Monday, November 20, 2017
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maa durga
बसंत नवरात्र का पर्व हिन्दू माह चैत्र में मनाया जाता है। चैत्र माह में होने के कारण इसे चैत्र नवरात्र भी कहते हैं। यह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च अप्रैल में पड़ता है। इस बार चैत्र नवरात्र का पर्व 11 अप्रैल यानि आज से शुरू हो गया है। एक नवरात्र इस समय होता है और दूसरा नवरात्र शरद ऋतु में मनाया जाता है। नवरात्र का अर्थ है नौ रातें। संस्कृत में नौ को नव कहते हैं और रात को रात्र। नौ दिनों तक देवी यानि शकित की पूजा होती है। चैत्र नवरात्र में पहले तीन रात मां दुर्गा की पूजा होती है। इसके बाद देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती की। चैत्र नवरात्र में देवी की पूजा राक्षस महिषासुर पर देवी के विजय को मनाने के लिए किया जाता है।

 

चैत्र नवरात्र अधिकतर उत्तर भारत में मनाया जाता है जैसे उत्तर प्रदेश , हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड , मध्य प्रदेश , पंजाब एवं हरियाणा। इस समय लोग व्रत भी रखते हैं और घर में भोज भी होता है। नवरात्र के दौरान ज्यादातर लोग शाकाहारी , कुछ विशेष प्रकार का भोजन करते हैं। इसके पीछे यह सोच है कि व्रत और शाकाहारी भोजन शरीर को आने वाली गर्मी झेलने के लिए तैयार करता है। चैत्र नवरात्र या बसंत नवरात्र बसंत , नये फसल बोने और शीत ऋतु की विदाई का सूचक है। इसी तरह शरद नवरात्र ग्रीष्म ऋतु की विदाई का सूचक है।

बसंत नवरात्र के पीछे एक कहानी है। शशीकला और बनारस के युवराज सुदर्शन के विवाह में देवी ने मदद की एवं उन दोनो को प्रति वर्ष इसी समय उनकी पूजा करने का आदेश दिया। श्री राम राजा सुदर्शन के वंशज थे और इस समय चैत्र माह में नवरात्र की परंपरा श्री राम द्वारा जीवित रही।

नवरात्र के प्रथम दिन को घटस्थापना कहते हैं। इस दिन घर के सामने भूरे लाल मिटटी ;टेराकोटाद्ध के कलश की स्थापना करते हैं और उसके उपर जलता हुआ दिया रखते हैं। यह दिया एक बार भी बिना बुझे नौ दिनों तक जलना चाहिए। यह कलश ब्रहमांड का प्रतीक है और जलता हुआ दिया ज्ञान का।

दूसरे दिन देवी ब्रहमचारिणी की पूजा होती है। इसे सिंधार दूज कहते हैं।
तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इस दिन को सुहागिनें बहुत उत्साह से मनाती हैं। चौथे रोज वरदविनायक चतुर्थी समस्त ब्रहमांड की देवी को समर्पित है।
पांचवे दिन नाग पंचमी है। इस दिन सांपो को दूध पिलाया जाता है और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है।

छठे दिन को यमुना जयंती कहते हैं। यह दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। 
सातवां दिन विजया सप्तमी के दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर को मार डाला था।
आठवें दिन को दुर्गा अष्टमी करते हैं। इस दिन घर में विशेष प्रकार का भोजन बनता है और आठ छोटी छोटी कन्याओं यानि कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है।
नौवें दिन राम नवमी होता है। राम नवमी से चैत्र नवरात्र की समाप्ती होती है। राम नवमी को श्री राम चन्द्र जी का जन्मदिन है।

दोनों नवरात्र राम चन्द्र जी से जुड़े हुए हैं। दोनों नवरात्र मौसम और फसल से भी जुड़े हुए हैं। पुरूष शासित ब्रहमांड में वर्ष के दो बड़े त्यौहार दोनों नवरात्र देवी दुर्गा अर्थात नारी शकित के प्रतीक को समर्पित है।इससे स्पष्ट होता है कि पुरूष शासित समाज में नारी शकित का क्या स्थान है।

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