Saturday, November 25, 2017

एक गरीब आदमी था। एक दिन वह राजा के पास गया और बोला, 'महाराज, मैं आपसे कर्ज माँगने आया हूँ। कृपा कर आप मुझे पाँच हजार रुपए दें। मैं पाँच वर्ष के अंदर आपके रुपए वापस कर दूँगा।' राजा ने उसकी बात पर विश्‍वास कर उसे पाँच हजार रुपए दे दिए। पाँच वर्ष बीत जाने के बाद भी जब उस व्‍यक्ति ने राजा के पाँच हजार रुपए नहीं लौटाए तब राजा को मजबूरन उसके घर जाना पड़ा।

अन्य


दिल्‍ली में संसद सदस्‍यों के बड़े बँगलों के पीछे छोटी-छोटी गलियाँ हैं। इनमें छोटी-छोटी झुग्गियों में धोबी, घरेलू नौकर, शाक-सब्‍जी बेचने वाले, कबाड़ी और तरह-तरह के छोटे-मोटे काम करने वाले लोग रहते हैं। लोग हुए तो पता नहीं कुत्‍ते कहाँ से आकर बस जाते हैं।

बाल साहित्य


श्री राम नाम सत्य है... सत्य बोलो गति है, श्री राम नाम सत्य है... सत्य बोले गति है...। अर्थी श्मशान पहुँच गयी। पीछे एक लम्बी भीड़ भी श्मशान स्थल पर इकट्ठी होती जा रही थी। ये भीड़ मैडम की अन्तयेष्टी में शामिल होने आयी थी मगर सब के सब जैसे किसी मजबूरीवश यहाँ चल कर आये हों।

कहानी

प्रधान संपादक
    राम प्रकाश सक्सेना

सहायक संपादक
    शोभा पालीवाल

तकनीकी सहयोग
  
  जगदीप सिंह दांगी
 

सन् : 2013
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
 

संपादक मंडल
 
   निर्मला जैन
    गंगा प्रसाद विमल
    उमाशंकर उपाध्याय
    कुसुम बाँठिया
    नरेंद्र व्यास

अन्य


पात्र

महात्मा गाँधी : वयोवृद्ध अवस्था

मोहनदास : महात्मा गाँधी के बचपन की भूमिका, उम्र 8-10 साल

बालक 1 : मोहनदास का बालसखा, उम्र 8-10 साल

बालक 2 : मोहनदास का बालसखा, उम्र 8-10 साल

पुतलीबाई : मोहनदास की माँ, युवावस्था

सुहासिनी : बालिका, उम्र 8-10 साल

भजन गायक व प्रार्थना सभा में श्रद्धालुओं के तौर बैठाने के लिए अन्य बालक-बालिकाएँ अलग-अलग आयु-वर्ग के; संख्या : आवश्यकतानुसार।

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