेश दिया। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार नया साल 1 अप्रैल के स्थान पर 1 जनवरी को होता था।

उसी वर्ष फ्रांस ने नए कैलेंडर को अपनाया और नया साल 1 जनवरी को मनाना प्रारंभ किया। लेकिन उस समय का सूचना तंत्र आज जैसा नहीं था। आज एसएमएस के जरिये झट से खबर फैल जाती है। तब खबर लोगों के जरिये फैलती थी यानि मुंह जबानी। तब एक खबर फैलने में वषोर्ं लग जाते थे।

इस खबर को भी फैलने में समय लग रहा था। कुछ लोग इस बदलाव को मानने से इंकार कर रहे थे तो कुछ लोगों को पता ही नहीं था। वह सब लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। दूसरों को नये साल की शुभकामनाएं देते थे। दोस्तों को नए साल के जश्न का निमंत्रण भेजते रहे। तब जिन्हें मालूम हो गया था कि नया साल 1 जनवरी को होता है वह उन लोगों को ; जो 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते थे द्ध अप्रैल फूल कहने लगे। काफी समय लगा सब लोगों को गे्रगोरियन कैलेंडर मानने में लेकिन 1 अप्रैल का दिन अप्रैल फूल एक परंपरा बनकर रह गया। अप्रैल फूल यूरोप से होते हुए पूरी दुनिया में फैल गया।

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