Sunday, November 19, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

 

 

 

 

incomplete kumbh preperations

दुनियां का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुम्भ अब से कोई डेढ़ महीने बाद इलाहाबाद में शुरू होने जा रहा है।ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार प्रयाग के महाकुम्भ में दस करोड़ से अधिक लोग शामिल होंगे।संसारिकता से मुक्ति की अभिलाषा में यहाँ आनेवाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं को लेकर शासन और प्रशासन की तैयारी अभी भी आधी अधूरी है।


इलाहाबाद का महाकुम्भ हरिद्वार नासिक और उज्जैन में होनेवाले महाकुम्भ से अलग हटकर है।भौगोलिक रूप से संगम का इतना बड़ा विस्तार उपरोक्त तीनो ही तीर्थ स्थलों पर नहीं है।इलाहाबाद में संगम का इतना विहंगम दृश्य है,मानों लगता है गंगा यहाँ आकर थक गयी हों और प्रयाग की पावन धरती पर विश्राम करने लगी हों।इलाहाबाद के नैनी से लेकर झूंसी और फाफामऊ तक गंगा का विस्तृत अंचल करोड़ों की आबादी को एकसाथ पनाह देने के लिए काफी है।अबसे एक महीने बाद तम्बुओं का ऐसा अद्भुत शहर नजर आयेगा,जो पूरी धरती पर कहीं और देखने को नहीं 
मिलेगा।नयी पीढ़ी जब इस धार्मिकता की चुनरी ओढ़े ऐतिहासिक मंजर को देखेगी तो निश्चित रूप से दांतोंतले उंगली दबा लेगी और तब उसे इस भारतभूमि पर जन्म लेने का गर्व होगा। इलाहबाद को धरती पर तम्बुओं का सबसे बड़ा नगर बसाने का श्रेय भी जाता है।
महाकुम्भ की ऐतिहासिकता का उल्लेख यहाँ मेरा ध्येय नहीं था।मैं देश और दुनियां को बताना चाह रहा था कि धरती के इस सबसे बड़े आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश का शासन और स्थानीय प्रशासन किस कदर लापरवाह है और महाकुम्भ के लिए आवंटित धनराशि का किस तरह से यहाँ के ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच बन्दर बाँट चल रहा है,यह देखने लायक है।महाकुम्भ के लिए राज्य सरकार ने अपने विभिन्न विभागों को करीब चार सौ करोड़ रुपये आवंटित किये थे।वहीँ केंद्र ने भी महाकुम्भ के लिए अपने खजाने का मुंह पूरी तरह खोल दिया।हलाकि इस खजाने को दिल्ली से इलाहाबाद पहुँचने में महीनो लग गए।इन्हीं पैसों की आस में तमाम सरकारी एजेंसियों ने उधारी सुधारी लेकर आधे-अधूरे काम संपन्न कराये हैं।यहाँ के नगर निगम का पोल खुलने लगा है।जिलाधिकारी की जाँच में पाया गया कि निगम के ठेकेदारों ने कुम्भ के नाम पर जो सड़कें और नालियां बनवाई हैं,उन सभी में जमकर घटिया सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है।एम एन एन आई टी के तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर ने निगम के दस अभियंताओं को निलंबित करने की शासन से संस्तुति की है।
महाकुम्भ की तैयारियों को लेकर नगर निगम निहायत लापरवाह बना हुआ है।पहले से ही महानगर में नागरिक सुविधाओं का इतना बुरा हाल है,ऐसे में दस करोड़ श्रद्धालुओं का बोझ वह दो महीने तक किस कदर ढो पायेगा,आम आदमी के भी समझ से परे है।महाकुम्भ से सटे हुए मुहल्लों,अल्लापुर,दारागंज,सोहबतियाबाग,रामबाग और नैनी झूंसी में सडकों और नालियों का बुरा हाल है।सीवर लाइन डालने के लिए गंगा प्रदुषण नियंत्रण इकाई ने सडकों को ध्वस्त कर दिया है,जबकि निर्माण अभी भी आधे-अधूरे पड़े हैं।जल निगम,लोकनिर्माण विभाग और परिवहन विभाग की 
तैयारियां भी हकीकत के बजाये कागजों पर अधिक चल रही है।रेलवे भी तैयारियों को लेकर पूरी तरह पिछड़ा है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छठ की तैयारियों का जायजा लेने घाटों पर चले जाते हैं,किन्तु उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इलाहाबाद में कुम्भ की तैयारियों का जायजा लेने के लिए वक्त नहीं मिल पा रहा है।इसके पीछे शायद यह भी सोच हो कि हिन्दू धर्म से जुड़े इस सबसे बड़े आयोजन में अधिक रूचि लेने पर कहीं साम्प्रदायिकता का धब्बा न लग जाये।क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव किसी कीमत पर अपने को हिन्दू और हिंदुत्व के नाम से जोड़कर नहीं देखना चाहते।हलाकि कुम्भ के सरकारी वेबसाईट पर संगम से पहले अखिलेश और आजम ही दिखाई पड़ते हैं।उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव ने भी मन है कि कुम्भ की तैयारियां ठीक नहीं चल रही है,उन्होंने दो विभागों के प्रमुख सचिवों को इलाहबाद में ही कैम्प कर तैयारियों का नियमित जायजा लेते रहने को कहा है।मजेदार बात यह है कि अभी तक गंगा पर प्रस्तावित अट्ठारह पंटून पुलों में से महज एक दो ही मुक्कमल तौर पर बन पाए हैं।संगम क्षेत्र में बिजली के खम्भों के आलावा तैयारियों के नाम पर कुछ खास नजर नहीं आ रहा है।
परिवहन विभाग की तैयारियों से संभागीय परिवहन अधिकारी को अलग रखा गया है।दस करोड़ में से आधे लगभग ट्रेन से और आधे सार्वजनिक और निजी परिवहन से लोग आएंगे,किन्तु रोडवेज महज पांच हजार बसों का इंतजाम कर रहा है।महानगर में यातायात नियमों का माखौल है।चौराहों पर पुलिस खड़ी रहती है और लोग लाल और हरी बत्तियों की परवाह किये वगैर धड़ल्ले से निकल जाते हैं।
केंद्र सरकार ने दुनियां के इस सबसे बड़े आयोजन के लिए महज आठ सौ करोड़ रुपये देकर इतिश्री कर ली।तैयारियों का जायजा लेने के लिए शुरू के दिनों को छोड़ दें तो अभी तक कोई केन्द्रीय टीम भेजना भी मुनासिब नहीं समझा। 
जहाँ तक गंगा की अविरल और निर्मल धारा का सवाल है,तो आज की हालात में हम यही कह सकते हैं कि वह आचमन योग्य नहीं है,नालों का पानी वगैर शोधन के अनवरत गंगा में गिर रहा है।इन सबके बावजूद प्रयाग से होकर गुजरनेवाले मुक्तिमार्ग पर देश और दुनियां के लोगों का स्वागत है।

 

 

 

 

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

Magh Mela 2014

Who's Online

We have 2736 guests online
 

Visits Counter

749181 since 1st march 2012