Thursday, November 23, 2017


''आज लखनऊ जिला जेल में यह डायरी प्राप्‍त हुई। चार डायरियाँ थी, तीन बँट गईं, एक का इस्‍तेमाल मैं करूँगा।'' यह पंक्तियाँ गणेशशंकर विद्यार्थी ने 31 जनवरी 1922 को लिखी थीं।

डायरी


10 .4 .2007

मन जो इन दिनों फालतू बिल्ली बन गया है, बहलाऊँ बहल जाता है, भगाऊँ भाग जाता है। कल शाम एकाएक लोडशेडिंग हो गई थी। गर्म, सूनी और अँधेरी शाम में मोमबत्ती की रोशनी में रहना बहुत डिप्रेसिंग लग रहा था। यूँ भी इन दिनों पीछे की तरफ का हमारा घर भुतहा घर बन गया है।

डायरी

malala

अनुवाद - नासिरुद्दीन

बारह-तेरह साल की ही एन फ्रैंक थी। दूसरे महायुद्ध के दौरान फासीवादी हिटलर की सेना से छिपने-छिपाने के दौरान वह एक डायरी लिख रही थी। आखिर में यह बच्ची पकड़ी गई। हिटलर के यातना शिविर में 15 साल की उम्र में उसने दम तोड़ दिया। सालों बाद इस डायरी के जरिए एक बच्ची की नजर से दुनिया हिटलर के शासन में लोगों की जिंदगी से रूबरू हुई। यह 'डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' के नाम से आज भी मशहूर है।

डायरी

madhu kankariya

21.1.2010

नींद कामयाब ही थी। बस एक छोटे से सपने ने हलकी सी खलबली मचा दी थी। कामयाब होते होते रह गयी नींद। यदि सपनों में सत्य के बीज छिपे रहते हैं तो यह तय है कि आनेवाला समय मेरे लिए उतना आसान नहीं रहेगा।

डायरी

life is beautfull

2.1.48
लगता है जीवन का जो विस्तृत स्पन्दन मेरे चारों ओर जगत में हो रहा है, उसमें एक अपरिमित सौन्दर्य छिपा हुआ है। यह सौन्दर्य सरल, मधुर और गतिमय है। जैसे किरणों के तारों पर सौरभ की चंचल परियाँ नाच रही हों। कभी-कभी मेरी कल्पना में इन परियों का संगीत प्रतिध्वनित हो उठता है। इसे कोरी भावुकता कहूँ या सत्य, लगता है कि मेरी चेतना भी स्वयं उसी अल्हड़ गति पर थिरक रही है, झूम रही है।

डायरी

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