Friday, November 17, 2017
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dhwaj-poojan

इलाहाबाद। कुंभ मेला प्रशासन ने एक तरफ जहां अलग-अलग अखाड़ो आश्रमों एवं मठों को जमीन देने का कार्य शुरू किया वहीं पर दूसरी तरफ सतों ने संगम क्षेत्र में आना शुरू कर दिया है। गुरूवार को काली सड़क के पास जूना अखाड़ा ने ध्वज पूजन किया। यह जानकारी देते हुए जूना अखाड़ा के महंत प्रेम गिरि ने बताया कि ध्वज पूजन काली सड़क और त्रिवेणी बांध के पास दी गई जमीन के एक भाग पर काशी सुमेरू पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती और अनेक संतो की मौजूदगी में हुआ।

यह पूजा दोपहर 12 बजे वैदिक मंत्रोच्चार तथा धार्मिक रिवाजों के अनुसार संतों ने किया। इसके दौरान 52 फीट लंबी ध्वजा इस क्षेत्र में फहराई गई। उन्होंने बताया कि पेशवाई बहुत भव्य होगी जो कि शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद तथा स्वामी अवधेशानंद गिरि की अगुवाई में होगा। इस दौरान सैकड़ों नागा संत मौजूद रहे।

आसमान में सनातन धर्म की ध्वजा लहराते की संतों में खुशी की लहर दौड़ गई। संतों ने दोनो हाथ उठाकर हरहर महादेव का ध्वनिनाद किया तथा तालियां बजाकर खुशी दर्शाई।इस तरह 12 वर्ष बाद लगने वाले महाकुंभ का आगाज हो गया। यह धर्म ध्वजा पूरे महाकुंभ भर लहराती रहेगी। जूना अखाड़े की धर्मध्वजा स्थापना के अवसर पर मेला प्रशासन के कई अधिकारी भी पहुंचे।

अखाड़ों की धर्मध्वजा स्थापना तिथि

निरंजनी,आनंद            26 दिसंबर

महानिर्वाणी,अटल           31 दिसंबर

बड़ा उदासीन              9 जनवरी

नया उदासीन              9 जनवरी

निर्मल                    13 जनवरी

अखाड़ों की पेशवाई

जूना,आवाहन,अगिन         18 दिसंबर

महानिर्वाणी               3 जनवरी

निरंजनी,                  4 जनवरी

अटल                     5 जनवरी

आनंद                     6 जनवरी

बड़ा उदासीन              10 जनवरी

नया उदासीन              11 जनवरी

निर्मल                   12 जनवरी

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