Saturday, November 25, 2017
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tulsi vivah

कार्तिक माह में भगवान विष्णु का पूजन तुलसी दल से करने का विशेष माहात्म्य है। धर्मशास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह में यदि तुलसी विवाह किया जाए तो कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।


विधि-विधान से तुलसी पूजन ए वं तुलसी विवाह करने से भगवत कृपा द्वारा घर में सुख-शांति, समृद्धि का वास होता है। हिन्दुओं के संस्कार अनुसार सभी शुभ मांगलिक कार्यों में तुलसीदल अनिवार्य माना गया है। तुलसी घर-आँगन के वातावरण को खमय तथा स्वास्थ्यवर्धक बनाती है इसलिए प्रतिदिन तुलसी में जल देना तथा उसकी पूजा करना आरोग्यदायक है। कार्तिक माह में सुबह स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के बर्तन में जल भरकर तुलसी को जल देना चाहिए तथा संध्या समय में तुलसी जी के चरणों में शुद्ध देसी घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। तत्पश्चात श्रद्धा एवं सामथ्र्य अनुसार धूप, सिंदूर, चंदन लगाकर नैवेध तथा पुष्प अर्पित कर घर में सुख, शांति का वरदान मां तुलसी ए वं विष्णु भगवान से मांगना चाहिए। केवल कार्तिक माह में ही नहीं बलिक प्रतिदिन तुलसी को देवी रुप में हर घर में पूजा जाता है। इसकी नियमित पूजा से व्यक्ति किे पापों से मुक्ति तथा पुण्य फल में वृद्धि मिलती है।

 

तुलसी विवाह की पूजन विधि - तुलसीजी के विवाह हेतु मां तुलसी के पौधे के गमले को गेरु से सजाना चाहिए, गमले के चारों ओर र्इख (गन्ने) का मंडप बनाकर गमले के ऊपर ओढनी या सुहाग की प्रतीक चुनरी ओढ़ार्इ जाती है। उसके बाद गमले को साड़ी में लपेटकर तुलसीजी को चूड़ी पहनाकर उनका श्रंगार किया जाता है। पूजन श्री गणेश जी की वन्दना के साथ प्रारम्भ करके सभी देवी-देवताओं का तथा श्री शालिग्रामजी का विधिवत पूजन करना चाहिए। पूजन करते समय तुलसी मंत्र (तुलस्यै नम:) का जप करें। इसके बाद एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखें। भगवान लिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा करें। आरती के पश्चात विवाहोत्सव पूर्ण किया जाता है। विवाह में जो सभी रीति-रिवाज होते हैं उसी तरह तुलसी विवाह के सभी कार्य किए जाते हैं। विवाह से संबंधित मंगल गीत भी गाए जाते हैं। तुलसी पूजा करने के कर्इ विधान शास्त्रों में वर्णित हैं, उनमें से गृहस्थों के लिए तुलसी नामाष्टक का पाठ करने का विधान है। तुलसी विवाह के समय एवं प्रतिदिन कार्तिक मास में तुलसी नामाष्टक का पाठ विशेष लाभदायक रहता है। 
जो व्यक्ति तिुलसी नामाष्टक का नियमित पाठ करता है उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। तुलसी नामाष्टक -


वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी, पुष्पसारा नन्दनीच तुलसी कृष्ण जीवनी।
एतभामांष्टक चौव स्तोत्रं नामथर्ं संयुतम, य: पठेत तां च सम्पूज सौश्रमेघ फलंलमेता।।

पुराणों में वर्णित है, लक्ष्मी और तुलसी का सम्बन्ध भगवान विष्णु के साथ होने के कारण जिस घर में नियमित रूप से तुलसीजी का पूजन विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक होता है, वहीं लक्ष्मी जी निवास करती हैं।

ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय
निदेषक, ग्रह नक्षत्रम ज्योतिष षोध संस्थान

 

 

 

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