Monday, November 20, 2017
User Rating: / 1
PoorBest 

amarnath

भारत सिथत जम्मु काश्मीर में प्रकृति की देन है अमरनाथ गुफा। भगवान शिव को समर्पित यह गुफा 12,756 फीट की उंचाई पर सिथत है। यह श्रीनगर से 141 किमी दूर है। इस गुफा में जाने का रास्ता पहलगाम शहर से होते हुए जाता है। यहां का शिवलिंग बर्फ से बनता है। वर्ष के कुछ महीनों के लिए ही शिवलिंग पूरी तरह बन कर तैयार होता है और फिर गल जाता है अर्थात इसके बनने और गलने की प्रकि्रया संपूर्ण रूप से प्रकृतिक है।

अमरनाथ गुफा का इतिहास -

कहा जाता है कि 32ईसा पूर्व - 17ईसा पूर्व के दौरान राजा आर्यराजा काश्मीर में बर्फ से बने किसी शिवलिंग की पूजा करते थे। पुस्तक राजतरंगिनी में अमरेश्वर या अमरनाथ का जिक्र है। रानी सूर्यमणि ने 11वीं सदी में इस मंदिर को ति्रशूल,बानलिंग और अन्य पवित्र चिन्ह उपहार में दिये थे। पुराने इतिहास में अमरनाथ गुफा का जिक्र मिलता है।

पवित्र गुफा की खोज -

pavitra gufa

अमरनाथ गुफा का बाहरी हिस्सा

माना जाता है कि मध्य युगों के बाद इस गुफा को लोगों ने भुला दिया। 15वीं सदी में इस गुफा की खोज हुई। इसके बारे में कई कहानियां हैं परंतु सबसे प्रचलित कहानी एक गड़रिये से संबंधित है। बूटा मलिक नामक एक गड़रिये को किसी दिव्य पुरूष ने कोयले से भरा हुआ थैला दिया था। थैले को लेकर जब वह घर पहुंचा तो थैले में उसे कोयले के स्थान पर सोने के सिक्के मिले। खुशी के मारे वह दौड़ता हुआ उसी स्थान पर गया जहां उसे दिव्य पुरूष मिले थे। उस स्थान पर पहुंचकर बूटा मलिक को वह दिव्य पुरूष नहीं मिले परंतु यह गुफा और शिवलिंग मिला। इस तरह अमरनाथ गुफा की खोज का सेहरा एक गड़रिये के सिर बंधा।

शिवलिंग बनने की चमत्कारी प्रकि्रया -

shiv ling
गुफा के छत से पानी रिसकर तैयार शिवलिंग

यह चमत्कार नहीं तो क्या है। प्रतिवर्ष एक खास समय पर बर्फ का शिवलिंग तैयार होना और तय समय पर पिघल जाना। यह प्रकृति का चमत्कार ही तो है। 130 फीट उंची अमरनाथ गुफा के भीतर गुफा के छत से जल की बूंदें रिसकर गुफा के फर्श पर गिरती है। गिरने के बाद यह बूंदें बर्फ बन जाती हैं और अपने आप शिवलिंग का रूप धारण कर लेती है। यह मई से अगस्त तक जमी रहती है। गुफा के उपर हिमालय में जब बर्फ पिघलती है तब पानी रिसकर गुफा के अन्दर गिरती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग का बढ़ना और छोटा होना चंद्रमा पर निर्भर करता है परंतु इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

हिन्दू धर्म के पौराणिक कथा के अनुसार इसी गुफा में भगवान शिव ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को जीवन मृत्यु के गूढ़ रहस्यों को समझाया। इसी गुफा में दो और बर्फ की आकृतियां हैं जो पार्वती और गणेश का प्रतीक स्वरूप है।

अमरनाथ की यात्रा -

amarnath yatra

हिंदुओं के लिए यह एक लोकप्रिय तीर्थ यात्रा है। हर साल यहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। जुलाई - अगस्त में श्रावणी मेले के दौरान भक्त 45 दिनों के लिए इस पवित्र शिवलिंग के दर्शन करते हैं।

काश्मीर की विरासत को खतरा -
यह पवित्र गुफा एक तीर्थ स्थल है तो लोग दर्शन के लिए जाएंगे ही लेकिन यही तो आज काश्मीर की विरासत अमरनाथ गुफा के लिए खतरा बन चुका है। पहले इसी साल की बात करते हैं। अभी अमरनाथ यात्रा शुरू भी नहीं हुई है और खबर आ रही है कि बर्फ का शिवलिंग 50 प्रतिशत पिघल गया है। कारण काश्मीर में इस साल पड़ी भीषण गर्मी। काश्मीर में मौसम परिवर्तन के लिए तो हम ही जिम्मेदार हैं न। विकास के नाम पर आज तक हम मनुष्य प्रकृति से खिलवाड़ ही तो करते आ रहे हैं और इतने खतरनाक परिणाम सामने आने पर भी सबक नहीं सीख रहे हैं।

amar nath yatra

कुछ साल पहले ही बर्फ के शिवलिंग के बिल्कुल सामने दिया जलाकर पूजा करने की बात सामने आई थी जिससे शिवलिंग उस साल श्रावणी मेला से पहले ही पिघल गया था। ऐसा भक्त अधिक पैसा देकर करते हैं। वह क्या सोचते हैं ? शिवलिंग के बिल्कुल सामने दिया जलाकर शिवलिंग को समय से पूर्व पिघला देने से उनका पुण्य ज्यादा होगा।

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

culture

Who's Online

We have 2261 guests online
 

Visits Counter

749580 since 1st march 2012