Sunday, February 25, 2018

 


येरुशलम : इजरायल के एक भूगर्भशास्त्री ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। 'डेली मेल' पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, भूगर्भशास्त्री डॉक्टर ए शिमरॉन का दावा है कि उन्होंने येरुशलम में जीज़स और उनके बेटे की कब्र की प्रमाणिकता और उसके अस्तित्व को पुख्ता किया है।

करीब 150 कैमिकल टेस्ट के बाद शिमरॉन ने दावा किया है कि उन्होंने जेम्स ओजुएरी (पहली शताब्दी के चॉक बॉक्स जिसके बारे के में मान्यता है कि उनमें जीज़स के भाई की हड्डियां हैं) का 'जीसस फैमिली टॉम्ब' का कनेक्शन भी खोज लिया है। ये टॉम्ब येरुशलम के पूर्व में स्थित बताई गई हैं।

शिमरॉन ने दावा किया है कि जीज़स शादीशुदा थे और उनका एक बेटा भी था। डॉक्टर शिमरॉन के मुताबिक, 'गॉड के बेटे' को नौ अन्य लोगों के साथ दफनाया गया था जीसस के बेटे जुदा और पत्नी मैरी शामिल हैं।

चॉक बॉक्स पर मिले अभिलेखों में 'जेम्स, जोसेफ का बेटा, जीसस का भाई' आदि का उल्लेख भी मिला है। इन्हीं संबंधों और जांच के आधारों पर शिमरॉन का दावा है कि जीज़स एक बच्चे के पिता भी थे और शादीशुदा थे। चॉक बॉक्स में लिखित नाम भी एक परिवार से ही संबंधित हैं।

 

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

 

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पैरिस : मंगलवार को हादसे के शिकार हुए जर्मनविंग्स प्लेन के ब्लैक बॉक्स से चौंकाने वाली जानकारी मिली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनविंग्स प्लेन का एक पायलट कॉकपिट के बाहर लॉक हो गया था और उसके कई बार नॉक करने पर भी अंदर बैठे दूसरे पायलट ने दरवाजा नहीं खोला था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि या तो कॉकपिट में बैठे पायलट ने जानबूझकर प्लेन क्रैश कर दिया या फिर वह किसी वजह से जवाब नहीं दे पाया।

प्लेन के मलबे से मिले ब्लैक बॉक्स वॉइस रेकॉर्डर से मिली ऑडियो फाइल्स से साफ हुआ है कि एक पायलट कॉकपिट छोड़कर चया गया था और वह दोबारा अंदर नहीं आ सका। न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक आवाज से ऐसा लग रहा है कि पहले बाहर वाले पायलट ने धीरे से कॉकपिट का दरवाजा नॉक किया। जब अंदर बैठे उसके कॉलीग ने जवाब नहीं दिया, तो घबराहट में उसने जोर-जोर से दरवाजा पीटा। 

इस खुलासे से यह पता चल रहा है कि 150 यात्रियों की मौत की वजह बने इस हादसे से ठीक पहले क्या हुआ था। जाहिर है, इस दावे के बाद कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। माना जा रहा है कि या तो कॉकपिट के अंदर बैठे पालयट के आत्महत्या के इरादे की वजह से यह प्लेन क्रैश हुआ या फिर यह किसी आतंकवादी वारदात का नतीजा है। कॉकपिट में बैठे पायलट की तरफ से कोई जवाब न आने पर यह भी आशंका पैदा होती है कि या तो उसकी मौत हो गई थी या फिर वह किसी तरह से 'लाचार' हो गया था।

कॉकपिट वाले पायलट की ऐक्टिविटी का ब्लैक बॉक्स से कोई रेकॉर्ड नहीं मिल पाया है। थोड़ी अजीब सी बात यह है कि जर्मनविंग्स ने न तो इस फ्लाइट के पायलट्स का नाम बताया है और न ही उनकी उम्र या नागरिकता जैसी जानकारी जाहिर की है। ऐसे में अफवाहों को बल मिल रहा है।

 

साभार: नव भारत टाइम्स

 

 

 

 

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दामासक : नाइजर और चैड की सेनाओं से हारकर भाग रहा आतंकी संगठन बोको हराम अपने पीछे लाशों का अंबार छोड़ गया है । जहां-जहां से आतंकी गुजरे, उन्होंने कत्ल-ए-आम मचा दिया। नॉर्थ ईस्टर्न नाइजीरिया में शुक्रवार को 70 से ज्यादा ऐसी लाशें मिलीं, जिनमें से ज्यादातर का गला रेता हुआ था।

जैसे ही सेना कस्बे में दाखिल हुई, कंक्रीट के पुल के नीचे एक ऐसी जगह दिखी, जिसे इस्लामिक आतंकियों इस जगह को लोगों की जान लेने के इस्तेमाल किया था। यहां पर एक लाश मिली, जिसका गला कटा हुआ था। आगे जाने पर जगह-जगह लाशें बिखरी पड़ी थीं, जो रेगिस्तान की सूखी हवा और गर्मी में तपकर ममी बन चुकी थीं (विचलित करने वाली तस्वीर खबर के आखिर में दी गई है, कृपया अपनी जिम्मेदारी पर देखें)। लाशों के आसपास अब घास उगने लगी है, जिससे पता चलता है कि ये हत्याएं कुछ दिन पहले की गई होंगी।

नॉर्थ ईस्ट नाइजीरिया में इस्लामिक खिलाफत की स्थापना करने के मकसद से बोको हराम पिछले 6 साल से हिंसा फैला रहा है। यहां पर अराजकता के दौर में हजारों लोग बोको हराम के हाथों अपनी जान गंवा चुके हैं। इस्लामिक संगठन ने पिछले साल नवंबर में दामासक पर कब्जा किया था। पिछले शनिवार नाइजर और चैड की सेनाओं ने अंतर्राष्ट्रीय मदद के दम पर आतंकियों का यहां से खात्मा किया है।

चैड के एक सैनिक ने बताया कि गुरुवार को ये लाशें मिली थीं। उसने कहा, 'पूरे इलाके में सूखी हुई नदी के तल पर कम से कम 100 लाशें बिखरी पड़ी थीं। रॉयटर के एक प्रत्यक्षदर्शी ने 70 लाशें गिनीं। कस्बे के कई हिस्सों से बदबू आ रही थी, जिससे आशंका है कि कई जगहों पर और भी लाशें सड़ रही होंगी।

पुल के किनारों पर खून के धब्बे काले पड़ चुके हैं, जिससे अंदाजा लगता है कि यहां पर हत्या करने के बाद लाशों को यहां से फेंक दिया जाता था। कस्बे के इमाम की भी हत्या की जा चुकी है। 50 लोगों के अलावा इस कस्बे के बाकी बाशिंदे सेना के पहुंचने से पहले ही भाग चुके थे। पीछे सिर्फ बीमार और बूढ़े रह गए थे, जो चलने-फिरने के काबिल नहीं थे।

स्थानीय निवासी मूसा ने बताया, 'जब बोको हराम ने हमला किया, हम लोग झाड़ियों की तरफ भागे। वे गोलियां चलाते रहे। उन्होंने लोगों का पीछा किया और उन्हें मार दिया।'

इस साल की शुरुआत में बोरो हराम ने 20 सरकारी इलाकों पर कब्जा कर लिया था, जिसका क्षेत्रफल बेल्जियम के बराबर था। नाइजीरिया की सेना ने विदेशी सहयोगियों की मदद से 3 जिलों से विद्रोहियों को उखाड़ फेंकने में कामयाबी हासिल की है।

तस्वीर: गर्म और सूखी हवाओं से ममी बन चुकी हैं लाशें (रॉयटर्स)

 

 

 

 

 

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वॉशिंगटन : अमेरिका का कहना है कि उसने 2008 में हुई मुंबई हमले के मामले में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के खिलाफ पाकिस्तान को कई 'विश्वसनीय' सबूत सौंपे हैं। गौरतलब है कि मुंबई हमले के सिलसिले में अमेरिका की कई सिक्यॉरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने कई सबूत जुटाए थे।

अमेरिका के एक सीनियर अधिकारी का कहना है किअमेरिका ने लखवी पर पाकिस्तान को कई पुख्ता सबूत सौंपे थे ये सबूत क्या थे, इसके बारे में बताने से इनकार करते हुए अधिकारी ने कहा कि अभी यह मामला चल रहा है, इसलिए इस बारे में कुछ बताना ठीक नहीं है। मुंबई हमले को लेकर अमेरिका ने जो जानकारी पाकिस्तान के साथ शेयर की है, वह डेविड हेडली से हुई पूछताछ के आधार पर जुटाई गई है। हेडली अभी इस हमले में शामिल में भूमिका होने की वजह से अमेरिकी जेल में बंद है और सजा काट रहा है।

इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान सहयोग करता रहा है और उम्मीद है कि वह इन हमलों की अपराधियों को भी सजा दिलाएगा। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता जेन साकी ने कहा था, 'पाकिस्तान सरकार ने मुंबई आतंकी हमले की साजिश रचने वालों, पैसा देने वालों और प्रोत्साहित करने वालों के खिलाफ ऐक्शन लेने में सहयोग का वादा किया था। हम गुजारिश करते हैं कि वह अपने वादे पर खरा उतरे।

लखवी और 6 अन्य- अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमाद अमीन सादिक, शाहिद जमील रिआज़, जमील अहमद और यूनिस अंजुम- पर मुंबई हमलों की साजिश रचने और अंजाम देने का आरोप है। माना जाता है कि 55 साल के लखवी का लश्कर के संस्थापक और जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद के साथ करीबी रिश्ता है। लखवी को दिसंबर 2008 में अरेस्ट किया गया था और 25 नवंबर, 2009 को 6 अन्य के साथ उसे मुंबई हमलों का आरोपी बनाया गया था। 2009 से मुकदमा चल रहा है। पिछले पांच साल से वह जेल में ही बंद है।

साभार: नव भारत टाइम्स 

 

 

 

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बीजिंग. चीन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रविवार को अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को हल करने में परेशानी होगी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक लिखित बयान में कहा कि भारत द्वारा उठाए जा रहे इस तरह के कदमों से सीमा विवाद हल करने में कोई सहायता नहीं मिल सकती। हुआ ने कहा, "हम चाहते हैं कि भारत हमारी चिंताओं को समझे और दोनों देश मिलकर सीमा विवाद को हल करने की दिशा में कदम उठाएं। बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाया जा सकता है।" हुआ ने कहा कि 1987 में भारत ने अरुणाचल प्रदेश को गलत तरीके से भारतीय गणराज्य का एक राज्य घोषित कर दिया था।

 

बयान में अरुणाचल प्रदेश को भारत का ‘कथित राज्य’ बताते हुए कहा गया है कि तीन क्षेत्रों को मिलाकर इसे बनाया गया। ये हैं चीन का तिब्बती क्षेत्र मोन्याल, लोयुल और सायुल। बयान में कहा गया है कि इन तीनों क्षेत्रों पर भारत ने गलत तरीके कब्जा किया है। चीन ने कहा है कि मैकमोहन लाइन से लगने वाले ये क्षेत्र वास्तव में चीन के हैं। बयान में ये भी कहा गया है कि चीन की किसी भी सरकार ने 1914 के बाद से मैकमोहन लाइन को मान्यता नहीं दी है।

 


हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब चीन ने किसी भारतीय प्रधानमंत्री के अरुणाचल प्रदेश दौरे को लेकर आपत्ति जताई है। साल 2009 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्रीमनमोहन सिंह अरुणाचल दौरे पर गए थे, तब भी चीन ने इसका विरोध किया था। इसके अलावा, 2013 में जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस प्रदेश के दौरे पर गए तो चीन ने एक बयान जारी कर भारत को चेतावनी दी थी कि वह इस विवाद को हल करने की दिशा में पहल करे।

 

 

 

 

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